Lal Kitab Brihaspati

बृहस्पति / गुरु ग्रह के लाल किताब उपाय

Lal Kitab Remedies for Jupiter

हम सभी जानते है की कुंडली में कुल बारह भाव होते है । आप अपनी कुंडली में खुद ही देख सकते है की किस भाव में कौन सा ग्रह ख़राब है , और उसका उपाय कैसे करें । प्रस्तुत लेख में बृहस्पति/गुरु ग्रह के बारह भावों के लालकिताब उपाय दिए जा रहे है, यदि उस भाव में दशा अन्तर्दशा में बृहस्पति के दुष्परिणाम दिखाई दे रहे हो तो आप निम्न उपाय कर सकते है और उसके अच्छे परिणामों में हमें परहेज रखना होगा।

पहले खाने का बृहस्पति : यदि आपकी कुंडली में वृहस्पति पहले खाने में पड़ा है। जिसकी वजह से आप एक पढ़े-लिखे या उपदेशक या गुरु भी हो सकते हैं। आप विद्वान, अच्छी बुद्धि के संतानयुक्त, शासन द्वारा सम्मान पाने वाले बड़प्पन से युक्त होंगे। विद्या के माध्यम से अपनी आजीविका चलाऐंगे। पैतृक धन से भी धनी होंगे। यदि आपकी शिक्षा कम भी हो तो फिर भी धन आपको प्राप्त होता रहेगा। आप पैसे की वजह से नहीं, करामाती गुण से सम्मान पाएंगे। आप ऊंचे लोगों के साथ रह कर अपनी दिमागी शक्ति और राजदरबार से संबंधित रह कर, सम्मान प्राप्त करेंगे। शादी के बाद आपकी अर्थिक स्थिति अच्छी हो जाएगी और भाग्योदय होगा। आप अपनी कमाई से नया मकान बनवाएंगे। आपको बहुत जायदाद का लाभ होगा। आप स्वस्थ और प्रसन्न रहेंगे। उम्र बढ़ने के साथ-साथ सुख में भी वृद्धि होगी। आपकी पत्नी आपकी आज्ञाकारिणी और सेविका रहेगी।

यदि आपने विद्या अधूरी छोड़ दी, लोगों की व्यर्थ निंदा की, मुफ्त माल, दान आदि से जीवन व्यतीत करना शुरु किया, छोटी आयु में शराब-बीयर पीना शुरु कर दिया तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से अप्रत्याशित घटनाओं एवं अव्यवस्था से सतर्क रहें। विद्या में रुकावट हो सकती है, आपके पिता की मौत दमा या दिल की बीमारी या मानसिक रोग से हो ऐसी आशंका है। आपको श्वास या दमे की बीमारी होगी। प्रथम पुत्र संतान की प्राप्ति से अशुभ फल प्राप्त होने की आशंका है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. मुफ्त गिफ्ट या दान न लेवें।
  2. किस्मत पर भरोसा रखें।

उपाय:

  1. केसर/हल्दी का तिलक करें।
  2. बुजुर्गों का आशीर्वाद लेवें।
  3. शिक्षा बी.ए. या समकक्ष अवश्य पढ़ें।

द्वितीय खाने का बृहस्पति : यदि आपकी जन्मकुंडली में वृहस्पति दूसरे खाने में पड़ा है। जिसकी वजह से आप गुरु का दायित्व निभाएंगे शिक्षा तथा ज्ञान फैला कर उनकी समस्याओं का हल निकाल लेंगे। आपका गृहस्थ जीवन सुखी होगा। दौलत बहुत आ जाएगी। सरकारी कामकाज के अवसर मिलेंगे। आप अपनी जायदाद खुद बनाएंगे। आपके पिता के आशीर्वाद से आपकी दौलत में वृद्धि होगी। अगर आप सरकारी नौकरी करते हैं तो 27वें साल में सरकारी नौकरी में तरक्की होगी। राजदरबार में सम्मान मिलेगा। आप में हुकूमत करने की ताकत होगी और जीवन की हर मंजिल पर फतह पाएगें। आपका कुछ बुरा होने वाला होगा उसके पहले आपको पता चल जाएगा। आपको अचानक दबा धन मिलने की संभावना है। आपको विद्या का बहुत लाभ मिलेगा। आपकी पत्नी सुंदर होगी। आप जीवन में प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे। आप बहादुर होंगे। खेती-बाड़ी या मिट्टी से संबंधित कामों में या कपड़े से संबंधित नौकरी-व्यापार में अच्छा लाभ होगा।

यदि आपने पत्नी का विरोध किया, सर्राफी-जौहरी का काम किया, माता-पिता का विरोध किया या माता-पिता को कष्ट दिया तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से आपकी नजर पर बुरा प्रभाव पड़ने की शंका है। बुढ़ापे में स्वास्थ्य और आर्थिक हालत अच्छी नहीं रहेंगे। आपको दूसरे के झगड़े में पड़ने से नुकसान उठाना पड़ेगा। आप कुछ दुःखी रहेंगे ऐसी आशंका है। आप में बेरहमी भी होगी। पुलिस/कोर्ट से दंड/जुर्माना का भय रहेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. सर्राफी/जौहरी के काम न करें।
  2. चाल-चलन ठीक रखें।

उपाय:

  1. मकान में कच्चा हिस्सा जरुर रखें।
  2. केसर/हल्दी का तिलक करें।

तृतीय खाने का बृहस्पति : यदि आपकी जन्मकुंडली में तीसरे खाने में वृहस्पति पड़ा है। जिसकी वजह से आप जिस पर मेहरबान होंगे तो उसे बड़ा लाभ होगा। आप नौकरी-व्यापार से आजीविका चलाएंगे। 40 वर्ष की उम्र तक गृहस्थ जीवन में पूर्ण योगदान करेंगे। आप न्यायप्रिय होंगे। भाई  से भी सुख प्राप्त होने की संभावना है। परंतु आप स्वयं बुद्धिमान होंगे। आपको अपने भाई-बहन की सहायता करने से लाभ मिलेगा और उनसे संबंध अच्छे रहेंगे। 26 वर्ष की उम्र में आपकी दौलत बढ़ने लगेगी। आपकी औलाद के जन्म के बाद आपका भाग्योदय होगा। आप अपने जीवन में लगातार उन्नति करते रहेंगे। समाज में अच्छी प्रतिष्ठा मिलेगी। आप अपने भाई के मददगार होंगे। आपका घर-वार नेक होगा। आपका जीवन खुशहाल रहेगा। आपकी पत्नी आपके जीवन में सहायता करेगी। आपके द्वारा बुजुर्गों की सेवा से धन-दौलत में वृद्धि होगी। आप धार्मिक स्वभाव के होंगे। आप अपने भाग्य पर सब्र करने वाले होंगे, अपनी किस्मत पर संतुष्ट रहेंगे। आप बुढ़ापे में आराम पाएंगे। आप बहादुर होंगे। आप आंखों की होशियारी से ही दूसरों को भांप लेंगे।

यदि आपके घर में कटा या सूखा पीपल का पेड़, धर्म मंदिर है उसकी सेवा नहीं करते, बुरे तरीकों से धन कमाया या मित्र मार की तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से 31वें वर्ष में बीमारी की आशंका है। आप अपने मित्रों के साथ धोखाधड़ी करके या लूट कर धनवान बनेंगे। आपकी बेमतलब की बकवास/गप्पबाजी आपके आने वाले समय को खराब कर देगी। जिस पर आप बिगड़ जाएं उसका सब कुछ नष्ट कर देंगे।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. सूखा पीपल घर में नहीं रहे।
  2. घर में मंदिर बंद न रखें।

उपाय:

  1. दुर्गा पाठ या कन्याओं की सेवा करें।
  2. केसर/हल्दी का तिलक करें।

चतुर्थ खाने का बृहस्पति : यदि आपकी जन्मकुंडली में वृहस्पति चौथे खाने में पड़ा है। इसकी वजह से वकील-जज या उच्च पद प्राप्त होगा। आपके दिमाग में उपजी बातें अवश्य पूरी होगी। आप दूसरों का भला करते समय अपने नुकसान का ख्याल नहीं रखेंगे। आपको लॉटरी से या अचानक धन की प्राप्ति हो ऐसी उम्मीद है। आपको सरकार द्वारा भी लाभ प्राप्त होगा। आपको उत्तम भवन एवं सवारी का सुख मिलेगा। 24वें वर्ष की उम्र तक शिक्षा प्राप्त करेंगे। आप बहुत ही चालाक और भाग्यवान होंगे। आप सभी के मददगार होंगे। आपका स्तर अपने पिता के स्तर से ऊंचा होगा। यदि आप सरकारी नौकरी करेंगे ता आप अच्छे अफसर हो सकते हैं। सरकारी यात्रा का शुभ परिणाम मिलेगा। आपके माता-पिता की दीर्घायु, चाचा-ताऊ सुखी होंगे। आप प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे आपको मानसिक शांति तथा मन को प्रसन्नता मिलेगी। आप भूमि के स्वामी होंगे तथा आपका मकान आलीशान होगा। लक्ष्मी आपके घर में निवास करेगी। आपको स्त्री-औलाद और माता-पिता का अच्छा सुख मिलेगा। भूमि में गड़े धन की प्राप्ति हो सकती है। लोहा आदि, मशीनरी के काम से बहुत लाभ उठाएंगे।

यदि आपका निर्धन व्यक्ति से संबंध रहा, टूटा सामान या टूटे हुए खिलौने चिपकाने या जोड़ने वाले पदार्थों आदि से जोड़ कर रखे होंगे, परस्त्री संबंध हुआ तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से अपनी बेड़ी डोव मल्लाह की तरह आपका हाल होगा। आपके जीवन का 23, 34, 48 एवं 55वां वर्ष अच्छा होगा परंतु इन वर्षों में माता पर बुरा असर पड़ेगा। आप पर कुछ लांछन लग जाएं या सम्मान को खतरा पहुंचे ऐसी आशंका है। आप पर कोई भयानक मुसीबत नहीं आएगी। एक से अधिक औरतों से संबंध रखने का फल अच्छा नहीं होगा। राजा होते हुए भी फकीरी लेने का विचार दिमाग में आता रहेगा। आपकी पत्नी के वक्षस्थल या गर्भाशय में कैंसर हो सकता है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. टूटे हुए खिलौने घर में न रखें।
  2. निःसंतान व्यक्ति से संबंध न रखें।

उपाय:

  1. धर्म मंदिर में हर रोज सिर झुकाएं।
  2. कुल पुरोहित की सेवा करें।

पंचम खाने का बृहस्पति : यदि आपकी कुंडली के पांचवें खाने में वृहस्पति पड़ा है। इसकी वजह से आपकी संतान की वृद्धि होगी। आपकी आयु वृद्धि के साथ-साथ उन्नति होगी। 16 वर्ष की आयु में भाग्योदय होने की संभावना है। संतान पक्ष से सुखी रहेंगे। आपको साठ वर्ष की उम्र तक श्रेष्ठ फल मिलेगा। संतान पैदा होने के बाद पिता-दादा से सहायता नहीं मिलेगी। भाग्य का सितारा बुलंद होगा। आप इन्सानी सितारों के मालिक होंगे। आप इज्जत और आबरू के मालिक होंगे और ब्रह्मज्ञानी होंगे। आपके, वीरवार को जन्मे लड़के के जन्मदिन से आपका भाग्य शुभफल देने लग जाएगा उस समय आप जीवन में उन्नति करना आरंभ कर देंगे। आप व्यापार या अपनी कलम की ताकत से धन कमाएंगे। दूसरों की सहायता भी करेंगे। आपकी औलाद और धन में बहुत बरकत होगी। आप खुशहाल रहेंगे। आप हुक्मरान या सामाजिक दायरे में सरदार माने जाएंगे।

यदि आप धर्म के विरुद्ध विचार रखेंगे, लंगर या धर्म के नाम पर दान का माल खाना शुरु किया, साधू-महात्मा से झगड़ा या गाली-गलौज किया तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से आप क्रोध अधिक करेंगे। पत्नी के अतिरिक्त दूसरी औरत से संबंध रखना हानिकारक होगा। बर्बादी का कारण बनेगा। अफसरों से दुश्मनी से मुफ्त का माल खाने से आपका नुकसान हो ऐसी शंका है। आपका मांसाहारी होना बहुत हानिकारक होगा। आपका आलसी होना बहुत खराब है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. नाव से संबंध न रखें।
  2. नास्तिक न बनें।

उपाय:

  1. साधू-महात्मा की सेवा करें।
  2. धर्मशाला या धर्म मंदिर की सफाई करें।

षष्ठ खाने का बृहस्पति : यदि आपकी जन्मकुंडली में छठे खाने में वृहस्पति पड़ा है। इसकी वजह से गृहस्थ जीवन में भी आप साधू स्वभाव के होंगे। आपको कोई काम करने की अधिक जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि पिता दीर्घायु हुए तो आप धनवान बन जाएंगे। आपके पिता स्वभाव से दानी होंगे। नगद धन की कमी महसूस नहीं होगी। आपके जीवन में कई चीज बिना मांगे या बिना मेहनत किए ही मिल जाएंगी। आपके ननिहाल खानदान के लोगों की आर्थिक हालत अच्छी होगी। आपके मामा खुशहाल होंगें। आपके जीवन में सुख-शांति तो रहेगी। परंतु बहुत ठाठ-बाट नहीं रहेंगे। बुढ़ापे में आपको शुभ फल प्राप्त होंगे। पूजा-पाठ पर ज्यादा ध्यान देंगे। आपको पत्नी का पूर्ण सुख मिलेगा। आपको अधिक समय तक नौकरी करनी पड़े, ऐसी आशंका है। आपके गुप्त दुश्मन नहीं होंगे। दुश्मन अगर हुए तो नष्ट हो जाएंगे अर्थात् आपको दुश्मनों पर जीत हासिल होगी। शरीर से निरोग रहेंगे।

यदि आपने कर्ज, दान-भिक्षा मांगना शुरु किया, हर समय व्यर्थ घूमते रहे, मामा, ताया-चाचा से झगड़ा किया तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से पिता का सुख कम मिलेगा या 16 वर्ष की उम्र में ही परिवार का भार आप पर पड़ सकता है। पत्नी की बेकद्री करने से अशुभ फल होगा। आपका जीवन अय्याशी या ऐशो इशरत के कारण बर्बाद हो सकता है। आपके पिता, पुत्र और पुत्री के लिए ग्रह फल बहुत अच्छा नही है। आप साधू स्वभाव के मुफ्तखोर, रोगी और अय्याश होंगे।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. भीख न मांगें।
  2. आवारा न घूमें।

उपाय:

  1. धर्म मंदिर के पुजारी को वस्त्र दान देवें।
  2. पीली चीजें धर्म स्थान में देवें।

सप्तम खाने का बृहस्पति : यदि आपकी जन्मकुंडली में वृहस्पति सातवें खाने में पड़ा है। जिसकी वजह से अधिक उम्र में या विवाह के बाद देर से संतान सुख प्राप्त होगा। पुत्र प्राप्ति के बाद पिछले कष्ट दूर हो जाएंगे। आप पूर्ण सुखी हो जाएंगे। पत्नी नौकरी करेगी उसकी कमाई से धन में वृद्धि होती रहेगी। आप स्वस्थ एवं पत्नी से सुखी रहेंगे। आप पिता से अलग होकर, साझेदारी का व्यवसाय चलाएंगे। संतान का भी सामान्य सुख ही मिलेगा। आप 40 वर्ष की उम्र तक ऐय्याशी करेंगे। ससुराल से मिली चीजों में बरकत होगी। आप धार्मिक कामों में हमेशा रुचि रखेंगे। आप ज्योतिष विद्या के जानकार और माहिर होंगे और ज्योतिष के द्वारा धन की प्राप्ति भी होगी। आपको दलाली या व्यापार के कामों से लाभ होगा। आपके धन से दूर के रिश्तेदार लोग सुख पायेंगे परंतु आपके जीवन में आराम नही मिलेगा। आपको लोहे, मशीनरी, काली चीजों का व्यापार, मकान बनाने की चीजें (लोहा, ईट, पत्थर सीमेंट, लकड़ी आदि) का व्यापार शुभ फल देगा। आप जीवन में अपनी जवानी में खूब ऐशो-आराम करेंगे। पिता और ससुर से लाभ और सुख मिलेगा।

यदि आपके घर के मंदिर में मूर्तियां होंगी (तस्वीरों का वहम नहीं), चांदी आदि धातु की मूर्तियों वाले सिक्के होंगे या धार्मिक ग्रंथ बंद पड़े होंगे, रत्तियां (जिससे पहले समय में सुनार सोना आदि तोलते थे) पड़ी होंगी तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से आप भाई से दुःखी रहेंगे। घूमने-फिरने वाले साधू की संगति से भाग्य मंदा हो जाएगा। आपको आमदनी होने के बावजूद आप पर कर्ज का बोझ भी पड़ेगा। आपके जीवन में काफी उतार-चढ़ाव आयेंगे। पत्नी के अतिरिक्त दूसरी औरत से हानि होगी। पिता का सुख कम मिलेगा। आप संगति के प्रभाव से चोर या डाकू भी हो सकते हैं।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. घूमने-फिरने वाले पीले वस्त्र धारी साधू से दूर रहें।
  2. घर में तुलसी, घंटी, ठाकुर न रखें।

उपाय:

  1. सोना और रत्तियां पीले कपड़े में बांध कर रखें।
  2. आपके ससुराल वाले आपको कुछ न कुछ देते रहेंगे तो इससे दोनों परिवारों का कल्याण होगा।

अष्टम खाने का बृहस्पति :  यदि आपकी जन्मकुंडली में वृहस्पति आठवें खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आप दीर्घायु, धनवान रहेंगे। आपकी और आपके पिता की लंबी आयु होगी। आप चरित्रवान, शील स्वभाव से अच्छे, विवेकी एवं पूरे परिवार की विपत्ति को अपने सिर पर लेने वाले होंगे। धन और आयु वृद्धि होती रहेगी।

अधिक कठिनाई में ईश्वर आपकी मदद करेंगे। आप आध्यात्मिक एवं गुप्त विद्या के माहिर होंगे।

यदि आपने दूसरे के धन का उपभोग किया, भलाई करने वाले का बुरा किया, दीन-दुःखियों को सताया तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से आपको अपने पिता से हमेशा दूर रहना पड़ सकता है। आप पिता से अलग रहे तो आपका समय खराब होगा। आप अफवाहों के शिकार बनेंगे। आप यदि साधू हो जाएं तो दुःखी रहेंगे। आपके परिवार में कई प्रकार की मुसीबतें पैदा हो सकती हैं। कभी-कभी आपके हौसले मंदे पड़ जाएंगे। आपको मूत्र रोग आदि बीमारी या मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। आपको बार-बार जन्म लेना पड़ सकता है। मोक्ष मिलने की उम्मीद कम है। आपके कामों में अड़चनें आएंगी। आपके शरीर में सुस्ती रहेगी या हर समय मन बुझा-बुझा सा रहेगा। कोई दुर्घटना या बड़ी मुसीबत का योग बन सकता है। आप अपने जीवन में कुछ ऐसे कार्य कर बैठेंगे जिससे आपको बहुत पछतावा हो सकता है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. आवारा साधू का साथ न रखें।
  2. चाल-चलन ठीक रखें।

उपाय:

  1. शरीर पर सोना पहनें।
  2. दही, आलू, घी धर्म स्थान में देवें।

नवम खाने का बृहस्पति : यदि आपकी जन्मकुंडली में वृहस्पति नौंवें खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आप धनी होंगे अर्थात् बड़े भाग्यशाली होंगे। आप अपने धर्म पर अडिग और वचन के पक्के होंगे परंतु आपके जीवन में कभी भी धन की कमी महसूस नहीं होगी। आपको जौहरी या सर्राफी के काम करने से बहुत लाभ होगा।

आपके घर की प्रतिष्ठा बनी रहेगी। आप तीर्थ स्थान की यात्रा के शौकीन होंगे। आप धर्मात्मा, ज्योतिषी, वैद्य, सिद्ध पुरुष होंगे। आप अपने पूर्वजों के माध्यम से प्रगति के पथ पर अग्रसर होंगे। भाग्य का श्रेष्ठ प्रभाव आपके ऊपर पड़ेगा यानि 36 वर्ष की उम्र में धन की प्राप्ति होगी। आप अच्छे, सम्मानित एवं अमीर खानदान में जन्म लेंगे। आप अपनी मेहनत से भी धन कमाएंगे। आपकी आदतें राजाओं जैसी होंगी। आप आध्यात्मिक तौर पर योगी स्वभाव के होंगे। आपकी सेहत अच्छी रहेगी। आपकी आयु के साढ़े सोलह वर्ष, 19, 33, 49 विशेष और धन प्राप्त करने वाले होंगे। आप तमाम दुनिया से लड़ कर अपनी किस्मत बना लेंगे अर्थात् आप स्वयं अपने भाग्य के निर्माता होंगे। आपकी आर्थिक स्थिति को शुभ करने के लिए भाग्य पूरा साथ देगा। आपके गृहस्थ जीवन में सुख बढ़ेंगे। इसका शुभ असर पूरे परिवार पर अच्छा रहेगा।

यदि आपने धर्म छोड़ दिया या धर्म विरोधी कार्य किये, पिता से झगड़ा या विरोध किया, किया हुआ वायदा पूरा न किया तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से आपके जीवन में बुरा समय आए उससे पहले आप दुनिया से कूच कर जाएंगे। आप अपनी औलाद से कई बार दुःखी होंगे। आपको दिल की बीमारी की आशंका है। आपका सोना गिर जाये, चोरी हो, लूटा जाये, गिरवी पड़े या बिक जाएगा, यह बहुत अशुभ लक्षण है। आलस्य करने से आपके महत्वपूर्ण कार्य अधूरे रह जाएंगे।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. दिया हुआ वचन पूरा करें।
  2. सोना गिरवी न रखें, गुम होने से बचायें।

उपाय:

  1. गंगा स्नान करें (हर महीने में एक बार 9 महीने लगातार)।
  2. धर्म की पालना करें।

दशम खाने का बृहस्पति : यदि आपकी जन्मकुंडली में वृहस्पति दसवें खाने में पड़ा है। इसकी वजह से जीवन निर्वाह के लिए आपको अकेले ही संघर्ष करना पड़ेगा। आप अपने पराक्रम से यशस्वी होंगे। आपको सोने, चांदी, कपड़े के काम में खूब लाभ होगा। कपड़े या दलाली के कामों से यश और अधिक धन मिलेगा। आप जीवन के 29वें वर्ष से सुख की ओर अग्रसर होंगे। आपको अपने लिए संघर्षरत रहना पड़ सकता है। आपको पिता की तरफ से जितना सहयोग चाहिए उतना सहयोग नहीं मिलेगा। दस्तकारी के कामों में खूब धन मिलेगा। आप धर्म में विश्वास रख कर नेकी के काम करेंगे। आपका गृहस्थ जीवन सामान्य रहेगा। आपकी आर्थिक स्थिति पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा। आप सरकारी विभाग से संबंधित यात्रा से हीरे-मोती पैदा करेंगे। विदेश की यात्रा से भी भरपूर लाभ मिलेगा। आप अपने पराक्रम से काम करके बहुत सुखी हो जाएंगे।

यदि आपके घर में या घर के पास सूखा पीपल का वृक्ष हुआ, विद्या अधूरी रही, ख्वाबी महल देखने शुरु किये तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से उम्र के 36 वर्ष के बाद धर्म के मंदिर में जाकर शीश झुकाने से बहुत लाभ होगा जिससे आपका भाग्य बदल जाएगा। आप चरित्रहीन औरतों के साथ रह कर बहुत दुःखी रहेंगे। आप चोरी और चरित्रहीनता से दूर रह कर, भाग्य के लिए अच्छा फल प्राप्त कर सकते हैं। दूसरों पर रहम करके दुःख उठाने के भागी होंगे। आपके यहां अग्निकांड न हो इसके लिए सतर्क रहना चाहिए। आपका संतान के साथ मनमुटाव रहेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. सोना न बेचें।
  2. पीले वस्त्र या सोना न पहनें।

उपाय:

  1. गुरु-साधू की सेवा करें, पीपल को पानी से सीचें।
  2. 43 दिन तांबे का पैसा बहते पानी में प्रवाह करें।

एकादश खाने का बृहस्पति : यदि आपकी जन्मकुंडली में वृहस्पति ग्यारहवें खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आपको पिता का सहयोग प्राप्त होगा। भाई आपके मदद्गार हो सकते हैं और उनसे लाभ भी होगा। कारोबार में भाई का साथ भाग्य जगाता है। आपके जीवन के 16 वर्ष से 28 वर्ष तक का समय भाग्य आपका खूब साथ देगा। आपके भाग्य से ससुराल वालों को बहुत लाभ होगा आपको धन-संपदा प्राप्त होगी। आप गरीबों की मदद करेंगे तथा धर्म में विश्वास रखेंगे, तो आपका भला होगा। पिता की उम्र तक आपकी हालात अच्छी रहेगी। आपको लाभ तो होगा परंतु आप कर्जदारी में भी रहेंगे। सरकारी कामों से संबंधित कमाये धन में बहुत बरकत होगी। आपके जीवन में आमदनी के और भी कई रास्ते हो सकते हैं। आप दूसरों के मदद्गार होंगे आप अपनी आमदनी का अपव्यय भी कर सकते हैं या आप अपने धन को संभाल कर नहीं रख सकेंगे। आपकी दोस्ती से दूसरों को लाभ मिलेगा। आप अपने भाई-बंधुओं, दोस्तों के साथ अच्छा व्यवहार रखेगें। आप अपनी किस्मत पर भरोसा नही करेंगे।

यदि आपने पूजा स्थान घर में रखा, चाल-चलन खराब किया, घर में या घर के पास सूखा पीपल का वृक्ष हुआ तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से परंतु पिता की मृत्यु के बाद कोई सहायता नहीं करेगा। आप परिवार के साथ रह कर सुखी परंतु अकेले रहने में दुःखी रहेंगे। आप की आंखों की नज़र कमजोर हो सकती है। बुढ़ापे में आपकी किस्मत ढीली हो जाएगी। परिवार कितना बड़ा हो मगर कफन पराया मिले ऐसा शक है। आप शराब-बीयर आदि न पीएं वरना आपके पास धन नहीं टिकेगा। पिता की मौत के बाद आपके भाग्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आपकी मौत शान और सम्मान से होगी।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. अण्डे न खावें।
  2. पूजा स्थान घर में न रखें। धर्म मंदिर में पूजा करें।

उपाय:

  1. पीला रुमाल पास रखें।
  2. लावारिस लाश को कफन दान देवें।

द्वादश खाने का बृहस्पति : यदि आपकी कुंडली के बारहवें खाने में वृहस्पति पड़ा है। जिसकी वजह से आप उत्तम ज्ञानी होंगे। आप दूसरों का भला करेंगे इससे आपके भाग्य में वृद्धि होगी। आपका अधिक समय पूजा-पाठ में व्यतीत होगा और पूजा-पाठ से भी आपके भाग्य में वृद्धि होगी। आपको धन से बहुत लगाव नहीं रहेगा आप त्यागी पुरुष होंगे। अपार धन आपके पास रहेगा मगर आप धन के पीछे नहीं भागेंगे। आपमें सेवा भावना रहेगी। आप ध्यान-समाधि की आदत डालें तो आपके घर सोने की वर्षा होगी। आप हृदय से वैरागी और ज्ञानी होंगे। आपका साधू जैसा स्वभाव होगा। आपका धन शुभ कर्म में खर्च होगा। आप खर्च के बोझ से दुःखी नहीं रहेंगे। बुरा कर्म आप नहीं करेंगे, यदि बुरे काम करने की प्रवृत्ति हुई तो बहुत नुकसान होगा। यदा-कदा औलाद के विषय में चिंता होगी। आप धन-दौलत के संबंध में राजा जनक की तरह त्यागी होंगे। गृहस्थ में हर प्रकार का सुख प्राप्त होगा। आपका परिवार बढ़ेगा, खुशहाल रहेगा। खुद भी निश्चिंत रहेंगे। आप किसी को आर्शीवाद दें तो उसको आपका आर्शीवाद फलेगा। आपका किसी को दुर्वचन नहीं लगेगा। दलाली का काम लाभकारी होगा।

यदि आपने जनता विरोधी कार्य किये, झूठी गवाही दी या किसी से धोखा फरेब किया, धन के लिये किसी के आगे हाथ फैलाने की आदत रखी तो आपका वृहस्पति मंदा हो सकता है या किसी कारण वश वृहस्पति मंदा हो गया हो तो वृहस्पति के मंदे असर से आप दूसरों को सता कर स्वयं कष्ट और मुसीबत में पड़ जाएंगे। आप अधिक न बोला करें यह आपके लिए अच्छा नहीं है। आध्यात्म का मार्ग नुकसानदेह रहेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. ऐसे काम न करें जिससे आपका विरोध हो।
  2. किसी के साथ धोखा-फरेब न करें।

उपाय:

  1. गुरु-पिता, साधू की सेवा करें।
  2. पीपल को जल से सींचें।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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