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व्यवसाय एवं नौकरी में वृद्धि के लिए उपाय

व्यापार में वृद्धि तथा उन्नति के लिए किसी मंदिर में प्रत्येक शुक्रवार को अनार तथा शनिवार को मुट्ठी भर साबुत उड़द चढ़ाएं।

गुरुवार के दिन श्यामा तुलसी के पौधे के गमले में उगी हुई खरपतवार को निकालकर किसी पीले कपड़े में बांधकर अपने व्यापार स्थल पर रख दें। इससे व्यापार में तरक्की होने लगती है।

अगर नया व्यवसाय आरंभ कर रहे हैं तो शनिवार के दिन पुराने कार्यालय से लोहे की कोई भी एक चीज लेकर आएं। इस चीज को नए कार्यालय में थोड़े से काले उड़द बिछाकर उन पर रख दें। इस प्रयोग को ऐसे स्थान पर करना चाहिए जहां से बार-बार इन्हें हटाना नहीं पड़े। इससे पुराने व्यापार के साथ-साथ नया व्यापार भी फायदे में चलने लगता है।

प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को सीधी डंठल वाली ७ साबुत हरी मिर्ची तथा एक नींबू लेकर इन्हें काले धागे में पिरोएं और अपनी दुकान (व्यवसाय स्थल) के बाहर लटका दें। नियमित रूप से इस प्रयोग को करने पर व्यापार चलने लगता है।

अगर किसी ने आपकी दुकान (व्यवसाय) को बांध दिया है तो दुकान के पूजास्थल में शुक्रवार के िदन अमृत सिद्धी योग या सिद्ध योग में “श्री धनदा” एवं “श्री यंत्र” की प्राण-प्रतिष्ठा करवाएं। नियमित रूप से इन यंत्रों की धूप-दीप से अर्चना करें, दुकान की सभी बाधाएं तुरंत हट जाएगी और व्यापार में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होने लगेगी।

व्यापार में आने वाली किसी भी समस्या या घाटे से बचने के लिए सोमवार को चांदी की ठोस चेन गले में धारण करें। कार्यालय में काम करने वाले लोगों से अच्छा बर्ताव करें और उन्हें धन, वस्त्र आदि देकर प्रसन्न रखें। व्यापार में कभी कोई कमी नहीं आएगी वरन तरक्की ही होती जाएगी।

व्यापार में वृद्धि की इच्छा रखने वाले लोगों को अमावस्या को किसी मंदिर में खीर चढ़ानी चाहिए। इस उपाय से व्यापार में आने वाली सभी बाधाओं और समस्याओं से बचाव होता है।

शनिवार के दिन एक पीपल का पत्ता तोड़कर इसे गंगाजल से धोकर पूजास्थल में रखें। इसके बाद 21 बार गायत्री मंत्र का जप कर धूप दें तथा तिजोरी या गल्ले में रख दें। अगले शनिवार को इस पत्ते को पीपल की जड़ में रख दें तथा नए पत्ते के साथ यही प्रयोग कर उसे रखें। कुछ ही समय में अंतर दिखाई देगा।

एक नींबू लेकर उस पर चार लौंग लगाएं तथा हाथ में रखकर “ऊँ श्री हनुमते नमः” का जप करें। जप के बाद नींबू को अपने पास या जेब में रख लें। अगर व्यापार के लिए किसी से मिलने जा रहे हैं तो इस नींबू को जेब में रखने से कार्य पूरा होता है और सामने वाला व्यक्ति हर बात मानता है।

शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार को दुकान या व्यापार स्थल के मेनगेट के एक कोने को गंगाजल से धोकर शुद्ध करें। तत्पश्चात यहां पर हल्दी से स्वास्तिक बना कर उस थोड़ी सी चने की दाल तथा गुड़ रखें। अब इसे ऐसे ही रहने दे और इस पर ध्यान न दें। अगले गुरुवार को इस गुड़ और चने को किसी मंदिर में चढ़ा दें और फिर से इस प्रयोग को करें। इस प्रयोग को लगातार 11 गुरुवार तक करने से व्यापार में फायदा होता है।

शुक्ल पक्ष के बुधवार, मंगलवार अथवा गणेश चतुर्थी के दिन घर के पूजास्थल में हरिद्रा गणेशजी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करवाएं। प्रतिमा के आगे नियमित रूप से गणेश गायत्री मंत्र “एकदंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात्” का जप करें। इससे व्यापार में कई गुणा फायदा होने लगता है।

घर में गायत्री मंत्र का हवन करवाएं। हवन की राख को सफेद रंग के कपड़े में बांधकर अपने घर या व्यापार स्थल की तिजोरी में रख दें। जल्दी ही व्यवसाय फलने-फूलने लगता है।

रात लगभग आठ-नौ बजे अपने व्यापार स्थल पर सभी कमरों में थोड़ा-थोड़ा सेंधा नमक (लगभग 250 ग्राम) एक अखबार पर रख दें। सुबह जल्दी उठ कर इस पूरे सेंधा नमक को इकट्ठा कर बिना किसी से बोले किसी बहते गंदे नाले में डाल दें। इस प्रयोग से दुकान पर कराए गए तंत्र प्रयोग समाप्त होते हैं और वहां की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

शुक्ल पक्ष के सोमवार को अमृत सिद्धी या सर्वार्थसिद्धी योग में तीन गोमती चक्र चांदी के तार में एक साथ बांधकर अपने पास रखें। इन्हें सदैव अपने पास रखने से व्यापार तथा नौकरी दोनों में लाभ होता है।

अगर नौकरी में किसी तरह की परेशानी आ रही है तो अपने से नीचे के स्तर के कर्मियों को महीने में एक बार वस्त्र, मिठाई या पैसा देकर प्रसन्न करें, उनके साथ अच्छा बर्ताव करें, कुछ ही समय में ही सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।

नई नौकरी ढूंढने की इच्छा हो तो कुत्तों को बिस्किट या अन्य सामान खिलाएं। बढ़िया नौकरी मिलने की कामना करते हुए एक सूखा तथा बिना छिला नारियल बहते जल या नदी में प्रवाहित करें।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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