Lal Kitab Ketu

केतु ग्रह के लाल किताब उपाय

Lal Kitab Remedies for Ketu

हम सभी जानते है की कुंडली में कुल बारह भाव होते है l आप अपनी कुंडली में खुद ही देख सकते है की किस भाव में कौन सा ग्रह ख़राब है , और उसका उपाय कैसे करें l प्रस्तुत लेख में केतु ग्रह के बारह भावों के लालकिताब उपाय दिए जा रहे है, यदि उस भाव में दशा अन्तर्दशा में केतु के दुष्परिणाम दिखाई दे रहे हो तो आप निम्न उपाय कर सकते है और उसके अच्छे परिणामों में हमें परहेज रखना होगा l

पहले खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली में केतु पहले खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आप सुखी, धनी, मेहनती होंगे। आपकी तरक्की अधिक तबदीली कम रहेगी। आप अपने पिता के लिए वरदान सिद्ध होंगे। आप पिता की सेवा करेंगे। आप सरकारी विभाग में सेवारत होंगे तो एक अच्छे सरकारी आफिसर हो सकते हैं। यात्रा का आदेश पत्र प्राप्ति के बावजूद यात्रा न होगी। आपकी आजीविका निरंतर चलती रहेगी। आपका जन्म ननिहाल या अस्पताल में भी हो सकता है। आपको शक्ति मिलेगी। आपके भाग्य में शुभ फल प्राप्त होगा। पत्नी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। माता पर भी अच्छा प्रभाव ही रहना चाहिए। परंतु यह कोई जरूरी नहीं है कि माता पर शुभ प्रभाव ही पड़े। आप लाखों का लेन-देन करेंगे परंतु धन जमा होने में आशंका है। आप गुरु-पिता के सेवक होंगे।

यदि आप अपने पिता से दूर रहे, रिश्तेदारों को बर्बाद करने की कोशिश की या मकान को बिना कारण बेचा तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से जहां आपका जन्म होगा रिश्तेदार तबाह हो जाएंगे। आपके मन में काल्पनिक फिक्र पैदा हो सकती है। पुत्र को कोई कष्ट उत्पन्न होगा। आप पर बुरा असर पड़ सकता है। आपकी गृहस्थी पर कुछ बुरा प्रभाव पड़े ऐसी आशंका है। नाभि के नीचे की बीमारियां होंगी या आपको गुप्तांग में बीमारी हो सकती है। आपको लंबी या विदेश की यात्रा बीच में छोड़ कर वापिस आना पड़ सकता है। आपको संतानोत्पत्ति की चिंता बनी रहेगी। पोते के जन्म के बाद सेहत खराब हो सकती है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. बकरी न पालें या बकरी की सेवा न करें।
  2. गली के आखिरी मकान में रिहाईश न करें।

उपाय:

  1. लाल रुमाल पास रखें।
  2. काले-सफेद कुत्ते की सेवा करें।

द्वितीय खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली के दूसरे खाने में केतु पड़ा है। इसकी वजह से आप छोटी उम्र में कमाना सीखेंगे, सरकार से वजीफा या धन लाभ मिले, कमीशन एजेंट का कार्य या खजांची का कार्य भी लाभदायक रहेगा। आप अच्छी नौकरी-व्यापार करेंगे। आपको अपने व्यवसाय के सिलसिले में बार-बार यात्रा करना लाभदायक रहेगा। आप स्थल की यात्रा बहुत करेंगे। आप बड़ी संपदा के मालिक बनेंगे आपका धन अच्छे कर्मों में खर्च होगा। युवावस्था के पश्चात् जीवन सुख से बीतेगा। आपको पिता की संपत्ति मिलेगी। आपकी लाखों-करोड़ों की आई-चलाई मगर जितना धन दलाल को मिलता हैै, उतना ही धन आपको मिलेगा। आप अपनी कमाई से अपना जीवन निर्वाह करेंगे। जीवन खुशहाल रहेगा। लाखों की धन-जायदाद सुरक्षित रहेगी। आमदनी ठीक होती रहेगी। आप अपने भाग्य पर संतुष्ट रहेंगे। आपको भाग्य का शुभ फल प्राप्त होगा। आपको अच्छा गृहस्थ सुख मिलेगा। अपने जीवन में उन्नति करेंगे। आपका पारिवारिक जीवन सुखी रहेगा। आपको अपनी भूमि, भवन का लाभ मिलेगा।

यदि आपने दो विवाह किये, परस्त्री से अनैतिक संबंध रखे, मादक चीजों-द्रव्यों का प्रयोग किया, सट्टा, जुआ आदि खेला तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारणवश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से अगर आपका चाल-चलन खराब हुआ तो बुढ़ापा दुःखमयी व्यतीत होगा या संतान सुख नहीं मिलेगा। जुएं-सट्टे के काम में हानि होगी। शराब-बीयर पीना हानिकारक है। तबदीली की शर्त होगी, तरक्की की कोई शर्त न होगी। जीवन के 16वें तथा 22वें वर्ष में शारीरिक कष्ट की आशंका है या जीवन में उतार-चढ़ाव आता रहेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. चाल-चलन ठीक रखें।
  2. नकली सोना न पहनें।

उपाय:

  1. कन्याओं की सेवा करें।
  2. स्त्री की सेवा करें।

तृतीय खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली के तीसरे खाने में केतु पड़ा है। इसकी वजह से आप दूसरों का हिस्सा मांगने वाले होंगे, आपको यात्रा से लाभ होगा। नेकी को याद रखना और बदी को भूल जाना आपकी आदत होगी। आपके भाग्य में तबदीली आएगी। आपको पुत्र संतान का सुख होगा। आपका पुत्र भाग्यशाली हो सकता है। आपकी संतान अच्छी और आज्ञाकारी होगी। आप आस्तिक होंगे, दूसरों की सहायता करते रहेंगे। आपके जीवन का 24वां वर्ष उत्तम फलदायी होगा। आपको दूसरे की सलाह लेने से बुरा असर हो सकता है।

यदि आपने ताया-चाचा से झगड़ा किया, साले के साथ कारोबार किया, भाई के साथ झगड़ा किया तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से पेशाब या गुप्तांग में रोग होगा। संतान नालायक होगी या संतान से दुःखी रहेंगे। आवारा घूमेंगे, भाइयों से दूर प्रदेश में जीवन व्यतीत करेंगे। भाई आपके शत्रु न बन जाएं, इस चिंता से दुःखी रहेंगे। आपके सगे संबंधी आपके दुःख के कारण हो सकते हैं। आप मरते दम तक चिंतित रहेंगे। आपका धन दीवानी मुकद्दमों में खर्च हो सकता है। साली से विवाद और पत्नी से मनमुटाव के कारण जुदाई हो सकती है। रीढ़ की हड्डी में रोग पैदा हो सकता है। जिस्म या हड्डी में दर्द या चोट की आशंका है। 24वां वर्ष संतान के लिए कष्ट कारक एवं भाग्य के लिए सुस्त रहेगा। आपको रक्तदोष या शरीर में फोड़े-फुंसी की शिकायत रह सकती है। ससुराल और भाई का हाल अच्छा नहीं रहेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:   

  1. आवारा न घूमें।
  2. भाई से दूरी हानिकारक है।

उपाय:

  1. कानों में ननतियां पहनें।
  2. शरीर पर सोना पहनें।

चतुर्थ खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली के चाथे खाने में केतु पड़ा है। इसकी वजह से आप पूर्ण आस्तिक होंगे। हर काम धीरज के साथ करेंगे। सभी के साथ आपका व्यवहार सौहार्दपूर्ण रहेगा। आप आशावान, गुरु और पिता की सेवा में संलग्न, चरित्रवान और जो मिले उसी में संतोष प्राप्त करने वाले होंगे। आपकी कन्या भाग्यवान और आपके लिए लक्ष्मी स्वरूपा होगी। कन्या के जन्म के बाद आपका घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाएगा। आपको पिता का लम्बे समय तक सुख मिलेगा। आप पिता और गुरु की भक्ति करने वाले होंगे। आपको जायदाद संबंधी कानूनी समस्या खड़ी हो सकती है। आप स्वयं एवं आपके पुत्र दीर्घायु होंगे। आपको अच्छा भवन और उत्तम वाहन सुख प्राप्त होगा।

यदि आपने कुत्ते को मारा या किसी दूसरे से मरवाया, कुत्ता पानी में गिराया, कुल पुरोहित से झगड़ा किया या उससे नाता तोड़ा तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो देर से संतान पैदा होगी या संतान सुख में कमी बताता है। पुत्र संतान की अपेक्षा कन्या संतान अधिक होंगी, ऐसी आशंका है। पुत्र जन्म के बाद माता को कष्ट की आशंका है। मधुमेह रोग की आशंका है। रीढ़ की हड्डी, पेशाब की बिमारी होगी ऐसी आशंका है। दुर्घटना या ऊपर से गिरने का भय है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. कुत्ते को चोट न मारें।
  2. माता से दूर न रहें।

उपाय:

  1. चने की दाल, केसर धर्मस्थान में देवें।
  2. कुल गुरु या कुल पुरोहित का आशीर्वाद प्राप्त करें।

पंचम खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली में केतु पांचवे खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आपको आकस्मिक रूप से धन प्राप्ति होगी। आपको विलक्षण अतिद्रिय शक्ति प्राप्त होगी। आप गुरु भक्त रहेंगे। 24 वर्ष की उम्र के बाद आपके जीवन पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। जीवन में 34 वर्ष आयु में पुत्र द्वारा, उसके पश्चात पौत्र द्वारा सुख प्राप्त होगा। 48 वर्ष की उम्र तक माता का सुख मिलेगा। पत्नी के साथ अच्छा संबंध रहेगा। आपके धर्म-ईमान के अनुसार ही आपकी संतान होगी। आप अपना चाल-चलन ठीक रख कर सुखी रह सकते हैं। आपकी आर्थिक हालत ठीक रहेगी। इच्छित संख्या के अनुसार संतान होगी। पुत्र संतान उत्पत्ति के पश्चात् आपकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार होगा। यदि आप धर्माचरण करते रहें तो जीवन के अशुभ फल दूर हो जाएंगे।

यदि आपने चाल-चलन खराब किया, किसी के पुत्र को या अपने पुत्र को कष्ट दिया कुत्ते को मारा या मरवाया या कुत्ता आपके वाहन से टकरा कर मर गया तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से 45 वर्ष तक आयु का समय बेकार रहेगा। पुत्र से कोई खास सुख प्राप्त नहीं होगा। संतान को कष्ट रहेगा। आपको श्वास संबंधी या दमे के रोग की आशंका है। 48 वर्ष की आयु का समय भी ठीक नहीं रहेगा। सुख में कमी और बाधा उत्पन्न हो सकती है। आयु बढ़ने के साथ आप बुरे लोगों की संगति में रहेंगे। गुप्त रोग का भय, संतान को दमा रोग रहने की संभावना रहेगी। आपका पुत्र आपकी माता के लिए अशुभ रहेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. दुश्चरित्र लोगों की संगति न करें।
  2. लोहे के संदूक में ताला लगाकर बंद न रखें। उन्हें कभी-कभी खोलते रहें।

उपाय:

  1. गुरु-पिता दादा की सेवा करें।
  2. पानी में चीनी डाल कर सूर्य को अर्घ्य देवें।

षष्ठ खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली में छठे खाने में केतु पड़ा है। इसकी वजह से आप अभिमान रहित होंगे। आप एक अच्छे सलाहकार होंगे। आपकी संतान आपके कामों में हाथ बंटायेगी। आप धनवान, शत्रुओं को परास्त करने वाले ननिहाल के लिए शुभ रहेंगे। आपकी संतान आपकी सहयोगी होगी। आपका पुत्र आपकी मुसीबतों का जाल कटेगा और आपकी सहायता करेगा। आपको अपने जीवन में आराम मिलेगा। आप देश या परदेश में कहीं भी रह कर सुखमय जीवन बिताएंगे।

यदि आपने ससुराल से सोने की अंगूठी या 2 चारपाई या पलंग विवाह समय न लिये, ससुराल से मिली अंगूठी गुम हो जाये या बिक जाये तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से माता और ननिहाल में बुरा असर पड़ेगा। आपको कुत्ते से डर लगेगा। कुत्ते के काटने का भय रहेगा। आपका फिजूल खर्च भी हो, ऐसी संभावना है। आपका बुढ़ापा कष्टमय रहेगा। कभी-कभी आपको बेकार की यात्राएं करनी पड़ सकती हैं। बिना किसी कारण के शत्रु पैदा हो सकते हैं। आपकी वृद्धावस्था सुखी नहीं रहेगी। आपका पुत्र दूसरों के लिए बदनसीब होता है। लड़कियां अधिक हो सकती हैं। पेट-चमड़ी-पांव में रोग होगा। आवारा घूमना या धन का अपव्यय अधिक होगा, बिना कारण शत्रु पैदा होते रहेंगे। मामा और माता को कष्ट की आशंका है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:   

  1. ससुराल से मिली सोने की अंगूठी गुम न होने देवें और न बेचें।
  2. परिवार की लड़कियों से झगड़ा न करें।

उपाय:

  1. केसर/हल्दी का तिलक करें।
  2. शुद्ध सोने की अंगूठी बायें हाथ में पहनें।

सप्तम खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली के सातवें खाने में केतु पड़ा है। इसकी वजह से आप 24 वर्ष की उम्र से ही धन कमाने में जुट जाएंगे। जैसे-जैसे आपकी संतान की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे धन में बढ़ोत्तरी होती जाएगी। आजीविका का साधन बना रहेगा। रोजगार द्वारा अच्छी कमाई होगी। आपकी संतान बलशाली होगी। आप अपनी बात के पक्के होंगे। आप सब तरह से सुखी और संपन्न रहेंगे फिर भी पश्चात्ताप करते ही रहेंगे। आपकी संतान शेर का मुकाबला करने वाली होगी। आपकी पत्नी के जितनी संख्या में भाई-बहन होंगे उतनी ही संख्या में आपकी संतान होंगी। 34 वर्ष की आयु तक का समय कष्टमय रहेगा। परंतु इसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा। धनधान्य में बरकत होगी। 24 साल की उम्र में इतना धन आएगा जो कि आने वाले 40 वर्षों तक के लिए काफी होगा। आपके दुश्मन आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ेंगे। दुश्मन अपने आप तबाह हो जाएंगे। जीवन में कभी निराशा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

यदि आपने हर समय लिखने का काम किया, झूठा वायदा किया, परस्त्री गमन किया। अपनी पत्नी से झगड़ा किया तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से 7 वर्ष तक ननिहाल की हालत खराब, 34 वर्ष बाद सुख नष्ट होना शुरु हो जाएगा। झूठ बोलना, झूठा वायदा करना आपको अवनति देगा। शरीर में दर्द या बीमारी होगी। आपकी संतान पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आपका मन स्त्री और पुत्र के संबंध में अशांत रहेगा। आप अपनी जुबान से गंदी बातें बोलेंगे। आप अभिमान के कारण बर्बाद हो जाएंगे। किसी को दिया गया आश्वासन पूरा न करना आपके लिए हानिकारक होगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:   

  1. परस्त्री से अनैतिक संबंध न रखें।
  2. कलम से लिखने का अधिक काम न करें।

उपाय:

  1. 4 केले 4 दिन जल में प्रवाह करें।
  2. 4 नीबू 4 दिन जल में प्रवाह करें।

अष्टम खाने का केतु :  यदि आपकी जन्मकुंडली में केतु आठवें खाने मे पड़ा है। इसकी वजह से पत्नी का स्वास्थ्य अगर खराब रहता हो तो चारित्रिक सुधार के पश्चात् पत्नी का स्वास्थ्य अच्छा हो जाएगा। आपके जीवन के 34 वर्ष आयु से पहले या 34 वर्ष आयु के बाद संतान पैदा होगी। आपकी कई संताने होंगी। पुत्र से सुख मिलेगा और पुत्र को संसार में यश-मान मिलेगा। जीवन में उत्थान होगा।

यदि आपने शराब-कबाब का सेवन किया, घर की छत पर रिहाईश हो, कुत्ता पाला या घर की छत पर कुत्ता बांधा, परस्त्री से अनैतिक संबंध रखे तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से आपको संतान के बारे में चिंता बनी रहेगी। आप स्त्री से द्वेष करेंगे। आपका दगाबाजी का स्वभाव भी रहेगा। आप बवासीर रोग से ग्रसित रहेंगे। आप किसी भी व्यक्ति के सामने अपना दुःखड़ा रोयें तो आपकी और भी हानि होगी। संतानोत्तपत्ति में अवरोध उत्पन्न हो सकता है। आपके मकान की छत गिर जाए तो अशुभ समझें। उस वक्त रोटी के भी लाले पड़ सकते हैं। संतान एवं धन के संबंध में मंदा असर लग रहा है। आपके जन्म के पूर्व बड़े भाई की मृत्यु हो गई हो ऐसा लगता है। गृहस्थ जीवन में भी दरार पड़ सकती है। वैवाहिक जीवन 26वें वर्ष तक सुखी नहीं रहेगा। 48 वर्ष तक संतान से दुःखी या निःसंतान होने की आशंका है। आपके बुरे चरित्र का बुरा प्रभाव आपकी पत्नी के जीवन पर पड़ेगा। यदि दो विवाह हुए तो संतान 34 वर्ष से पहले और 34 वर्ष के बाद भी पैदा होगी। आपकी औलाद पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। आपको मूत्र विकार की आशंका है। आपको अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो जाएगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. घर की छत पर कुत्ता न पालें।
  2. जुआ आदि न खेलें।

उपाय:

  1. काले-सफेद कंबल धर्मस्थान में देवें (संतान की लंबी आयु के लिये)।
  2. काले-सफेद कंबल के टुकड़े में, साथ बैठे ग्रह की चीज बांध कर शमशान में दबायें (संतान सुख के लिये)।

नवम खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली के नौवें खाने में केतु पड़ा है। जिसकी वजह से आपकी प्रगति होती रहेगी तबदीली कम होगी। आप पिता के आज्ञाकारी होंगे। सामने वाले व्यक्ति के मन को भाप लेंगे। आप धनवान और भाग्यवान होंगे। आप जन्मस्थान से दूर रहेंगे। आपकी संतानें दूरदर्शी होंगी। आपकी 48 वर्ष की आयु तक पिता की स्थिति अच्छी रहेगी। आप बलवान, भरोसेमंद और अपनी कमाई से बड़े आदमी बनेंगे। आप समाज सेवक होंगे। आपका जीवन परदेश में बीतेगा। धन-संपत्ति और घर के प्रभाव की वृद्धि होगी। आपकी सोलह वर्ष आयु के बाद शुभ असर शुरु होगा। आप अपने बेटे की सलाह से कोई काम करेंगे तो शुभफल प्राप्त होगा। आप माता-पिता और खानदान को तारेंगे। आपका अपना अच्छा रुतबा रहेगा। आप कोई बड़े अफसर बन सकते हैं। आपके यदि पुत्र होंगे तो दीर्घायु होंगे। आपका आर्शीवाद नामर्द को मर्द बना सकता है।

यदि आपने कुत्ते को चोट मारी या कुत्ते से नफरत की, चोर-डाकू को यदि आप साथ रखेंगे, परस्त्री से चाल-चलन खराब करेंगे तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से शारीरिक कष्ट या जोड़ का दर्द होगा। धन की चिंता बनी रहेगी। प्रगति कम और तबदीली अधिक होगी। विवाह के 7 वर्ष बाद संतान पैदा हो, ऐसी आशंका है। आपकी बहन को पुत्र प्राप्ति न होगी या पुत्र सुख न होगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. चोर-डाकू का साथ न रखें।
  2. कुत्ते को चोट न मारें।

उपाय:

  1. शुद्ध सोने की ननतियां कानों में पहनें।
  2. शुद्ध सोने की चौरस ईंट घर में रखें।

दशम खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली में केतु दसवें खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आप धनवान, नौकर-चाकरों से युक्त, उत्तम सुख से परिपूर्ण तथा अपने पथ पर अग्रसर रहने वाले होंगे। आप इतने अच्छे मुकद्दर के हैं कि आप मिट्टी छुएं तो सोना हो जाता है। 24 वर्ष की उम्र के बाद संतान प्राप्ति योग होगा। आपको कन्या संतान से सुख और पुत्र संतान से मध्यम सुख संभव है। आपको पुत्र का सुख प्राप्त होने की आशा है। आप खेल जगत में विश्व प्रसिद्ध बन कर ख्याति प्राप्त कर सकते हैं। आपके धन में बढ़ोत्तरी होगी। निर्धनता कभी भी नहीं आएगी। आप शक्की स्वभाव के हैं। आपके जीवन में 48 वर्ष आयु तक समय तो मिला-जुला फल देगा। इसके बाद का समय बहुत ही शुभ और सुखकारक सिद्ध होगा। आपकी आर्थिक स्थिति पर कोई विशेष बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। कुल मिला-जुला कर आपका जीवन सुखमय ही रहेगा।

यदि आपने अपने भाई से झगड़ा किया, पर स्त्रियों से अनैतिक संबंध रखें तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से आपका चाल-चलन ढीला हो तो पुत्रियां अधिक होने, नपुंसक होने की संभावना रहती है। निःसंतान या संतान गोद लेने का योग होता है और जिससे आपको बहुत ही पीड़ा भोगनी पड़ सकती है। आपके भाई आपको गढ्ढे में धकेल सकते हैं या आपके धन का दुरुपयोग करेंगे। पराई औरत से संबंध आपके दांपत्य सुख में बाधा पहुंचा सकते है। आपके जीवन के लिए घातक और मौत का कारण सिद्ध हो सकता है। 48 वर्ष के लगभग पुत्र सुख मिलेगा या माता की आंखें खराब होने पर या माता की मौत के बाद पुत्र जन्म हो ऐसी संभावना है। धन का अपव्यय या अवनति होगी।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:    

  1. चाल-चलन ठीक रखें।
  2. कुत्तों से नफरत न करें।

उपाय:

  1. मकान की नींव में चांदी के बर्तन में शहद भर कर रखें।
  2. घर में चांदी के बर्तन में शहद भर कर रखें।

एकादश खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली के ग्यारहवें खाने में केतु पड़ा है। इसकी वजह से आप बहुत धन-दौलत के मालिक होंगे। इसके श्रेष्ठ फल से आप निहाल हो जाएंगे। आपको अपने भविष्य के लिए जागरूक रहना चाहिए। आपको राजपक्ष से शासन से संबंधित कार्यों में अच्छा फल मिलेगा। खानदानी जायदाद से अधिक जायदाद अपने हाथों से बना लेंगे। आपके जीवन में उत्तम राजयोग की संभावना है। आप सरकार पक्ष से या सम्मानित व्यक्ति से लाभ प्राप्त करेंगे। आप यदा-कदा हिम्मत हार बैठेंगे। आपकी औलाद शारीरिक तौर पर अच्छे स्वभाव की और अच्छे काम करने वाली होगी।

यदि आपको काम पर जाते समय कोई पीछे से कोई आवाज दे, माता से झगड़ा या माता का विरोध किया, पुत्र संतान का लालन-पालन अच्छी प्रकार न किया तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से संतान पक्ष को कुछ कष्ट की आशंका है। मां के साथ आपके मधुर संबंध में न्यूनता की आशंका है या माता को आपकी संतान से सुख नहीं मिलेगा। आपको हमेशा ही पेट में दर्द की बीमारी लगी रह सकती है। आपके पुत्रोत्पत्ति के पश्चात् माता के सुख का अभाव हो जाएगा। माता की आंखों का आप्रेशन हो सकता है। बल्कि कुछ सुस्त या नामर्दी भी महसूस करेंगे।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. शुभ काम पर जाते समय पीछे से कोई आवाज दे तो शुभ काम पर न जाएं।
  2. व्यतीत समय को याद न करें।

उपाय:

  1. काला कुत्ता न पालें।
  2. काले-सफेद पत्थर के चकले पर रोटी बेल कर बनायें।

द्वादश खाने का केतु : यदि आपकी जन्मकुंडली के बारहवें खाने में केतु पड़ा है। इसकी वजह से आप ऐश्वर्य संपन्न, सुखी वैवाहिक जीवन और जमीन-जायदाद के सुख से पूर्ण होंगे। आप सरकारी पक्ष की सेवा करेंगे। समयावधि में तबदीली की अपेक्षा तरक्की के अवसर अधिक आयेंगे। आप शुभ कार्यों में खर्च करेंगे। आपके जीवन के 24वें वर्ष में पुत्र प्राप्ति के योग बनेंगे। पुत्र जन्म के बाद घर में बहुत मात्रा में धनागम शुरू हो जाएगा। आपकी संतान भी धनवान होंगी। आपको भवन निर्माण एवं विदेश प्रवास से लाभ मिलेगा। आप आध्यात्मिक भावना के प्राणी होंगे। मन में त्याग की भावना रहेगी। निःसंतान व्यक्ति से मकान या भूमि न खरीदें। आपमें कामवासना अधिक रहती है। कई संतान का सुख प्राप्त होने की संभावना है। आपके जीवन में हमेशा ही भोग और सुख प्राप्त होंगे। आपका ससुराल पक्ष सुखी रहेगा और दौलतमंद होगा। आपके परिवार की तरक्की होगी। आप अय्याश होंगे, यह आपके लिए शुभ रहेगा।

यदि आपने कुत्ते मारे या मरवाये, भाई-बंधुओं से झगड़ा किया समाज विरोधी कार्य किये, आवारा फिरना शुरु किया तो आपका केतु मंदा हो सकता है या किसी कारण वश केतु मंदा हो गया हो तो केतु के मंदे असर से पिता की जायदाद बर्बाद होगी। भाई-बंधुओं से और समाज में अपमानित हों, ऐसी आशंका है। कुत्तों को मारने से या कुत्ते से नफरत करने से संतान को कष्ट या संतान सुख से महरुम, निःसंतान या बच्चा गोद लेने की नौबत आ सकती है। संतान प्राप्ति में कुछ बिलंब हो सकता है। ठगी-धोखेबाजी से कमाया धन कफन का सबूत बनेगा और धन की कमी रहेगी।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. कुत्तों को चोट न मारें।
  2. ठगी-धोखेबाजी से दूर रहें।

उपाय:

  1. घर में हमेशा काला-सफेद कुत्ता पालें।
  2. दोहता-जमाई-साले या जीजा की सेवा करें।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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