Marital problems

वैवाहिक समस्याएं

विवाह में विलम्ब हेतु उपाय

कुमारिका व्रत :- जिस कन्या का विवाह न हो रहा हो। वह स्वयं रविवार सायंकाल को आधा लीटर दूध लाएँ। जिसमें से मक्खन निकाल सके। (हर रोज़ जो दूध घर में आता है यह उसके अतिरिक्त हो) कन्या दूध को गर्म करके भोग लगावें। सोमवार को प्रात:काल स्नान करके सफेद साड़ी ब्लाऊज पहनक मक्खन निकाले और बालों में सफेद फूल लगावें। कटोरी में, तुलीस के पत्ते और मिश्री इस कटोरी में डाले। श्री गोपान कृष्ण जी के चित्र के सामने बैठकर धूप, दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक मक्खन का भोग लगावें। तत्पश्चात् प्रार्थना करें कि ‘‘हे गोपाल कृष्ण में आपकी पुत्री हूँ। मैं आपकी शरणागत हूँ। मुझे शीघ्र सुन्दर, सुशील वर की प्राप्ति हो। इस प्रयोजनार्थ मैं आपको मक्खन समर्पित करती हूँ। इसे स्वीकार कर मेरी मनोकामना पूर्ण करो।’’ इसके बाद मक्खन को स्वयं खाँए किसी को न दें। लस्सी की कड़ी बनाकर परिवार वाले खावें। उस दिन कन्या रसोई का कार्य न करे। उपवास रखने की आवश्यकता नहीं। एक समय का भोजन करें। जो घर पर बना हो। सोमवार को किसी अतिथि को भोजन का निमन्त्रण न दें। लहुसन, शराब, मीट आदि का घर में कोई भी सेवन न करें। भोग श्री गोपाल कृष्ण जी को लगाकर तत्तपश्चात खाएँ। उस दिन मिष्ठान अवश्य बनावें। कुत्ता, गऊ, कौआ को रोटी का ग्रास दें। यदि मासिक धर्म के कारण विघ्न आ जाए तो अगले सोमवार को को रखें। परन्तु पुन: चारों सोमवार व्रत रखने की आवश्यकता नहीं। रात को सफेद साड़ी बदल सकते हैं। व्रत वाले दिन श्री गोपाल कृष्ण जी की ओर ध्यान लगाकर शीघ्र्र वर की प्रापित के लिए प्रार्थना करती रहें।

शीघ्र विवाह हेतु

बृहस्पतिवार को पीले वस्त्र पहन कर प्रात:काल केले के वृक्ष पर कुमकुम अर्पण कर जल चढ़ावें और अपने बालों में पीला फूल या पीला रबड़, बैण्ड लगावें और पीला भोजन करें। यह कार्यक्रम 9 या 11 सप्ताह निरन्तर करें और इसके साथ इस मन्त्र की एक माला प्रतिदिन करें :-

हे गौरी! शंङ्करार्धाङ्गिं! यथा त्वं शंङ्करप्रिया।

तथा मां कुरु कल्याणि! कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।

इस मन्त्र को तीन मास तक जाप करें तो अति उत्तम, वर की प्राप्ति होती है।

विवाह में विलम्ब

जिस कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो, उसे कम से कम सवा चार रत्ती का पुखराज या इसका उपरत्न टोपाज सोने में धारण करें। प्रात:काल शुभ मुहूत्र्त में स्नान करके

मन्त्र

ह्रीं कुमाराय नम: स्वाहा।।

मन पसन्द वर प्राप्त करने के लिए

कन्या दिखाने की जो तिथि निश्चित हुई हो उस दिन से प्रथम रात्रि को रात्रि को भोजन न करके केवल दूध का सेवन करें और प्रसन्नचित्त से श्री सीता-राम का चित्र के सामने बैठकर धूप, दीप जलाकर ‘जानकी जीवन राम’ इस मन्त्र की दो माला जप करके सो जाएँ। प्रात:काल स्नान करने के पश्चात् भगवान को धूप ओर दीप करके अपने दाएं हाथ की बीच की अंगुली पर काजल का बिन्दु लगावें। आँखें बंद करके

मन्त्र

नमो भगवते वासुदेवाय नम:।।

की एक माला जाप करें पश्चात अंगुली वाला काजल अपने गले के बाईं ओर लगावें। इस उपाय के करने से लडक़ी को मन पसन्द वर की प्राप्ति होती है। लडक़ी को दिखाने से पहले विवाहित स्त्री की काँच की चूड़ी पहनावें और उन्हें वापस न करें।

विवाह की देरी के लिए

लडक़ी की जन्म राशि या नाम राशि से चन्द्रमा वृष राशि से कर्क राशि में आने के दिन तक

मंत्र

श्री लक्ष्मीनारायण नम:।।

इस मन्त्र की एक माला जाप करें और इसके साथ मंगलवार का व्रत रखें। राता को माता या अन्य स्त्री के पांव छू कर सो जाएँ।

लडक़े वाले को हाँ करने के लिए

यदि लडक़े वाले कन्या को देखने के बाद कुछ उत्तर नहीं देते हों उनके जाने के बाद कन्या उस लडक़े का ध्यान करके पूर्वाभिमुख बैठकर धूप और दीप जलाकर।

ह्रीं कुमाराय नम:।।

इस मन्त्र की दस माला का जप एक ही समय में (लगातार) करें तो लडक़े वाले हाँ कर देते हैं।

विवाह विलम्ब के लिए

जब चन्द्रमा कर्क राशि में प्रवेश करे उस समय से लेकर जब तक कर्क राशि में चन्द्रमा रहे तब तक

मन्त्र

श्री लक्ष्मीनारायण नम:।।

इस मन्त्र की एक माला प्रतिदिन करे। माला जप के समय घर पर लहसुन, प्याज़, शराब, मीट आदि का प्रयोग न करें।

वर प्राप्ति हेतु मन्त्र

जिस कन्या का विवाह समय पर नहीं होता तथा माता-पिता परेशान हो जाते हें। वह कन्या अपनी परम्परा के अनुसार निम्नलिखित मन्त्रों में से किसी एक का विधिवत् जप करने अवश्य सिद्ध प्राप्त कर सकती है।

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।

नन्दगोपसुतं देवि! पतिं मे कुरु ते नम:।।

31 दिन निरन्तर एक माला जप पार्वती देवी के सामने करने से शीघ्र विवाह हो जाता है।

देवेन्द्रिाणि नमस्तुभ्यम् देवेन्द्रप्रिय भामिनी।

विवाहं भाग्यमरोज्यं शीघ्रं लाभं च देहि में।।

विधि :- इस मन्त्र का जप करने से पूर्व तुलसी के पौधे की विधिवत् पूजा करे। तत्पश्चात् 12 परिक्रमा लगाए और परिक्रमा पूरी होने पर कन्या अपने दाहिने हाथ से दूध और बांए हाथ से जल भगवान सूर्य को 12 बार उपरोक्त मन्त्र का उच्चारण करते ुए अध्र्य देवें। इस प्रकार तुलसी की माला से 43 दिन निरन्तर एक माला का जप करें। इस प्रकार प्रतिदिन अध्र्य देने और मन्त्र जप करने से शीघ्र वर की प्राप्ति होती है।

 गणपत्ये नम:।।

विधि :- यह श्री गणपतिजी सर्व कार्य सिद्धि मन्त्र है। इसके जप करने से कठिन से कठिन कार्य भी सरलता से हो जाता है। परन्तु वर प्राप्ति के लिए अचूक है। जिस कन्या के विवाह में अत्याधिक देरी हो रही हो, वह श्री गणपति की स्तुति कर के विधिवत् पूजा के बाद 43 दिन लगातार 21 माला प्रतिदिन करने से शीघ्र सुशील वर की प्राप्ति होती है।

कर जोरी विनती करत निश दिन नाथ पीतम पाई हो।

अहवात दो गिरिजापति में यश तुम्हारा गाई हो।।

विधि :- शिव-पार्वती के चित्र के समने धूप एवं दीप जलाकर रात्रि को निश्चित समय पर 43 दिन निरन्तर एक माला प्रतिदिन करें।

ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्त्रकिरणाय। मनोवांछिततं देहि-देहि स्वाहा।।

विधि :- प्रात:काल समय निराहार अपने ईष्ट देव की पूजा करें। तत्पश्चात् पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य भगवान को चन्दन, पीत पुष्प एवं अक्षत मिलाकर अघ्र्य उपरोक्त मन्त्र का चार बार उच्चारण करके धूप और दीप दिखाकर गुड़ का भाग लगावें। बांये पैर की एड़ी उठाकर 43 दिन लगातार एक माला प्रतिदिन करने से कार्य सिद्धि होती है। जप करने के पश्चात् सूर्यदेव से प्रार्थना करें कि आप विश्व के स्वामी हैं। ऐसा कौन सा कार्य है जो आपसे संभव नहीं। मुझ पर दया करके मुझे मनोवांछित वर-प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान करें।

विवाह के लिए तुलसी रामायण से

तब जनक पाई वशिष्ठ आयसु ब्याह साज संवारि कै।

मांडवी श्रुतकीरति उरमिला कुंआतिरि लई हँकारि कै।

विधि :- प्रात:काल स्नान कर तीन मास निरन्तर एक माला प्रतिदिन जप करें।

शंकराय सकल जन्मार्जित पापविथ्वंसनाय।

पुरुषार्थ चतुष्टय लाभाय च पतिं में देहि कुरु-कुरु स्वाहा।।

विधि :-जिस कन्या का विवाह अनिष्ट ग्रहों के कुप्रभाव कारण नहीं हो रहा या अन्य किसी कारण धन अभाव आदि से नहीं हो रहा हो। तो शिव-पार्वती का चित्र सामने रखकर धूप एवं दीप से विधिवत् पूजा करें और जप स्थान पर गमले में केले का पौधा लाकर रखें। उस गमले के चारों आोर 9 या 11 बार मौली लपेट दें। उसकी पूजा प्रतिदिन करें। पूजा करने के बाद केले के पौधे की 9 बार परिक्रमा करें। जो कन्या यह अनुष्ठान प्रतिदिन श्रद्धा के साथ करती है, उसका विवाह शीघ्र हो जाता है।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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