Category - Dharm

भारतीय ज्योतिष और उसका इतिहास

अपना भविष्य जानने की अभिलाषा मनुष्य में प्राकृतिक एवं अनिवार्य हैं, यथा। वन समाश्रिता येपि निर्ममा निष्परिग्रहा:। अपिते परिपृच्छन्ति ज्योतिषां गति कोविदम्॥ ‘‘जो सर्वसंग परित्याग कर वन का आश्रय ले चुके हैं, ऐसे राग-द्वेष...

भद्रा

भद्रा अथवा विष्टि पंचागों की एक व्यापक वस्तु है। जिस तिथि को विष्टि किरण पड़े उस दिन भद्रा होती है। यह प्राय: प्रत्येक द्वितीया, तृतीया, सप्तमी, अष्टïमी और द्वादशी व त्रयोदशी को लगी रहती है। मुहर्त चिन्तामणि की पीयूष...

नक्षत्र और वर-वधू का चयन

विवाह द्वारा दो भिन्न व्यक्तित्व एक सूत्र में बंधते हैं, जिन्हें जीवन भर एक-दूसरे के पूरक के रूप में साथ निभाना पड़ता है। पति-पत्नी जीवन रूपी रथ के दो पाहिए हैं। यदि इनमें से एक पहिए के गुण दूसरे पहिए के गुणों से भिन्न...

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