कैसे हो ऋण मुक्ति

रूखा भोजन कर्ज सिर और बड़ का बोली नार। देते हैं मनुष्य को मार। क्योंकि ये सब पूर्व जन्म के पापों का पुरस्कार है। वास्तव में ऋण में फंसना अति सुगम है किन्तु निकलना अति दुर्गम इसलिए एक लोक कहावत है- कि ऋण में जो फंसता है वह रोता है। चार्वाक का सिद्धान्त ‘‘जब तक जीओ सुख से जीओ, ऋण लेकर घी पीओ’’ जो न प्राचीनकाल में ही सही था और न ही आज अर्वाचीनकाल में शुभ है क्योंकि जो कर्ज लेकर मरता है उसके दूसरे जन्म में पुत्रियां अधिक होती हैं।

जन्म कुण्डली में धनवान बनने के योग भी होते हैं। अनायास धन प्राप्ति के योग भी होते हैं जैसे गुरु धनेश में होकर धनभाव में ही हो या मंगल के साथ हो। चंद्र, मंगल, लग्न, पंचम या लाभ भवन में हो। लग्नेश व धनेश धनभाव में हो तो मानव धनी होता है। इसी प्रकार लग्नेश धन भवन में हो व धनेश लग्न में हो तो या धनेश अष्टम भाव में हो और अष्टïमेश धनभाव में हो तो अनायास धन प्राप्ति होती है। इसी प्रकार निर्धन योग भी जन्म कुण्डली में होते हैं जैसे केन्द्र में पाप ग्रह हो, शनि, राहू दूसरे भाव में हो। धनेश बारहवें भाव में हो तो व्यक्ति निर्धन होता है। कुछ योग ऐसे भी होते हैं जो मानव का अचानक धन नाश कर देते हैं जैसे लग्नेश निर्बल हो तथा अष्टमेश चौथे, पांचवें या नवें (भाग्य) भाव में हो, धनेश बारहवें हो, भाग्येश व राज्येश बारहवें भाव में हो, धनेश नवम, दशम या ग्यारहवें भाग में हो या तुला राशि में शनि पंचम भाव में हो, या सूर्य केतु पंचम भाव में हो या शनि की साढ़े साती हो तो अचानक धन नाश हो जाता है।

जन्म कुण्डली छठे भाव से ननिसाल व रोग ऋण व रिपु का विचार किया जाता है। छठे घर के स्वामी की महादशा में रोग, ऋण व शत्रु बाधा होती है। सप्तमेश की महादशा भी धन व पत्नी की हानि करती है। बारहवें भाव (व्ययेश)  की महादशा भी निर्धनता प्रद होती है। यदि दूसरे भाव में धनु राशि हो या सप्तम भाव में गुरू हो तो भी साझेदारी में धोखे से निर्धनता आ जाती है। जिनके सप्तम भाव में गुरु हो उन्हें किसी भी कोरे कागज पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए। दूसरे भाव में सूर्य व मंगल भी आर्थिक दृष्टि से कर्जदार बना देते हैं।

धन भवन में शनि यदि स्वग्रही नहीं हो तो मानव ऋण में फंस जाात है। राहू की स्थिति भी दूसरे भाव में धन हानि व परिवार हानि करता है। यदि धन का स्वामी बुध, गुरु के साथ अष्टम भाव में हो तो जातक पिता की पूंजी बराबद करके ऋणी हो जाता है। यदि धनभाव का स्वामी सूर्य लग्न में शनि के साथ हो तो जातक मुकदमे में हार कर ऋणी हो जाता है। यदि धनेश व गुरु स्वग्रही होकर धनु राशि में हो और बारहवें भाव में शुक्र हो तो जातक धन कमायेगा किन्तु बचेगा नहीं और कर्ज लेना पड़ेगा। छठे भवन में मकर राशि हो तो आप की अपेक्षा व्यय विशेष रहता है। यही प्रभाव शनि बारहवें भाव में भी करता है। मंगल, बुध, शुक्र, चौथे भाव में हो व चन्द्रमा नीच हो तो भी मानव कर्जदार रहता है। केन्द्र में पाप ग्रह ज्यादा हों तथा चन्द्रमा नीच के साथ हो या उन पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो या जन्म कुण्डली में तीन या चार ग्रह नीच हों तो भी कर्ज में मानव को फंसना पड़ता है।

आजकल आर्थिक विषमता के युग में तो प्रत्येक मानव चाहे वह राजयोगी हो (राज्याधिकारी) या कर्मयोगी (राजकीय कर्मचारी) हो या व्यापारी कर्ज के बिना काम नहीं चलता क्योंकि ‘ओछी पूंजी धणी को खाती है’ यानि कम पूंजी से व्यापार नहीं चलता। ऋण के बिना न तो मकान बनता है न वाहन और न ही होता है कन्या का विवाह और न ही पूरी होती है सन्तानों की शिक्षा-दीक्षा। अत: जीने के लिए ऋण लिए बिना भी गुजारा नहीं है। ऋण में अनेक लोग तो ऐसे फंस जाते हैं कि ब्याज चुकाते-चुकाते ही बावले हो जाते हैं। और मूल धन से ज्यादा ब्याज चुका देने के बावजूद भी मूलधन का चुकारा नहीं होता और अनेक लोग विवश होकर आत्महत्या तक कर बैठते हैं।

ऐसी स्थिति में क्या हमारे देश में ऋषियों ने ऐसे भी उपाय बताये हैं जिनसे आदमी ऋण मुक्त हो जाये?

तो इसका उत्तर दृढ़ निश्चयात्मक बुद्धि से है कि हां, ऐसे अनेक तंत्र-मंत्र हमारे ऋषियों ने हमें खोज कर दिए हैं जिनसे आदमी ऋण मुक्त हो सकता है।

सर्वप्रथम तो भगवान श्रीगणेश जी महाराज जो कि रिद्धि-सिद्धि (फूड एण्ड फाइनेंस) दाता हैं वे ऋण निवारक भी है। यदि कोई व्यक्ति शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तक ‘‘वक्रतुण्डाय हुँ’’ मंत्र दस हजार जप करे तथा 108 आहुतियां जो अन्न में शुद्ध गाय का घी मिला कर दे तो छ: माह में ऋण मुक्त हो जाएगा। श्री गणेश जी का ऋण मोचन मंत्र गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हूँ नम: फट’’ सवा लाख मंत्र ब्रह्ममुहुर्त में गजदन्त अथवा प्रवाल की माला से करे तो ऋण से अवश्य मुक्त हो जाता है। यह मंत्र इतना प्रभावशाली है कि इस मंत्र के जपने मात्र से ही भूत-पिशाचादि पीड़ा नाश करता है। ऐसा ही एक विलक्षण गणपति मंत्र है ‘‘ऊँ हृीं ग्रीं हृीं’’ इस मंत्र का सवा लाख जप करके खीर का दशांश हवन करने से लक्ष्मी मिलती है। घी का हवन करने से धन, गन्ने से राज्यलक्ष्मी, केले व नारियल के हवन से वशीकरण शक्ति आती है। तथा मधु के साथ लवण के हवन से स्त्री वशीभूत होती है। जिनकी धर्म पत्नी क्रोधी हों वे यदि गणेश जी की नित्या पूजा करके इस मंत्र की एक माला जप कर किशमिश का भोग लगा कर वह प्रसाद स्वयं प्राप्त कर लें तो पत्नी क्रोधित नहीं होगी व ऋण मुक्ति भी शनै:-शनै: हो जाएगी किन्तु फिर यह भी स्मरण रखना चाहिए कि विशिष्ट उपासना उत्सवों एवं कालों में तथा रवि पुष्य व गुरु पुष्य नक्षत्र कालों में इस मंत्र को अत्यधिक जपें। जो लोग नौकरी में हैं या जिनका व्यापार छोटा है और कर्ज लेकर शुरू किया गया है वे यदि थोड़ा सा साबुत धनिया, थोड़ा सा गुड़, थोड़ी सी दोब (दुर्बादल) व श्रद्धानुसार दक्षिणा प्रति बुधवार गणेश जी के मंदिर में चढ़ाये या किसी शिव मंदिर में स्थापित श्री गणेश जी पर चढ़ावें तो भी ऋण मुक्ति होगी किन्तु गणेश का उपरोक्त कोई एक मंत्र का जप मानसिक उठते-बैठते, चलते-फिरते करते रहें।

एक बार पंडित मदन मोहन मालवीय जी का पुत्र पर्याप्त ऋण में फंस गया तो उसने अपने पिता श्री को पत्र लिखकर निवेदन किया कि मुझे ऋण से शीघ्र मुक्ति मिले ऐसा कोई उपाय बतावें। पत्र पढ़ते ही पंडित जी ने पुत्र को प्रत्युत्तर भेजा कि तत्काल गजेन्द्र मोक्ष का पाठ शुरू कर दो। पिता की आज्ञा पुत्र ने मानकर गजेन्द्रमोक्ष स्रोत (यह पुस्तक बाजार में मिलती है।) का पाठ किया और अत्यन्ताल्पावधि में वह ऋण मुक्त होकर श्री वृद्धि की ओर अग्रसर हो गया।

गोपालसहस्रनाम के नित्य पाठ करने से भी विदेश गई हुई लक्ष्मी लौट आती है। अर्थात् दिवाला भी निकल गया हो तो भी मानव श्रद्धा भक्ति व निष्ठायुक्त पाठ करें तो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ चतुष्टय अवश्यमेव प्राप्त करता है तथा शीघ्र ही कर्जमुक्त होकर धनी हो जाता है क्योंकि श्रीकृष्ण अपार करुणा सिन्धु भगवान भक्त तत्पर हैं। यदि कोई व्यक्ति नित्य गोपाल सहस्रनाम का पाठ करके निम्नांकित मंत्र का एक हजार आठ सौ मंत्र तुलसी की माला से करें तो शीघ्रातीशीघ्र ऋण से मुक्त हो जाएगा। ‘‘ऊँ ऐं ह्रीं’’ श्री नमो भगवते राधा प्रियाय राधारमणाय गोपीजन वल्लभीय ममाभीष्टं पूरय पूरय हूँ फट स्वाहा’’ इस मंत्र का कुल सवा लाख जप करना चाहिए तथा कदम्ब की लकड़ी की चौकी पर अष्टगन्ध की स्याही से मंत्र लिखकर षोड़षोपचार पूजन करके सवा लाख मंत्र जप की समाप्ति पर साढ़े बारह हजार दशांश होम हेतु जप करें तो फिर इस मंत्र का चमत्कार देखें।

कर्ज के कारण अनेक लोगों को रात-रात भर नींद नहीं आती, मन में उदासी छाई रहती है। पूजा-पाठ व अन्य किसी काम में मन नहीं लगता, ऐसे सज्जन यदि प्रात:काल स्वत: बिना किसी से बोले एक माला इस मंत्र की जपें ‘‘ ह्रो श्रीं क्लीं ब्लुं श्रुं घर गणपति वरदे विश्वं मम वश्यं आनय आनय स्वाहा’’ फिर चारों दिशाओं में फूंक मार दे तो मानव शीघ्र ऋण मुक्त होता है।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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