Lal Kitab

लाल किताब के उपाय भाग -1

इन दिनों जनता में लाल किताब द्वारा अपना भाग्य जानने की जिज्ञासा बढ़ती जा रही है। इसी संदर्भ में इस अध्याय को पुस्तक में जोड़ा गया है। यहां आप लाल किताब के ग्रहों, उनके शुभ-अशुभ फल तथा उनके उपायों के बारे में जान पाएंगे। 

लाल किताब एक विवेचना

लाल किताब के बारे में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें से एक है कि यह सूर्य के सारथी अरुण द्वारा लिखी गई थी, जिसके आधार पर इसे अरूण संहिता भी कहा गया। कालान्तर में यह विद्या अरब देशों में पहुंची वहीं से वापस भारत आई।

एक दूसरी मान्यता के अनुसार लाल किताब का उदगम अरब में ही हुआ था। अन्य किंवदंतियों के अनुसार किसी अदृश्य शक्ति ने इस किताब को लिखवाया था। वास्तव में देखा जाए तो बीसवीं सदी से पूर्व लाल किताब नाम की कोई चीज नहीं थी।

वास्तव में हिमाचल प्रदेश से लेकर कश्मीर तक के पहाड़ी क्षेत्र में विशेष ज्योतिष पद्धति से जुड़ी कुछ मान्यताएं प्रचलित थी जो बिना कुंडली के ही सटीक भाग्यफल बताने में सक्षम थी। सबसे पहले प. रुपचंद जोशी ने इन मान्यताओं को एकत्रित कर पहली लाल किताब का प्रकाशन 1939 में करवाया। इस पर भी उनका नाम नहीं छपा था वरन किताब छापने वाले प्रकाशक का नाम छापा गया था। समय के साथ इस किताब में लाल किताब पद्धति से जुड़े कई अन्य सिद्धांत भी जुड़ते चले गए और ज्योतिष की एक पद्धति से लोगों का परिचय हुआ। 

लाल किताब के सिद्धांत

ज्योतिष की इस अनूठी पद्धति में भाग्यफल बताने के लिए लोकोक्तियों तथा कविताओं का सहारा लिया गया है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की कुंडली में सबसे प्रबल प्रभावशाली ग्रह कौनसा है, इसे जानने के लिए लिखा है-

लग्न अगर खुद खाली होवे, किस्मत साथ न आई हो।
किस्मत उसके सातवें बैठी, या घर चौथे-दसवें हो।
मुट्ठी के घर चारों खाली, नौ-तीन-ग्यारह पांचवें हो।
ये घर भी गर खाली होते, दो-छः-बारह-आठ में हो।
घर बारह की घूम के देखे, उच्च कायम या घर का जो।
किस्मत का वो मालिक होगा, बैठा तख्त पर उसके हो।

इस पद्धति में कुंडली का अध्ययन करते समय कालपुरुष कुंडली और भाव को अधिक महत्व दिया जाता है। पारंपरिक वैदिक ज्योतिष के विपरीत इसमें राहू-केत सदैव आमने-सामने नहीं होते वरन एक दूसरे के आस-पास के घरों में भी हो सकते हैं। इसी प्रकार लाल किताब अपने अलग व्याकरण के नियमों के आधार पर भविष्यकथन करती है। हालांकि वैदिक ज्योतिष की ही तरह इसमें भी भाग्य का सटीक फलादेश किया जा सकता है।

ज्योतिष की इस पद्धति में हर ग्रह अलग-अलग भावों में अलग-अलग चीजों का कारक बन जाता है। दुनिया की हर चीज लाल किताब के कारकों के अंतर्गत आती है। उदाहरण के लिए चौथे घर का चन्द्रमा मां का कारक है तो वही छठे घर में नानी का हाल बताता है, यही चन्द्रमा दसवें घर में चाची का कारक बन जाता है। इन्हीं आधारों पर व्यक्ति को ग्रहों से होने वाली पीड़ा के निवारण के उपाय बताए जाते हैं। जैसे कि बृहस्पति-केतु का योग पीले नींबू का कारण है तो चन्द्रमा-केतु का योग केला है।

लाल किताब के उपाय

लाल किताब के उपायों को समझना किसी भी आम व्यक्ति के लिए टेढ़ी खीर है। सामान्य नजर से देखने पर इन उपायों का कोई सिर-पैर नजर नहीं आता लेकिन सूक्ष्मता से देखने पर इनके पीछे का तर्क स्पष्ट दिखाई देता है। लाल किताब में उपाय बताने के लिए भी कुछ नियम हैं, जिनके आधार पर समस्या का निवारण किया जा सकता है।

  1. ग्रह के असर को अपने से दूर कर देना। उदाहरण के लिए बारहवें घर में मंगल अशुभ हैं तो गुड़ की रेवडियां पानी में बहाने से इसका असर टल जाएगा।
  2. ग्रह के अशुभ स्वभाव को शुभ में बदल देना। इस उपाय के ग्रह के असर को दूर नहीं किया जाता वरन उसके अशुभ स्वभाव को शुभ बनाने का प्रयास किया जाता है। जैसे पांचवे घर का राहू नर संतान की उत्पत्ति में बाधक है। अगर राहू के स्वभाव को किसी उपाय से शुभ बना दिया जाए तो राहू का अच्छा असर बढ़ जाएगा। इसलिए घर में चांदी का ठोस ही रखना राहू के बुरे असर को खत्म कर देगा।
  3. शुभ ग्रह को स्थापित कर देना। अगर किसी घर में कोई ग्रह बैठ कर अशुभ असर दे रहा है तो उस घर में शुभ ग्रह को स्थापित कर देने से भी कुंडली शुभ फल देने लगती है। उदाहरण के लिए सूर्य और शनि का इकट्ठा होना कभी शुभ नहीं माना जाता। लेकिन बुध का उपाय करने (अर्थात् घर में फूलों वाले पौधे लगाने से) सूर्य और शनि के आपसी टकराव से होने वाला अशुभ असर समाप्त हो जाता है।
  4. ग्रह को नष्ट कर देना। इस उपाय में अशुभ असर देने वाले ग्रह के कारक का सहारा लेते हुए उसे नष्ट कर दिया जाता है जिससे उसका अशुभ प्रभाव टल जाता है। उदाहरण के लिए छठे घर में शनि अशुभ हो तो शनि की कारक वस्तु शराब को बहते पानी में बहा देने से शनि नष्ट हो जाता है और शनि के शुभ-अशुभ दोनों असर समाप्त हो जाते हैं।

इस प्रकार लाल किताब के उपाय पूरी तरह तांत्रिक पद्धति पर कार्य करते हैं। अतः इनका उपयोग बहुत ही सोच-समझकर और किसी विद्वान ज्योतिषी की सलाह के बाद ही करना चाहिए। अन्यथा अपने तीव्र प्रभाव के चलते व्यक्ति का भाग्य दुर्भाग्य में बदलने में भी देर नहीं लगती।

ग्रहों के शुभ-अशुभ प्रभाव

कुंडली में ग्रहों के शुभ या अशुभ (मंदी) हालत होने से ही उनका फल बताया जाता है और होने वाली समस्याओं के निवारण के उपाय बताए जाते हैं। सबसे पहले हम सूर्य से आरंभ करेंगे

सूर्य

लाल किताब के अनुसार सूर्य को ग्रहराज की संज्ञा दी गई है। यदि कुंडली में सूर्य अनुकूल हो तो सभी ग्रह व्यक्ति को अनुकूल फल देने लगते हैं। अशुभ हो तो बाकी ग्रहों पर भी इसका न्यूनाधिक असर होता है।

पहले घर का सूर्य व्यक्ति को राजा बनाता है। वह सिर्फ इंसाफ पसंद होता है लेकिन शांत या नर्म स्वभाव का होना उसके लिए मुसीबतें लाएगा। मंदा हो तो नर औलाद और पत्नी के लिए भारी रहेगा। उपाय के तौर पर सरकारी नौकरी करने वाले पर इसका असर कम से कम होगा। उपाय के तौर पर अपने खानदानी मकान में पानी का हैंडपंप या कुआं खुदवाना चाहिए तथा दिवा स्त्री समागम से बचना चाहिए।

दूसरे घर में सूर्य की तुलना मंदिर में जलने वाली ज्योत से की गई है। ऐसा आदमी खुद तो साधारण हैसियत से रहता है मगर अपने साथियों और साथ रिश्तेदारों को मालामाल कर देता है। इसी से उनकी खुद की तरक्की होती है। घर की औरतों पर भी सूर्य भारी पड़ता है। ऐसा आदमी कभी किसी से मुफ्त में या दान में कुछ लेगा तो बर्बाद हो जाएगा। उपाय के तौर पर शनि की वस्तुएं यानि तेल, बादाम आदि किसी धर्मस्थल पर दान देते रहना चाहिए।

तीसरे घर का सूर्य ‘दौलत का राजा’ कहा गया है। यह आदमी को नेकदिल, सच्चा और बहादुर बनाता है। ऐसे आदमी से मौत भी डरती है। ऐसा आदमी ज्योतिष का ज्ञान भी रखता है। सूर्य मंदा हो तो ऐसा आदमी परिवार की तरफ से दुखी रहता है। ऐसे जातक को अपने चरित्र का खास ध्यान रखना चाहिए। चरित्र खराब हो तो वो खुद अपने ही कर्मों से खत्म हो जाता है। पापकर्मों से बचें तथा अपना चालचलन ठीक रखें।

चौथे घर का सूर्य जिसके हो वो खुद चाहे शाही खानदान में न जन्मा हो लेकिन राजयोग लेकर आता है और देखते ही देखते अपनी सात पीढ़ियों तक को दे जाता है। उसे अपने ही रिश्तेदारों से आर्थिक लाभ करता है। मंदा हो तो सूर्य की वस्तुओं पर खराब प्रभाव पड़ता है। बिना कारण उम्र भर झगड़े करता रहता है। सूर्य को अच्छा बनाने के लिए जातक को कभी भी ससुराल पक्ष से शनि, राहू और केतु  की चीजें जैसे मशीन, लोहा, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खिलौने उपहारमें नहीं लेने चाहिए , वरना बर्बाद होते देर नहीं लगेगी। अपने पैतृक घर में अंधों को भिक्षा तथा भोजन का दान करें। लोहे, लकड़ी का काम कभी न करें।

पांचवे घर का सूर्य आदमी को शराफत और मर्यादा का पालन करने वाला बना देता है। उसकी संगत से ही उसकी औलादें तक घर बैठे कमा खाती है। ऐसे जातक को पूर्व की दीवार के साथ रसोई बनाना शुभ रहता है और दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता है। लाल मुंह के बंदरों का पालन-पोषण करें। पक्षी, मुर्गा तथा बच्चों का पालन-पोषण करें।

छठे घर का सूर्य ‘आगजला’ और ‘दौलत से बेफ्रिक’ कहा गया है। अगर जिद पर आ जाए तो अपने घर को भी जलता देख कर खुश होगा और शुभ हो तो आदमी दिल और नीयत का बिल्कुल साफ होगा, कभी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुचांएगा, हालांकि उसके खुद के सारे कारोबार नुकसान में ही रहेंगे। सूर्य का उपाय करना जैसे बंदर का गुड़ देना हर तरह से अच्छा रहेगा। धर्मस्थल पर दान की गई वस्तु अपने पास रखें।

सातवें घर का सूर्य राजगद्दी पाकर भी उसे खो देता है। बेशक ऐसा आदमी कैसी भी हालत का हो, देने में कभी कंजूसी नहीं करता। दुनिया की हर मुसीबत को वो हंस के काट लेता है। ऐसे आदमी को कोई मारना चाहे तो उसे खुद को भी खत्म कर लेने की तैयारी कर लेनी चाहिए। अगर सूर्य मंदा हो तो गृहस्थी सुख, पत्नी तथा बेटे के लिए अशुभ होता है। हमेशा दूसरे की पीड़ा को दूर करने के प्रयास में खुद मारा जाता है। उपाय के लिए बृहस्पति की चीजें बहते पानी में बहाने से आराम मिलता है। या रोटी खाने के पहले भोजन का थोड़ा सा हिस्सा बतौर आहुति डालने से भी फायदा होता है। मीठा पदार्थ मुंह में डाल कर अथवा पानी पीकर ही किसी नए कार्य का शुभारंभ करें।

आठवें घर का सूर्य खुद ही खुद की किस्मत लिखता है। अगर रईस होगा तो इतना होगा कि रोज दूसरों को खिलाएगा, भिखारी होगा तो ऐसा होगा कि भीख भी नहीं मिलेगी। जब तक खुद के ही खानदान या परिवार से दुश्मनी नहीं रखेगा, फलता-फूलता रहेगा। मंदा हो तो शनि की चीजों से नुकसान होगा। उपाय के लिए ऐसे आदमी को कभी चोरी नहीं करनी चाहिए, न ही चरित्रहीन महिला से किसी तरह के संबंध रखने चाहिए। वो अपने बड़े भाई को साथ लेकर चलेगा तो जीवन में तरक्की करेगा। काली गाय व बड़े भाई की सेवा करें। कभी भी दक्षिण मुखी घर या भवन में न रहें। कुछ मीठा पदार्थ खाकर या पानी पीकर ही कार्यारम्भ करें।

नवें घर का सूर्य अपने परिवार को छोड़कर बाकी सारी दुनिया का भला करता है। वो बड़ी से बड़ी मुश्किल में भी हिम्मत नहीं हारता और बार-बार अपने दम पर उठ खड़ा होता है। हालांकि खुद की पत्नी के लिए कुछ हल्का असर हो सकता है। ऐसे आदमी को भूल कर भी किसी से मुफ्त में कुछ नहीं लेना चाहिए वरना बर्बाद होते देर नहीं लगती। चन्द्रमा की वस्तु का दान करें। स्वयं कभी भी कोई दान न लेवें। घर में पीतल के पुराने बर्तन रखें तथा पाप कर्म से बचें।

दसवें घर का सूर्य अपने ही शत्रु शनि की मकर राशि में होता है जो कभी नहीं झुकता चाहे अपने ही परिवार के खिलाफ बड़े से बड़ा फैसला लेना पड़े। आमतौर पर ऐसा आदमी वहमी स्वभाव का होता है। सूर्य मंदा हो तो खानदानी विरासत या पिता पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे आदमी को कभी भी शनि, राहू या केतु से जुड़े व्यापार नहीं करने चाहिए। नीले रंग के कपड़ों से हमेशा ही परहेज करना चाहिए। सफेद या शरबती पगड़ी और कपड़े पहनना उसे शुभ फल देगा। सदैव घर में गंगाजल रखें।

ग्यारहवें घर का सूर्य लालची होने के साथ-साथ धर्मात्मा भी होता है। ऐसा आदमी जितना नेकदिल होता है, उतनी ही तरक्की करता है। मांस-मछली और शराब का सेवन ऐसे आदमी के लिए बर्बादी का फरमान लाते हैं। ऐसे आदमी को सांपों के भी सपने आते हैं। उपाय के तौर पर इन तीनों से दूर ही रहना चाहिए और कभी भी शनि की वस्तु मूली, शलजम, गाजर आदि न लें। भूल कर भी शराब तथा मांस का सेवन न करें। कभी झूठी गवाही न दें न  किसी से धोखा-धड़ी करें।

बारहवें घर के सूर्य को ‘सुख की नींद सोने वाला मगर पराई आग में जलकर मरने वाला’ कहा गया है। ऐसे आदमी का बुरा वक्त कभी नहीं आता वरन वो ही दूसरों को सहारा देता है, उनकी ही आफतों को अपने सिर ले लेता है। ऐसा आदमी सुख की नींद लेने वाला और रूहानी ताकतों से दोस्ती की इच्छाएं रखने वाला होता है। उपाय के तौर पर जातक को कभी राहू के काम यानि बिजली, कोयले आदि के काम नही करने चाहिए और न ही ससुराल पक्ष के लोगों से मिल कर कोई काम करना चाहिए, वर्ना बर्बाद होते देर नहीं लगती। कभी भी अंधेरे घर में न रहें।

चन्द्रमा

लाल किताब के अनुसार चन्द्रमा चौथे घर का मालिक है साथ ही कालपुरुष कुंडली के अनुसार चौथे घर में कर्क राशि होती है जिसका मालिक भी चन्द्रमा है। इसलिए लाल किताब में चन्द्रमा किसी भी आदमी को बुद्धि और पढ़ाई लिखाई को बताने वाला माना गया है।

पहले घर का चन्द्रमा अपनी खुद की योग्यता और पढ़ाई-लिखाई के दम पर कमा खाता है। ऐसा आदमी तालीम के दम पर ऊपर तक पहुंच बनाने में सफल होता है। मंदा हो तो भिखारी बनते देर नहीं लगती। वटवृक्ष का सींचन करें। दूध का व्यापार न करें बल्कि मुफ्त में पिलाएं, चांदी के बर्तन में जल तथा दूध पीएं।

दूसरे घर का चन्द्रमा शुभ होने पर आदमी को मां के सुख और पढ़ाई-लिखाई दोनों में किसी एक को चुनना होता है। ऐसे आदमी को चन्द्रमा से जुड़ा कारोबार ऊंचाईयों पर पहुंचा देता है। ऐसा चन्द्रमा मंदा  हो तो निसंतान बना देता है। उपाय के तौर पर चन्द्रमा की वस्तुएं घर में रखें। परिवार की वृद्ध स्त्रियों की सेवा करें। घर की नींव में चांदी दबाएं।

तीसरे घर का चन्द्रमा जिसके भाग्य में आ जाए, उसकी तालीम भी बेकार हो जाती है, न ही उसे पिता का सुख मिल पाता है वरन बढ़ती उम्र के साथ ही उसका जीवन खराब होता चला जाता है। मंदा होने पर बकरी का दूध और लकड़ी का धन विषसमान हो जाता है। उपाय के लिए कन्या के जन्म पर चन्द्रमा की वस्तुएं तथा पुत्र के जन्म पर सूर्य की वस्तुएं दान में दें।

चौथे घर का चन्द्रमा आदमी को किसी न किसी तरह की रूहानी मदद जरूर करवाता है। इसी के दम पर आदमी अपने जीवन में बहुत आगे जाता है और दुनिया में सम्मान पाता है। अशुभ हो तो भलाई का सिला भी बुराई के रूप में मिलता है। उपाय के तौर पर दूध का दान करें, व्यापार न करें। शुभ कार्य के पूर्व पानी या दूध से भरा घट रखें।

पांचवें घर का चन्द्रमा खुद के लिए इतना अच्छा नहीं होता जितना कि दूसरों के लिए होता है। ऐसा आदमी उम्र भर दूसरों की मदद करता है लेकिन जब खुद पर मुसीबत आती हैं तो न तो दूसरे मदद करते हैं, न खुद अपनी मदद कर पाता है। मंदा हो तो बहिन, बुआ तथा पत्नी को कष्ट हों। बचने के लिए सोमवार को सफेद कपड़े में मिश्री बांध कर बहते पानी में बहाएं। कभी भी स्वार्थी या लालची न बनें।

छठे घर का चन्द्रमा बहुत मुश्किल से तालीम हासिल कर पाता है लेकिन जब कर लेता है तो फिर पूरी दुनिया उसकी चमक देखती है और उसे मान मिलता है। मंदा हो तो बाल्यावस्था में ही मां की मौत हो जाए। उपाय के तौर पर रात को कभी दूध न पीएं। पिता को अपने हाथ से दूध पिलाएं। दूसरों की भलाई हेतु अस्पताल, श्मशान में हैंडपंप या नल लगवाएं। दूध का दान भूल कर भी न करें।

सातवें घर का चन्द्रमा आदमी को तालीम के रूप में कोई न कोई ऐसी चीज जरूर देता है जो उसके उम्र भर काम आती है, चाहे फिर वो कुछ भी क्यों न हो। अशुभ हो तो संतान की मौत हो, स्वयं नशेबाज बन जाएं। बचने के लिए दूध और पानी कभी न बेचें। ससुराल से चन्द्रमा की वस्तु दहेज में प्राप्त कर घर में रखें।

आठवें घर का चन्द्रमा वाला आदमी या तो खुद भी तालीम हासिल कर औलाद को तालीम दिलाता है या फिर खुद के साथ-साथ उसकी औलादें भी तालीम के लिए तरसती है। तालीम मिल भी जाए तो मां का सुख नहीं मिलता। उपाय के लिए श्मशान के नल का पानी घर में ला कर रखें। पितरों का श्राद्ध करें और कभी जुआं न खेलें। घर में चन्द्रमा की वस्तुओं का संग्रह रखें।

नवें घर का चन्द्रमा आदमी को दातार बना देता है। ऐसा आदमी कभी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाता, खुद भी दुनिया के सारे सुख पाता है। ऐसा आदमी धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाला, भाग्यशाली, दयालु होता है। गरीब घर में जन्म लेकर भी राजा समान ऐश्वर्य प्राप्त करता है। चन्द्रमा की वस्तुएं स्थापित करना सौभाग्य लाता है।

दसवें घर का चन्द्रमा आदमी के भाग्य को बड़े-बड़े पत्थरों से ढंक देता है। वो खुद ही अपनी बर्बादी का जाल बुनता रहता है। शुभ हो तो उजड़ा घर भी बस जाएं, मंदा हो तो बसा घर भी पत्नी या प्रेमिका के कारण उजड़ जाएं, माता-पिता का सुख मिले। छाती या फेफड़ों के रोग हो। उपाय के तौर पर गुरु ग्रह का उपाय करें। रात्रि में कभी दूध न पीएं। ससुराल से लगाव न रखें।

ग्यारहवें घर के चन्द्रमा को बरसाती नाला कहा जाता है मतलब जब किस्मत खुलेगी तो पूरी नहीं तो कुछ भी नहीं। ऐसा आदमी बिना तालिम के भी अक्लमंद होता है। मंदा हो तो दान लेना या देना अशुभ रहता है, केतु की वस्तु की व्यापार भी घाटा लाएगा। उपाय के लिए भैरव मंदिर में दूध का दान करें।

बारहवें घर के चन्द्रमा को ‘आसमानी पानी’ या ‘खुशी पर काला पर्दा’ कहा जाता है। अगर कुंडली में पापी ग्रह शनि, राहू या केतु अशुभ हो तो आदमी की विद्या उसके खुद के लिए शुभ नहीं होती, न ही उसे अपनी तालीम का कोई फायदा होता है। बचाव के लिए वर्षा का जल घर में स्थापित करें। गुरु का उपाय करने से भी लाभ होगा, कोई भी नया कार्य पानी पीकर ही आरंभ करें।

बृहस्पति

लाल किताब के अनुसार अगर बृहस्पति अपनी उच्च राशि या कारक घर (2, 5, 9, 12) में हो  शुभ असर देता है। अगर दूसरे, पांचवें, नौवे या बारहवें घर (2, 5, 9, 12) में बृहस्पति के शत्रु ग्रह जैसे शुक्र, बुध या राहू हो तो बृहस्पति मंदा (अशुभ) असर देने लगता है।

पहले घर में बृहस्पति शुभ होने पर आदमी नामचीन हैसियत होता है जो दूसरों का भी भला करता है। मंदी हालत होने पर भी ऐसा आदमी एक ऐसा फकीर बनता है जिसके पास रुहानी ताकत और सम्मान दोनों ही होते हैं। मंदा होने पर धन हानि हो और सांसारिक कार्यों में अशुभ फल मिले। घर में चन्द्रमा की वस्तु स्थापित करें, भूमि में मंगल की वस्तु दबाएं। राजकोष से प्राप्त धन में से कुछ हिस्सा तिजोरी में रखने से अखंड लक्ष्मी प्राप्त होती है।

दूसरे घर का बृहस्पति शुभ होने पर खुद के साथ-साथ दुनिया को भी तार देता है। अगर अशुभ हो तो अपने ही खानदान को तबाह करने से भी नहीं चूकता। ऐसा आदमी जहां भी जाएं, वही बदकिस्मती पहुंच जाएं हालांकि जातक को खुद को कोई नुकसान न हो। उपाय के लिए गुरु की वस्तु पीले कपड़े में बांधकर मंदिर में दे आएं। गुरु की वस्तु स्थापित करें तथा घर आए मेहमानों का निरादर कभी न करें।

तीसरे घर का बृहस्पति बहुत हिम्मत वाला होता है। ऐसा जातक धनी, दीर्घायु और दूसरों का भला करने वाला होता है। मंदा हो तो आदमी को बुजदिल, डरपोक, मनहूस और भिखारी बना देता है। मित्र और सगे-संबंधी ही उसे लूट लेते हैं। खुद भी नास्तिक, विश्वासघाती, कायर होता है। बचने के लिए मां दुर्गा तथा कन्याओं की पूजा करें।

चौथे घर का बृहस्पति शुभ हो तो आदमी इंद्र के समान स्वर्ग के ठाठ भोगता है। दूसरों की मदद करता है और खुद भाग्यशाली बनता है। मंदा हो तो खुद ही खुद की नाव डुबो देता है, राजा के घर जन्म लेकर भी भिखारी का जीवन जीता है। उपाय के लिए अपने से बड़ों की बात मानें, उनका अपमान न करें। मांस-शराब का सेवन न करें तथा पराई स्त्री से कभी संबंध न बनाएं।

पांचवें घर का बृहस्पति वाला आदमी अपनी औलाद की किस्मत से खाता है। ऐसा जातक मान-सम्मान युक्त, ब्रह्मज्ञानी, क्रोधी तथा उच्च अधिकारी होता है। मंदा हो तो औलाद पेट से ही मुर्दा पैदा होती है। भीख मांगकर अपना जीवन ज्ञापन करता है। उपाय के तौर पर गणेश की उपासना शुभ रहती है, केतु का उपाय भी सौभाग्य लाता है। शराब, मांस तथा पराई स्त्री से संबंध नहीं बनाएं तो सब कुछ शुभ ही होता है।

छठे घर का बृहस्पति आदमी को बिन मांगे सब कुछ देता है। जो चाहता है, उसे अपने आप मिलता चला जाता है। हर तरह से खुशहाल रहता है। मंदा हो जाए तो कब्र में पहुंचने तक भी गरीबी और दुख से पीछा नहीं छूटता। कटोरा लेकर भीख मांगनी पड़ सकती है। बचाव के लिए बड़ों के नाम पर सदैव दान-पुण्य करते रहें। कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं, पीपल के पेड़ को सींचे और गणेशजी की आराधना करें।

सातवें घर का बृहस्पति आदमी को धर्म-कर्म में रुचि रखने वाला धनवान बनाता है। ऐसा जातक ज्योतिषी, तपस्वी, पूजापाठ करने वाला तथा धनवान होता है। मंदा होने पर उसकी औलाद दुखी ही रहती है, खुद को भी पेट भरने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। उपाय के लिए शिव की उपासना करें, चन्द्रमा का उपाय करें।

आठवें घर का बृहस्पति पल भर में अपना सब कुछ दान करने से नहीं चूकता और दान से ही उसकी किस्मत भी खुलती है। मंदा हो जाए तो ऐसा आदमी के लिए कुबेर के भंडार भी राख में बदल जाते हैं मतलब उसे कभी कुछ नहीं मिलता। फकीर या साधु को दान देते रहें। खराब समय आने पर मंदिर में गुरु तथा शुक्र की वस्तु दान करने से समस्या हल हो जाएगी।

नवें घर का बृहस्पति अपने से बड़ों का नाम पूरी दुनिया में फैलाता है, हर तरफ उसकी कामयाबी के किस्से होते हैं। चरित्र का भी अच्छा होता है और धन कमाता है। मंदा हो जाए तो उसकी किस्मत में रेत भी नसीब नहीं होती। प्रतिदिन मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन करें। कभी मदिरा को हाथ न लगाएं। बुध की वस्तु बहते पानी में बहाएं या स्कूल, कॉलेज में दान दें।

दसवें घर का बृहस्पति मिट्टी को भी सोना बना देता है। ऐसा जातक खुद अपने हाथों से ही अपना भाग्य लिखता है। अपनी चतुरता से धन कमाता है। अशुभ हो तो सोना मिट्टी में बदल जाता है, आदमी उम्र भर रोता रहता है, रोटी को तरस जाता है, भलाई करने पर भी दण्ड ही मिलता है। बचाव के लिए केतु या गुरु का उपाय करें। ललाट पर 43 दिन तक पीले केसर का तिलक लगाएं। सिर ढक कर रखें।

ग्यारहवें घर का बृहस्पति जिसकी कुंडली में हो उसे शनि की चीजें जैसे जमीन, जायदाद आदि फलती-फूलती है। ऐसा जातक सर्वगुण सम्पन्न, दयालु, धार्मिक होता है। मंदा हो तो ऐसे आदमी को कफन भी दूसरों की भीख के पैसों से मिलता है। शनि का उपाय करें, मांस-मदिरा से दूर ही रहें। कफन दान में दें। धार्मिक बनें।

बारहवें घर का बृहस्पति आदमी को घर बैठे बेहिसाब दौलत देता है। ऐसा जातक दूसरों का भला करने वाला, ज्ञानी तथा बैरागी होता है। मंदा हो तो ऐसा आदमी पैसा होते भी सुख नहीं भोग पाता और सब खत्म हो जाता है। राजा होकर भी फकीर बन जाता है। बचने के लिए माथे पर केसर का तिलक लगाएं, सिर पर चोटी रखें तथा गले में कभी माला न धारण करें। गुरु तथा साधु का मान-सम्मान करें।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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