Lal Kitab Venus

शुक्र ग्रह के लाल किताब उपाय

Lal Kitab Remedies for Venus

हम सभी जानते है की कुंडली में कुल बारह भाव होते है l आप अपनी कुंडली में खुद ही देख सकते है की किस भाव में कौन सा ग्रह ख़राब है , और उसका उपाय कैसे करें l प्रस्तुत लेख में शुक्र ग्रह के बारह भावों के लालकिताब उपाय दिए जा रहे है, यदि उस भाव में दशा अन्तर्दशा में शुक्र के दुष्परिणाम दिखाई दे रहे हो तो आप निम्न उपाय कर सकते है और उसके अच्छे परिणामों में हमें परहेज रखना होगा l

पहले खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र पहले खाने में पड़ा है। जिसकी वजह से आपकी सेहत अच्छी रहेगी। देह में पूरी ताकत रहेगी। आप सुंदर, अच्छा भोजन करने वाले तथा सुंदर स्त्रियों पर आसक्त रहने वाले प्राणी हैं। मस्त चाल आशिकाना मिजाज, अपने आप में प्रसन्न रहने वाले हर समय स्त्रियों के जैसे संजने-संवरने वाले तथा सुंदरता के गुलाम होंगे। आप में काम शक्ति की अधिकता रहेगी। आप धनवान और परिश्रमी होंगे। आप अपनी आयु के लोगों के मुखिया होंगे। धार्मिक होते हुए भी इश्कवाजी की हवस आपमें रहेगी। आपको अपना भवन और उत्तम वाहन का सुख प्राप्त होगा। आपको दूसरे से सलाह लेने पर अच्छा मार्ग दर्शन मिलेगा और आपका भाग्योदय होगा।

यदि आपने स्त्रियों के द्वारा धन कमाना शुरु किया या परस्त्री से अनैतिक संबंध रखे, परिवार में मुखिया बने तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आपको अपने पिता के साथ लड़ाई-झगड़ा करने से धन की हानि और संपत्ति का नाश होगा। 24-25वें वर्ष में आपका विवाह करना शुभ नहीं है। आपके परस्त्री से अनैतिक संबंध रहेंगे तो आपको हानि होगी। आपके धर्महीन होने से भाई से लाभ असंभव है। आपका कामकाज ढीला पड़ेगा। आपके घर के कुछ हिस्से अनिर्मित रहने चाहिए। आपकी पत्नी और धन पर बुरा असर पड़ेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. चाल-चलन ठीक रखें।
  2. नास्तिक न बनें।

उपाय:           

  1. जौ या सरसों या चरी दान करें।
  2. कौवे, कुत्ते और गऊ को भोजन का हिस्सा खिलायें।

द्वितीय खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र दूसरे खाने में पड़ा है। इसकी वजह से जीवन भर धन-संपत्ति, संतान सुख में वृद्धि होगी। आपको सभी पक्ष से शुभ फल प्राप्त होंगे। आप बहुत परिश्रमी होंगे। आपको भाई का सुख प्राप्त होगा। नौकरी-व्यापार ठीक से चलते रहेंगे। दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की होती रहेगी। आप सम्मानीय व्यक्ति होंगे। आप ईश्वर पर विश्वास करें तो आपकी सभी कामनाएं पूरी होंगी। पत्नी का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। आपके जीवन के साठ साल की उम्र तक खूब आमदनी होगी। आप साधू-संतों की वेशभूषा पहन कर आशिकाना ख्याल के मालिक होंगे। चारित्रिक सुधार के बावजूद आपका जीवन सफल रहेगा। आपके शत्रु आप से दबे रहेंगे। आपके भाई तथा लड़के की किस्मत अच्छी होगी। आपको दुनियाबी सहायता मिलेगी। आप प्रेम संबंध बड़ी होशियारी से करेंगे। आप कामयाब आशिक होंगे।

यदि आपने शेरमुख घर में रिहाईश की, राग-रंग से नफरत रखी, आलू का व्यापार किया तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से घर में बीमारी लगी होगी। रक्तदोष एवं शुक्राणु दोष के कारण औलाद की पैदाइश में रुकावट हो सकती है। संतान जन्म में बाधा की आशंका हो तो (किसी वैद्य/हकीम की सलाह लेकर आयुर्वेद दवाईयों का प्रयोग करें)। आप किसी के साथ बुराई करें तो आत्मघात जैसा फल मिलेगा। दूसरे के बच्चे को गोद लेने पर अपनी संतान बाधा दूर हो जाएगी। बुराई करने पर आपके बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. पशुओं पर जुल्म न करें।
  2. शेर मुख घर में रिहाइश न करें।

उपाय:

  1. आलू, घी या दही का दान करें।
  2. बिना सींग की गाय की सेवा करें।

तृतीय खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली के तीसरे खाने में शुक्र पड़ा है। इसकी वजह से आपके घर में कभी चोरी नहीं होगी। आपकी पत्नी सच्चरित्र होंगी और आप स्वयं भाग्यवान रहेंगे। पत्नी जीवन भर आपका साथ निभाएगी। आप अपनी पत्नी से दब कर रहेंगे। आपकी संतान अधिक होंगी। आपको तीर्थ यात्राएं बहुत करनी पड़ेंगी। आप सभी के प्यारे होंगे। धन का व्यय अधिक करेंगे। कभी-कभी अधिक लाभ भी होगा। आपकी पत्नी आपके सभी कार्यों में हाथ बटाएंगी या पत्नी के नाम से किये कार्यों से लाभ प्राप्त होगा। स्त्री, लक्ष्मी, गाय की सेवा से अच्छा फल प्राप्त होगा। आप दूसरी औरत पर आशिक होंगे। शत्रु आपका नुकसान नहीं कर सकेगा। कोई भी औरत आप पर मोहित हो सकती है। आपको कम परिश्रम करके ही रोटी नसीब हो जाएगी। आपकी आमदनी अच्छी होगी। आप सभी सुख-सुविधाओं से युक्त रहेंगे, परंतु सुख की नींद नहीं सो सकेंगे। माता-पिता का सुख लंबे समय तक मिलेगा। आपकी पत्नी कमाऊ होंगी जो आपके कंधे से कंधा लगाकर मुसीबत में साथ देगी।

यदि आपने एक से अधिक स्त्रियों से संबंध रखे, बुजुर्गी घर के मुख्य दरवाजे की दहलीज को नष्ट किया, राग-रंग में रुचि रखी तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आपका कई स्त्रियों से संपर्क रहेगा। आप अपनी पत्नी का क्रोध एवं साहस देख कर हैरान होते होंगे। आपके जीवन में भवन सुख दूषित है। यदि मकान बनाएं भी तो वह घर उजड़ सकता है। माता के सुख में बाधा है यदि आपकी आयु के 34वें वर्ष तक मां जीवित रहेंगी तो उनकी दीर्घायु होगी। आप दुःखी लोगों और मुसीबतों से घिरे रहेंगे। धन-दौलत, उम्र बढ़ने के साथ-साथ घटती जाएगी। यदि सौतेली माता हुई तो उससे कोई लाभ नहीं होगा। ससुराल पक्ष से यदि कोई साझेदारी करें या वे लोग आपके काम में सहयोग करें तो हानि होगी। आपके भाई-बंधुओं के हाथों धन की हानि होगी। पैतृक संपत्ति आपके काम नहीं आएगी। आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. बुजुर्गी घर की दहलीज को खराब न होने देवें।
  2. राग-रंग में रुचि न रखें।

उपाय:

  1. स्त्री की सेवा करें।
  2. मंगल की चीजों का प्रयोग करें।

चतुर्थ खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र चौथे खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आप धनवान होंगे। स्त्री, संतान सुख मिलेगा और स्वस्थ एवं खुश रहेंगे। आपकी यात्राएं अधिक और सफल होंगी। आपकी पत्नी अपनी इच्छा से सभी काम करेगी। विवाह के बाद घर में कुआं खुदवाना शुभ रहता है। आपकी स्त्री और संतान का बुरा प्रभाव 34 वर्ष की आयु में दूर होगा। शादी के चार साल तक खूब ऐशो आराम पाएंगे। आप में आध्यात्मिक रुचि और शक्ति निश्चित होगी। आपको राजयोग के संयोग से जीवन में सुख प्राप्त होगा। यदि आप मामा और मौसी के कारोबार में साथ दें तो उनका व्यापार सफल होगा। आपको उत्तम भवन और वाहन सुख मिलेगा। माता स्वस्थ और बहुत दिनों तक आपको सुख देगी। आप अपने खानदान या गांव, देश-विदेश में प्रसिद्ध होंगे। आप उत्तम भोजन, भ्रमण एवं शयन के शौकीन होंगे। नौकरी-व्यापार पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा। सामान्यतया आप सरकारी विभाग से लाभ पायेंगे, उच्च पद या राजकीय सुख से युक्त रहेंगे।

यदि आपने सुरमें से संबंधित काम किया, 21-22, 24-25 वर्ष आयु में विवाह किया, मादक चीजों-द्रव्यों का प्रयोग किया तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आपकी माता और आपकी पत्नी में झगड़ा होता रहेगा। आपके लिए इश्क और प्रेम आपकी तबाही का कारण बनेगा। आपकी पत्नी आपके खानदान के लिए मनहूस होगी। गंदे प्रेम संबंध का बुरा फल मिलेगा। आप नशे आदि में पड़ कर बर्बाद हो सकते हैं। जीवन में दो विवाह संभव हैं। पत्नी के गर्भाशय में रोग या गर्भाशय निकाल दिया जायेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. चाल-चलन ठीक रखें।
  2. बुजुर्गी मकान की दहलीज खराब न होने दें।

उपाय:

  1. कुएं में केसर डालें।
  2. चार आड़ू की गुठली में सुरमा भर कर वीराने में दबायें।

पंचम खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली में पांचवें खाने में शुक्र पड़ा है। जिसकी वजह से आप विद्वान, शत्रुहंता, सफेद चीजों से लाभ प्राप्त करने वाले, बच्चों और पूरे परिवार से युक्त एवं स्त्री सुख से परिपूर्ण रहेंगे। आप अपनी जाति से प्रेम करने वाले होंगे। आप दुनिया में रह कर भी दुनियादारी की बातों से अपने को मुक्त प्रमाणित करेंगे। विवाह के पांच वर्ष के बाद धन-संपत्ति और नौकर-चाकरों का सुख अधिक प्राप्त होगा। पदोन्नति भी होगी। आपकी पत्नी वफादार होगी। आपकी पत्नी के जिंदा रहने तक आपको किसी चीज़ का अभाव नहीं होगा। कोई बहुत बड़ी रुकावट नहीं आएगी। आपकी दौलत-माया बढ़ेगी। आप अपने खानदान वालों को प्यार करेंगे तो इसका असर आप पर अच्छा ही पड़ेगा। भाई के लिए भी आप अनुकूल रहेंगे। आपके परिवार में हर तरह की बरकत होगी जैसे-धन, परिवार एवं सुख शांति। आपको अपने देश से प्रेम रहेगा।

यदि आप चरित्रहीन हुए तो वृक्ष में फंसे पतंग की तरह का हाल होगा, माता-पिता की मर्जी के खिलाफ शादी या लड़की देख कर शादी की तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आप आशिक मिजाज और कामांध होंगे। जिस वजह से आपका सुख बाधित हो सकता है। गंदी सोहबत और प्रेम संबंधों में फंस कर आपकी किस्मत भी कांटों में फंस जाएगी। आप साथियों पर कई प्रकार के झंझट पैदा करेंगे। आप दिन में ज्ञान एवं रात में इश्क स्नान करने वाले होंगे। गर्भपात का भय या संतान देर से होगी, बहन-बुआ का धन नाश होगा, प्रेम-विवाह किया तो पुत्र सुख से वंचित रहेंगे, ऐसी शंका है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. स्त्रियों के रसिया न बनें।
  2. प्रेम विवाह या अंतर्जातीय या माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध विवाह न करें।

उपाय:

  1. शरीर पर दूध/दही से मलकर नहाएं।
  2. गाय की सेवा करें।

षष्ठ खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र छठे खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आप बहुत धन कमा पाएंगे। आप अपनी कामवासना की पूर्ति के लिए स्त्रियों की प्रशंसा और प्रेम भी करेंगे। आपके जीवन में पुत्र की अपेक्षा अधिक कन्याओं के सुख की संभावना है। आपको अधिक संख्या में संतान के सुख प्राप्ति की संभावना है। आप स्वस्थ रहेंगे। आपकी नेत्र की शक्ति बरकरार रहेगी। आप रुचिपूर्ण भोजन पसंद करेंगे। आपको वृ़द्धावस्था में अधिक सुख प्राप्त होगा। आप अपनी प्राप्त शिक्षा से हट कर काम करेंगे। आपके पिता के साथ-साथ आपकी किस्मत भी अच्छी है।

यदि आपकी पुत्रियां अधिक हुई, स्त्री से झगड़ा किया या आपकी स्त्री को नंगे पैर घूमने की आदत हुई, बहन-बुआ-साली-बेटी से धन लिया तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से विद्या अध्ययन में रुकावट, पिता सुख का अभाव रहेगा। काम शक्ति में नुक्स होने की शंका है। विलंब से पुत्र का सुख मिलेगा। धन-संपत्ति की हानि भी हो सकती है। आपके सामने लड़ाई-झगड़े की भी समस्याएं पेश आती रहेंगी। लड़ाई-झगड़े से परेशान रहेंगे। आपकी बुद्धि भ्रमित रहेगी। आपके पशु की चोरी या धन-दौलत के गुम हो जाने भी संभावना है। आपका कारोबार अच्छा नहीं रहे। राज पक्ष से भी कोई समस्या पैदा होगी, ऐसी आशंका है। लोग आपको कई बार बदनाम भी कर देंगे।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. स्त्री का अपमान न करें।
  2. पत्नी को नंगे पैर न चलने देवें।

उपाय:

  1. पत्नी लाल दवाई से गुप्तांग धोयें।
  2. ठोस चांदी घर में रखें।

सप्तम खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र सातवें खाने में पड़ा है। इसकी वजह से यह खुलासा हो रहा है कि आपकी माता और पत्नी में मां-बेटी जैसा प्यार रहेगा। आपके घर में माया का अच्छा प्रभाव रहेगा। लक्ष्मी की बरकत कभी भी कम नहीं होगी। आपकी पच्चीस वर्ष की उम्र तक ही परेशानी रहेगी। इसके बाद समय जीवन भर सुख पूर्ण रहेगा। आपके कमाए हुए धन से स्त्री पक्ष को लाभ होगा। आप विवाह में उपयोगी चीजों का कार्य, जैसे टैंट हाउस, ब्यूटी पार्लर, रेडिमेड गारमेंट्स चलाएं तो अच्छा लाभ होगा। आपको कृषि योग्य जमीन भी मिलेगी। आपको अच्छा भवन एवं वाहन सुख मिलेगा। काली स्त्री से लाभ होगा। 37 वर्ष की आयु तक स्त्री सुख खूब मिलेगा। आपको जद्दी घर से दूर समुद्र की यात्रा द्वारा कमाई होगी। आपके अपने जन्म स्थान के शहर/गांव में लाभ नहीं मिलेगा। आप संसार में कहीं भी रहें मरने के समय जद्दी घर पर वापस आ जाएंगे।

यदि आपकी पत्नी का रंग गोरा हुआ, साले के साथ साझेदारी की, चाल-चलन खराब रखा तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आपके काम धंधे में भाई-बंधु, यार-दोस्त आपकी संपत्ति को लूटते रहेंगे। आपके कारोबार में यही लोग रुकावट डालेंगे। ससुराल वालों को कारोबार में साथ न रखें। वैवाहिक संबंध में तथा संतानोत्पति में गड़बड़ी रह सकती है। चमड़े के पर्स में रुपये-पैसे न रखें। आपकी पत्नी और आपकी माता की नहीं बनेगी या वह ग्रहचाल के कारण इकट्ठी नहीं रह पायेंगी। परस्त्री से इश्क के बुरे असर होंगे।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. सफेद गाय की पालना या सेवा न करें।
  2. बिल्ली की जेर चमड़े के पर्स में न रखें।

उपाय:

  1. बिल्ली की जेर कंबल के टुकड़े में रख कर अपने पास रखें।
  2. कांसे का बर्तन दहेज में जरुर लेवें।

अष्टम खाने का शुक्र :  यदि आपकी जन्मकुंडली के आठवें खाने में शुक्र पड़ा है। इसकी वजह से आपकी अच्छी आमदनी होगी। किसी भी लड़ाई-झगड़े में आपकी जीत होगी। औलाद की बीमारी के प्रति चौकन्ना रहें। आप में काम शक्ति की अधिकता रहेगी। अपने भोजन खाने-पीने पर पूरी चौकसी बरतें। आप परिश्रम करने में संकोच नहीं करेंगे। परंतु आलस्य आपको कर्महीन बना सकता है। आपको पत्नी और औलाद का अच्छा सुख मिलेगा। जन्म स्थान से दूर, देश से विदेश तक कहीं भी निवास स्थान बनाना पड़ेगा। जल से संबंधित कामों या समुद्री यात्रा में तथा विदेशी औरतों से सावधान रहना जरूरी है। आपकी पत्नी की जुबान से निकला शब्द पत्थर पर लकीर होगा अर्थात् आप अपनी पत्नी को न कष्ट देवें और न सतायें।

यदि आपका चाल-चलन खराब हुआ, ससुराल वालों को धोखा दिया या झगड़ा किया, सफेद बिना सींग की गाय घर में रखी तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आप पर हमेशा ही कर्ज का बोझ बना रहेगा। अधिकतर बीमार रहा करेंगे। आपकी पत्नी चिड़चिड़े स्वभाव की कुटिल होगी। आप किसी की जमानत न दें, वरना जमानत आपको भरनी पड़ सकती है। जिसका भाग्य पर बुरा असर पड़ेगा। 25 वर्ष की उम्र के बाद शादी करें अन्यथा पत्नी सुख में बाधा आ सकती है। आपकी बदनामी भी हो सकती है। आपके गुप्तांग में रोग हो सकता है। आलस्य के कारण भी शराबी और कबाबी होना तथा पराई स्त्री से संबंध रखने से, गुप्त रोग हो सकते हैं और आपके कामों में रुकावट पैदा होने के कारण बनेंगे। आप अपने जीवन में कुछ ऐसा कर गुजरेंगे जिससे आपको पश्चात्ताप होता रहेगा। पत्नी से झगड़ा करना आप को हार और हानि देगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. दान या भिक्षा न मांगें।
  2. ससुराल से धन आदि का धोखा न करें।

उपाय:

  1. गंदे नाले में तांबे का पैसा या फूल डालें।
  2. धर्मस्थान में सिर झुकाएं।

नवम खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र नौंवें खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आपका भाग्य मंदा रहेगा। 25 वर्ष के बाद का समय अच्छा रहेगा। इसलिए 25 वर्ष की उम्र के बाद शादी करें। अमीरी होने के बाद भी परिश्रम से रोटी प्राप्त होगी। तीर्थ यात्रा करना संतान के लिए शुभ है। आपके पास धन भी होगा। आप एक बुद्धिमान व्यक्ति की तरह हैं। आपको मन में शक्ति मिलेगी तथा धन-दौलत पर अच्छा असर पड़ेगा। नौकर-सेवकों से सुख मिलेगा।

यदि आपके घर में ढेक का वृक्ष, एल्युमिनीयम के बर्तन हुए, 25वें वर्ष में विवाह किया, छोटी आयु में मादक चीजों-द्रव्यों का प्रयोग किया तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारणवश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से विवाह के बाद से आपके पीछे दुःख लग जाएगा। स्त्री, धन-दौलत पर बुरा असर पड़ेगा, ऐसी आशंका है। आप दूसरों की मुसीबत और मंदी सेहत का जंजाल अपने ही गले लगा लेंगे। आप नशे की बुरी लत के कारण बीमारियों से तंग रहेंगे। आपकी धन-दौलत की बर्बादी का कारण भाई-बंधु बनेंगे। गुप्त रोग हो सकते हैं। लोगों से एतबार पर लेन-देन का फल मंदा हो सकता है। आपको खेती-बाड़ी से अच्छा लाभ नहीं होगा। आपके और आपकी स्त्री के लिए परेशानियां पैदा होंगी। आपके पास धन-दौलत इकट्ठी नहीं होगी।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. 25वें वर्ष में विवाह न करावें।
  2. एल्युमिनीयम का बर्तन प्रयोग न करें।

उपाय:

  1. मकान बनावें तो नींव में चांदी के बर्तन में षहद भर कर रखें।
  2. पत्नी को चांदी की चूड़ी पर लाल रंग करके बायें हाथ में पहनायें।

दशम खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली के दसवें खाने में शुक्र पड़ा है। इसकी वजह से आप लोभी, शक्की दस्तकारी के कामों में रुचि लेंगे। आप शक्ति संपन्न होंगे। आप कामुक होंगे। आप कामवासना के अधीन रहेंगे। आपकी सेहत अच्छी रहेगी। आप बाग-बगीचों के मालिक होंगे। आप अपने जीवन में दुर्घटना के शिकार नहीं होंगे। आपको अच्छा धन प्राप्त होगा। बुढ़ापा आराम से बीतेगा। आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपकी जवानी प्रेम संबंधों में उलझी रहेगी। आपकी चालाकी, शैतानी और होशियारी की अधिकता से अधिक लाभ, आंशिक क्षति भी हो सकती है। आपकी पत्नी का स्वास्थ्य लगभग ठीक रहेगा। पत्नी के साथ रहते आपके साथ कभी भी कोई हादसा नहीं होगा।

यदि आपने शराब, बीयर आदि पीना और मांस खाना शुरु किया, मछली का शिकार किया, स्त्री पर अधिक विश्वास किया तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आपको पत्नी से दब कर रहना होगा। पराई स्त्री से संबंध रहने से संतान को दुःख पहुंचेगा। संतान सुख के लिए जीवन में बाधा आ सकती है। विवाह के 13 वर्ष बाद पत्नी बीमार हो सकती है या पत्नी अस्वस्थ रहेगी जिसके कारण आपको दुःख भी झेलने पड़ सकते हैं। आपको पेशाब की बीमारी हो सकती है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. शराब-मछली का सेवन न करें।
  2. आषिक मिजाज न बनें।

उपाय:

  1. कपिला गाय का दान करें।
  2. पत्नी शरीर पर दूध-दही मल कर स्नान करें।

एकादश खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली के ग्यारहवें खाने में शुक्र पड़ा है। इसकी वजह से आपको कन्या संतान अधिक होगी। आपकी पत्नी दिखने में भोली-भाली परंतु काम धंधे में स्वभाव से अच्छी होगी। शादी के बाद खूब आमदनी होगी। आपको कन्या सुख अधिक होगा। विलंब से पुत्र की प्राप्ति हो, ऐसी आशंका है। आपके ससुराल पक्ष के लोग सहायक होंगे और उनसे आपको लाभ होगा। आप में और आपकी पत्नी में सामान्य कामवासना रहेगी। आप पैसे के पीछे भागते रहेंगे। आप भोले स्वभाव के प्राणी होंगे। आपमें अच्छे गुण भी रहेंगे आप गुप्त कार्य करने के आदी हो जाएंगे। आप अपनी विचारधारा को शीघ्र बदल देंगे। इसके लिए धन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

यदि आप परिवार में मुखिया बन कर रहे, चाल-चलन खराब किया, अप्राकृतिक सैक्स किया, कामांध बन कर पाप किया तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आपकी कामशक्ति कमजोर होगी। (किसी योग्य वैद्य/हकीम से सलाह करके कुश्ता फौलाद या मछली का तेल प्रयोग करें वैसे चांदी का कुश्ता भी लाभदायक रहेगा)। आपकी पत्नी के हाथों धन की बरकत नहीं होगी या स्त्री द्वारा धन हानि या अपव्यय होगा। सरकार द्वारा दंड, जेल यात्रा का भय रहेगा। आपका चाल-चलन शक्की होगा। आप यदा-कदा मूर्खता भी कर बैठेंगे। आपका संतान पक्ष निर्बल रहेगा।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. पत्नी को घर की खजांची न बनाएं।
  2. नौकरी-व्यापार बार-बार न बदलें।

उपाय:

  1. स्त्री से सरसों का तेल दान करायें।
  2. विवाह समय कपिला गाय का दान करें।

द्वादश खाने का शुक्र : यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र बारहवें खाने में पड़ा है। इसकी वजह से आपकी ज्योतिष, गुप्त विद्याओं में रुचि रहेगी। आप अपने परिवार का पोषण करेंगे। राज्य पक्ष से अच्छा लाभ मिलेगा। आप हर प्रकार से सुखी रहेंगे। स्त्री के माध्यम से जो भी कार्य संपन्न होते हैं वह आपके लिए अच्छा होगा। आपके काम के सुनिश्चित परिणाम प्राप्त होंगे। आपकी पत्नी आड़े समय में मदद्गार होगी। आपके जीवन में तरक्की की बागडोर आपकी पत्नी के हाथ में होगी। आप औरत की इज्जत करेंगे इसका अच्छा फल मिलेगा। विवाह के बाद काफी धन मिलेगा। स्त्री का पूरा सुख मिलेगा। आप सदैव ही दूसरों की सेवा हेतु तत्पर रहेंगे। आप जवानी में अपना समय ऐशो आराम से बिताएंगे। आपके मन में वहम समाया हुआ रहेगा। आप चित्रकला प्रिय अथवा गायन प्रिय होंगे। आप धर्माचरण करके शुभ प्रभाव को अपनाएंगे। आपको खेती-बाड़ी का लाभ भी मिलेगा। आप बेरहम होंगे फिर भी आपका

मान-सम्मान बरकरार रहेगा। आपके पास बहुत जायदाद होगी।

यदि आपने पत्नी से अच्छे संबंध न रखे या पत्नी की सेहत खराब के समय देखभाल न की, परस्त्री से अनैतिक संबंध रखे तो आपका शुक्र मंदा हो सकता है या किसी कारण वश शुक्र मंदा हो गया हो तो शुक्र के मंदे असर से आप बूढ़े होने पर दूसरे लोगों को अपने जीवन में भुगती बातों को सुना कर समय बर्बाद करेंगे। पत्नी बीमार रहा करेगी तो आपका भाग्य अच्छा नहीं रहेगा। कन्या संतान का आपके जीवन पर बुरा प्रभाव हो सकता है।

यदि आपको लगता है कि आपको उपरोक्त कष्ट है तो निम्नलिखित परहेज और उपाय करें।

परहेज:

  1. चाल-चलन ठीक रखें।
  2. पत्नी के स्वास्थ्य का विषेष ध्यान रखें।

उपाय:

  1. गाय दान करें।
  2. देसी घी का दीपक जलावें।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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