Lal Kitab Remedies

लाल किताब के उपाय भाग -2 

शुक्र

वैदिक ज्योतिष और लाल किताब दोनों के अनुसार शुक्र का संबंध पत्नी और लक्ष्मी से है। शुभ हो तो आदमी के गृहस्थ तथा सांसारिक जीवन को संवार देता है, अशुभ हो तो आदमी को मांगने से भी भीख नहीं मिलती। इसलिए आदमी के जीवन के बारे में बताते समय कुंडली में शुक्र को बहुत महत्व दिया जाता है।

पहले घर का शुक्र ग्रह आदमी को उसकी चाहत में कुछ भी करवा देता है, मतलब आदमी अपनी इच्छापूर्ति के लिए किसी भी हद तक चला जाता है। हर तरह का सुख भोगे लेकिन बद हो तो इसी कारण से बरबाद भी हो जाता है। पराई स्त्री से संबंध के चलते बड़ी समस्या का सामना करना पड़ें। दही से स्नान करें, किसी भी कार्य को करने से पहले दूसरों की सलाह अवश्य लें।

दूसरे घर का शुक्र सुखद गृहस्थ की निशानी है लेकिन आदमी को अपनी खूबसूरती पर अभिमान भी होता है। दूसरे लोग भी उसकी खूबसूरती के चलते उसे पसंद करते हैं। अगर दूसरे की बुराई करे तो खुद के लिए बुरा वक्त बुलाएं। मंदा हो तो बाजारू स्त्री या वेश्या बर्बादी का कारण बनती है या पराई स्त्री के लिए सब कुछ लुट जाता है। उपाय के तौर पर मंगल की वस्तु प्रयोग करें। दो किलो आलू हल्दी से पीले करके गाय को खिलाएं। दो सौ ग्राम गाय का पीला घी मंदिर में दान दें।

तीसरे घर का शुक्र एक शक्तिशाली शख्सियत का मालिक बनाता है। ऐसा आदमी अपने जीवन में जबरदस्त मेहनत तो करता ही है, उसमें खुद में एक आकर्षण होता है जो बरबस दूसरों को अपनी ओर खींच लेता है। पराई स्त्री उसे निहाल करती है लेकिन खुद की पत्नी से संबंध अच्छे नहीं होते। कभी पराई स्त्री से संबंध न बनाएं, साथ ही किसी भी स्त्री का अपमान न करें।

चौथे घर का शुक्र कभी शुभ नहीं होता, या तो औलाद नहीं होती या गृहस्थ सुख नहीं मिल पाता। एक साथ दो या अधिक स्त्रियों से संबंध होता है। ज्यादा मंदा हो तो नशा बर्बादी का कारण बनें, स्वयं की पत्नी स्वेच्छाचारी हो। उपाय के लिए कभी घर में कुआं न खुदवाएं। चन्द्रमा तथा गुरु का उपाय करें।

पांचवें घर में बैठे शुक्र को भरा-पूरा घर का मालिक बताया गया है। अर्थात ऐसा आदमी गृहस्थी से जुड़े हर सुख को भोगता है। पत्नी साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप होती है जो पूरे कुल को तार देती है, मंदा हो तो चाल-चलन खराब होने से भाग्य भी खराब हो जाए। उपाय के तौर पर गाय तथा मां की सेवा करें। चन्द्रमा की कारक वस्तुएं दूध तथा चांदी सहयोग करते हैं। गुप्तांग को दूध-दही से धोते रहने से भी अशुभ शुक्र से बचाव होता है।

छठे घर का शुक्र घऱ में पड़ा ऐसा खजाना है जिसकी कोई कदर नहीं होती और न ही किसी काम आता है। कभी-कभार इससे औलाद के सुख में भी कमी आ जाती है। उपाय के लिए चांदी की ठोस गोली अपने पास रखेंष पत्नी नंगे पैर जमीन पर न चलें वरन मोजे या चप्पल पहने रहें। महिलाएं बालों में सोने का क्लिप लगाकर रखें तो धन लाभ हो।

सातवें घर का शुक्र खुद कुछ भी नहीं होता बल्कि जिस भी ग्रह के साथ होता है या जिसके असर में आ जाता है, उसी का असर देने लगता है। मंदा हो जाएं तो परस्त्री और ऐय्याशी में फंस कर कंगाल हो जाएं। उपाय के लिए माता-पिता का आशीर्वाद लें। लाल गाय की सेवा करें तथा शुक्रवार को कांसे का बर्तन मंदिर में दान करें।

आठवें घर का शुक्र ‘जली मिट्टी’ कहलाता है, मतलब ऐसे आदमी को पति या पत्नी का सुख नहीं मिलता। लेकिन अगर ये शुक्र वृषभ, तुला या मीन राशि में हो तो इसका अशुभ असर कम हो जाता है। तांबे का सिक्का या नीला फूल गंदे नाले में 43 दिन तक डालें। मंदिर में सिर झुकाकर ही कार्य आरंभ करें। स्त्री रोगी हो तो उसके वजन समान ज्वार मंदिर में दान करें।

नौंवे घर का शुक्र ऐशो-आऱाम तो देता है लेकिन कामवासना संबंधी बीमारियां भी पैदा कर देता है। कई बार ऐसा आदमी पैसे की तंगी का सामना करता है, हालांकि उसके ऐशो-आराम में कोई कमी नहीं आती। काली या लाल गाय की सेवा करें। आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए नीम के वृक्ष तले चांदी के चौकोर टुकड़ें दबाएं। घर में चांदी, शहद या घोड़ी स्थापित कराएं।

दसवें घर का शुक्र आदमी को उसकी बीबी से दबने वाला बना देता है। स्त्री कामुक हो औऱ शारीरिक सुख दें। ऐसे आदमी के किसी दूसरी औरत से भी संबंध हो सकते हैं जो उसके हर फैसले में दखल रखती है। शनि का उपाय करें। गुप्तांग दही से साफ करें। अतिकामुकता से बचें।

ग्यारहवें घर का शुक्र पैसे के मामले में शुभ ही रहता है। मंदा हो तो आदमी लट्टू की तरह घूमने वाला होता है मतलब ऐसे आदमी की किसी बात का भरोसा नहीं किया जा सकता। वो कब, कहां घूम जाएगा, कोई नहीं जानता। तेल का दान करें। शनि तथा चन्द्रमा की वस्तु दान करने से गुप्त रोगों में लाभ हो। बुख का उपाय करें। मंदिर में रूई तथा दही दान करें।

बारहवें घर के शुक्र को ‘कामधेनु गाय’ कहा गया है जो आदमी को सब दुखों से तार देती है। यहां शुक्र मीन राशि में होने के कारण उच्च का हो जाता है। ऐसे आदमी को शुक्र यानि पत्नी की ओर से बहुत बड़ा योगदान मिलता है। स्त्रियों को मान-सम्मान दें। राहू की वस्तुओं का व्यापार न करें, न ही कोई संबंध रखें, स्त्री के द्वारा या उसके नाम पर गौ दान कराएं।

मंगल

लाल किताब के अनुसार मंगल हमेशा ही खराब नहीं होता। इसके साथ कौन सा ग्रह है, उससे मंगल के शुभ या बद होने का पता चलता है। मंगल के साथ बुध हो तो मंगल का असर अच्छा नहीं होता। अगर कुंडली में सूर्य और शनि एकसाथ हो तो भी मंगल का असर शुभ नहीं होता। कुंडली के सभी बारह घरों में मंगल का फल इस तरह होता है।

कुंडली में मंगल अगर पहले घर में हो तो आदमी कभी दूसरों से नाइंसाफी नहीं करता। अक्सर ऐसा आदमी अकेला नहीं होता वरन दूसरे भी उसके साथ होते हैं। मंदा हो तो माता-पिता, भाईयों तथा ससुराल पक्ष को कष्ट देता है। लेकिन अगर मुफ्त का माल रखें तो दर-दर भटकने वाला बन जाता है। ऐसा जातक कभी भी ससुराल का कुत्ता न पालें।

दूसरे घर का मंगल जिसकी कुंडली में हो, वो हमेशा दूसरों की भलाई करता है। ऐसा आदमी या तो खुद बड़ा  भाई होता है और छोटे भाईयों की मदद करता है या उसे अपने बड़े भाई से लाभ होता है। मंदा तो दूसरों के लिए आस्तीन का सांप बन जाएं। कभी भी घर की बड़ी स्त्रियों का अपमान न करें। सफेद वस्तुओं का दान करें तथा ससुराल में नलकूप लगवाएं।

लाल किताब में तीसरे घर के मंगल को ‘चिड़ियाघर का शेर’ कहा जाता है जिसे अपनी ताकत, बहादुरी तथा हैसियत का अंदाजा नहीं होता। ऐसा आदमी भोला स्वभआव, धनी, साहसी होता है। कभी भी अय्याशी तथा जिद्दी न बनें और चांदी की अंगूठी बिना जोड़ वाली अपनी तर्जनी अंगुली में धारण करें।

चौथे घर का मंगल जातक के भाई की पत्नी, नानी, सास आदि पर बुरा असर डालता है। ऐसा आदमी छोटा होते हुए भी 28 साल की उम्र तक बड़े भाई की भूमिका निभाने लगता है। मंदा हो तो चाचा-ताऊ के परिजन ही जातक को खत्म करने में जुट जाते हैं। उपाय के तौर पर चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें। चिड़ियों को मीठा खिलावें तथा वटवृक्ष की जड़ में मीठा दूध चढ़ाएं।

पांचवे घर में मंगल सूर्य की पक्की राशि में बैठता है। ऐसे आदमी से जो भी दुश्मनी रखता है, वो खुद ही खत्म हो जाता है, मतलब उसके सामने कभी दुश्मन नहीं टिक पाते। आर्थिक रूप से भी वो बहुत मजबूत होता है और अपने बच्चों के दोस्तों के लिए भी हर तरह की मदद करने को तैयार रहता है। मंदा  तो प्रेमिका ही तबाही का कारण बनती है। बचाव के लिए रात  सिरहाने पानी रखकर सोएं तथा दूध का दान करें। परस्त्री से दूर रहें और वृद्धजनों की सेवा करें।

छठे घर में मंगल आदमी को साधु-संन्यासी बना देता है। ऐसा आदमी दूसरे की भलाई के लिए खुद का भी नुकसान करवाने से पीछे नहीं हटता। कई बार ऐसे आदमी के भाई नहीं होते, या भाईयों की हालत खराब होती है। मंदा तो सन्तान के लिए आंसू बहाने पड़े। शनि का उपाय करने से शांति मिलती है, कन्या का पूजन कर उन्हें दूध, चावल तथा चांदी का दान करें। भगवान गणपति की आराधना से भी तुरंत राहत मिलती है।

सातवें घर का मंगल अगर शुभ हो तो जातक के भाईयों या सालों के लिए भाग्यशाली होता है। ऐसा आदमी अगर अपने भाईयों की औलाद को पालने वाला होता है तो उसका भाग्य दिन-दूना रात चौगुनी तरक्की देता है। अशुभ हो तो जातक की बहन को विधवा बना दें या उसका तलाक करवा दें। उपाय के तौर पर मांस-मदिरा का सेवन भूल कर भी न करें। ठोस चांदी घर पर रखें तथा बुआ-बहन को लाल वस्त्र देता रहे।

आठवें घर का मंगल जिसकी कुंडली में होता है, उसके या तो छोटे भाई होते ही नहीं, या फिर उनके लिए अशुभ होता है। बहुत बार ऐसे आदमी के भाईयों के बीच चार साल से लेकर आठ साल तक का अंतर होता है। विधवा स्त्री का आशीर्वाद लेना हर प्रकार से तरक्की लाता है। गले में चांदी धारण करें।

नौंवे घर के मंगल को ‘तख्तशाही’ या ‘खजाना’ कहा जाता है। ऐसा आदमी ऊंची हैसियत का मालिक होता है। ऐसी हालत में भाई की पत्नी की सेवा करने से मंगल बहुत ज्यादा शुभ होकर आदमी की मदद करने लगता है। भाई-भाभी के साथ रहने से हर तरह की तरक्की मिले, बंटवार हो तो भिखारी बनते देर नहीं लगेगी। सदा बड़े भाई-भाभी की सेवा करें, बुध की वस्तुएं कुएं में डालें तथा शुक्र की वस्तुओं का मंदिर में दान करें।

दसवें घर का मंगल आदमी को सब सुखों से भर देता है। अगर कुंडली में शनि भी शुभ हो तो ऐसा आदमी उम्र भर अपने भाईयों की मदद करता है। बहुत बार उसे अपने चाचा या पिता के किसी खास दोस्त की तरफ से मदद मिलती है। मंदा हो तो जातक को बरबाद हो जाता है। उपाय के तौर पर पुश्तैनी जायदाद कभी न बेचें। हिरन को पालें अथवा काणे और निसंतान की सेवा करें।

ग्यारहवें घर का मंगल ‘फकीरी भेष’ कहलाता है। कुंडली में बुध या शनि जैसे होंगे, वैसा ही मंगल का असर होगा। हालांकि ऐसे आदमी की आर्थिक स्थिति कोई बहुत अच्छी नहीं होती और न ही उसे अपने भाईयों से कोई मदद मिलती है। मंदा होने पर जातक रोगी तथा उसकी संतान झगड़ालू होती है। बचाव के लिए पैतृक संपत्ति न बेचें। घर में कुत्ता पालें या साले, दामाद और नाती का पालन-पोषण करें। केतु की वस्तुएं दान करें।

बारहवां घर बृहस्पति का घर है। यहां बैठा मंगल आदमी को आस्तिक बनाता है। ऐसा आदमी अगर धर्म-कर्म में रूचि रखें तो भाग्य फलता-फूलता है, लेकिन अशुभ हो तो जातक के किसी-न-किसी भाई की मृत्यु होने का भय होता है। मेहमानों को पानी की जगह दूध पिलावें। मीठा खाएं तथा खिलाएं। कुत्ते या फकीर को भी मीठा दूध और मीठी रोटी दान करें। मंदिर में बताशे चढ़ाएं।

बुध

लाल किताब के अनुसार बुध का असर वैसा ही होता है जैसा उसके साथ का ग्रह होता है। अगर बुध, मंगल, केतु के साथ हो तो मंदा असर देता है लेकिन शत्रु ग्रह जैसे गुरु के साथ हो तो गुरु के असर को मंदा कर देता है, खुद ज्यादा अशुभ नहीं होता। घरों के हिसाब से तीसरे, आठवें, नौवें, ग्यारहवें तथा बारहवें घर में बैठा बुध मंदा होता है।

पहले घर का बुध शुभ हो तो जातक की बड़ी बेटी को सौभाग्य का वर देता है लेकिन अशुभ हो तो खुद के साथ-साथ भाईयों की किस्मत को भी बर्बाद कर देता है। भूल कर भी मांस-मदिरा तथा अंडे का सेवन न करें। हरे रंग की वस्तुओं से दूर रहें।

दूसरे घर का बुध शुक्र को मंदा कर देता है। अगर शुक्र नौवें घर में हो तो जातक की पत्नी दुख पाती है। ऐसा जातक तेज तर्रार, ज्ञानी और खुद में मस्त रहने वाला होता है। मंदा हो तो आर्थिक तंगी रहती है। तरक्की के लिए साली का साथ न करें न ही उससे संबंध रखें। चन्द्रमा तथा गुरु की वस्तु मंदिर में दान करें। भूल कर भी तोता (नर व मादा दोनों) न पालें।

तीसरे घर में बैठा बुध भी शुक्र को मंदा करता है लेकिन खुद अशुभ नहीं होता। यहां अगर बुध शुभ हो तो बड़ी बहन के लिए अच्छा फल देता है। किसी अन्य ग्रह के कारण से मंदा हो जाए तो पिता का धन तथा मां का घर डूब जाए। बुध की कारक वस्तुओं का उपयोग न करें। पक्षियों की सेवा करें तथा बकरी का दान करें।

चौथे घर में बुध अकेला हो तो लोहे को सोने में बदलने वाला पारस पत्थर हो वरना चन्द्रमा को खराब कर देता है जिससे जातक की मां तथा मां के घर (मायके), भाई (मामा) की माली हालत और तबियत खराब कर देता है। गुरु का उपाय करने से लाभ हों। चांदी की जंजीर धारण करें। 43 दिन तक केसर का तिलक लगाएं।

पांचवें घर का बुध सूर्य के फल को मंदा कर देता है। शुभ हो तो जबान से निकली हर बात सच हो, घर, परिवार व संतान की तरक्की हो। अगर सूर्य नौवें घर में हो तो आदमी के रोजगार, पैसा, हैसियत को डांवाडोल कर देता है। उपाय के तौर पर गले में तांबे का पैसा धारण करना घर में अखंड लक्ष्मी लाता है। गाय पालने से किस्मत साथ देने लगती है।

छठे घर का बुध केतु के असर को मंदा कर देता है। जातक ईमानदार, अच्छा लिखने वाला, विद्वान हो। मंदा होने पर जातक लालची बन कर नमक-हरामी करता है। ऐसे आदमी को बेटे की तरफ से परेशानियां झेलनी पड़ती है। दूध की बोतल वीराने में दबा दें। स्त्री के बाएं हाथ में चांदी का छल्ला धारण करें।

सातवें घर का बुध नौवे घर के शुक्र को खत्म कर देता है और आदमी को शुक्र से जुड़े कारक जैसे पत्नी, धन आदि का कष्ट भोगना पड़ता है। चरित्रहीन साली से कोई संबंध न रखें, न ही सट्टा खेलें। शनि का छल्ला मध्यमा अंगुली में धारण करें।

आठवें घर में बैठा बुध मंगल-शनि का फल देता है। अगर मंदा हो जाए तो उसका असर जातक की बहन, बेटी या बुआ पर पड़ता है। उपाय के तौर पर मिट्टी के बर्तन में देशी खांड या शहद भरकर वीराने में दबा दें। छत पर वर्षा का पानी या दूध रखें। बुध ज्यादा ही अशुभ हो तो मंगल की वस्तुएं श्मशान में दबाएं।

नौवें घर में बुध खुद इतना अशुभ नहीं होता लेकिन अगर गुरु भी नौवें घर में ही है तो उसके असर को अशुभ कर देता है। उपाय के तौर पर कभी हरे रंग का प्रयोग न करें न ही साधु या फकीर से कोई ताबीज लें।

दसवें घर का बुध शनि का फल देता है। जातक आज्ञाकारी, चतुर, स्वार्थी तथा विद्वान होता है। उसके हाथों से लग कर मिट्टी भी सोना बन जाती है। अशुभ हो तो जातक के चाचा पर इसका असर पड़ता है। खुद भी मांसाहार और नशे का शिकार होकर बर्बाद हो जाता है। उपाय के तौर पर शराब, मांस, अंडे का सेवन न करें तथा शनि का उपाय करें।

ग्यारहवें घर में बुध गुरु का असर देता है। ऐसा जातक उच्च शिक्षित, सर्वगुण सम्पन्न तथा धनी हो। मंदा हो तो शनि के शुभ असर को भी कम कर देता है, व्यक्ति त्वचा-रोग से पीड़ित हो तथा धनहानि हो। बचाव केलिए किसी से कोई ताबीज न लें और गले में तांबे का पैसा धारण करें।

बारहवें घर का बुध अशुभ माना जाता है। ऐसा बुध आदमी के पिता तथा साले के लिए शुभ नहीं रहता और उन्हें दुख झेलना पड़ता है। अगर शुभ हो तो राजाओं के समान सुख प्राप्त करें। बचाव के लिए जुबान पर नियंत्रण रखें तथा गले में पीला धागा धारण करें। काला-सफेद कुत्ता पालें और गणेश की पूजा करें।

शनि

शनि का सीधा संबंध स्थाई संपत्ति और जमीन-जायदाद से जोड़ा जाता है। हालांकि ज्योतिष के अनुसार शनि न्यायकर्ता ग्रह हैं जो व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देता है। लाल किताब के अनुसार कुंडली के हर घर में शनि का असर बदल जाता है। इस पर भी इसके साथ कौनसा ग्रह है, उसी आधार पर शनि का अच्छा या मंदा असर देखने में आता है। खास तौर पर सूर्य के साथ होने पर शनि का असर ठीक नहीं माना गया है।

पहले घर में शनि मंदा हो तो आदमी को भिखारी बनते देर नहीं लगती। ऐसे में कभी भी आदमी को खुद का मकान नहीं बनाना चाहिए। कभी मांस-मदिरा का सेवन न करें। वटवृक्ष की जड़ में दूध चढ़ाकर गीली मिट्टी से तिलक लगाएं। बंदर पालें या उसकी सेवा करें, तवा, चिमटी व अंगीठी का दान करें।

दूसरे घर का शनि वाला जातक दीर्घायु, सुखी व धनवान हो। वो जब भी खुद का घर बनाएगा, तभी से तरक्की करना शुरु कर देगा लेकिन उस मकान को अच्छा या बुरा जैसा भी बने, बनने देना चाहिए। बीच में रोकना ठीक नहीं माना गया है। सांप को दूध पिलाएं, शिवलिंग पर जल चढ़ाएं तथा मस्तक पर दूध या दही का तिलक लगाएं।

तीसरे घर का शनि दूसरों की सहायता से तरक्की करता है। मंदा हो तो आदमी को भिखारी बनने लायक भी नहीं छोड़ता। उपाय के तौर पर उस आदमी को तीन कुत्ते पाल लेने चाहिए तब शनि अच्छा असर देना शुरु कर देगा। मांस-मदिरा का त्याग करने पर उम्र लंबी हो।

चौथे घर का शनि जातक को चिकित्सक बनाता है। कुटुंब भरा-पूरा तथा सुखी होता है। हालांकि माता तथा माता के परिवार के लिए दुर्भाग्य लाता है। जिस दिन भी जातक खुद के मकान की नींव रखेगा, उसी दिन से इनकी हालत खराब होनी शुरु हो जाएगी। परस्त्री गमन से बचें, विधवा स्त्री से संबंध न बनाएं। सांप को न मारे, दूध पिलाएं तथा कौएं को रोटी डालें।

पांचवे घर का शनि आमतौर पर मंदा ही माना गया है। ऐसा आदमी 48 साल की उम्र तक मकान न बनाएं तो ही बेहतर होगा, परन्तु अपने औलादों द्वारा बनाए गए मकान में रखना उसकी किस्मत को खोल देगा। संतान के जन्म लेन पर मीठा न बांटे या मीठे में थोड़ा सा नमक लगा दें।

छठे घर का शनि जातक को मंदा असल देता है। ऐसे जातक को कभी भी 39 साल से पहले खुद की स्थाई संपत्ति नहीं बनानी चाहिए। शुभ हो तो धनवृद्धि व दीर्घायु प्राप्त हो। उपाय के तौर पर एक बर्तन में सरसों का तेल भर कर उसमें अपना मुंह देखें और जमीन के अंदर दबा दें। नारियल या बादाम बहते पानी में बहाएं, काले कुत्ते को रोटी दान करें।

सातवें घर का शनि हर तरह से शुभ होता है। ऐसा आदमी राजा समान सुख भोगता है। ऐसे आदमी को अपने पुश्तैनी मकान को कभी नहीं बेचना चाहिए वरना उसके दुख के दिन शुरु हो जाएंगे। मंदा हो तो उसकी मृत्यु सिर कटने से हो। उपाय के तौर पर मांस-मदिरा से बचे, परस्त्री से दूर रहें, बांसुरी में खांड भरकर एकान्त स्थल में दबा दें।

आठवें घर का शनि जातक को राहू-केतु की हालत के आधार पर ही असर देता है। राहू-केतु के शुभ होने पर शुभ और मंदा होने पर मंदा असर देगा। अगर ऐसा आदमी मकान बनालें तो उसके खानदान में मौतें होना शुरु हो जाती है। चांदी का चौकोर टुकड़ा सदैव पास रखें। मांस-मछली, शराब से दूर रहें। चांदी धारण करें।

नौवें घर में शनि भाई तथा दोस्तों की सहायता से धनी बनाता है। परोपकारी होने पर शनि हर प्रकार का सुख देता है। अशुभ हो तो जातक संतानहीन होता है अथवा सब कुछ होते हुए भी दुखी रहता है। गुरु का उपाय करने से राहत मिलती है, घर की छत पर लकड़ी, ईंधन आदि व्यर्थ सामान न रखें।

दसवें घर का शनि हर तरह से किस्मत संवार देता है। शनि शुभ हो तो चारों ओर से धन-दौलत बरसती हैं, मंदा हो तो सड़क पर ला देता है। ऐसे आदमी को कभी भी खुद का मकान नहीं बनाना चाहिए। गुरु का उपाय करें। गणेशजी की आराधना करें, 10 नेत्रहीनों को भोजन कराएं।

ग्यारहवें घर का शनि शुभ फल देता है अगर केतु भी शुभ हो। धोखेबाजी से धन कमाने पर बर्बाद हो जाएं। शनि मंदा हो तो शिक्षा अधूर रहे, जातक हत्यारा व क्रोधी हो। गुरु का उपाय करने से लाभ होता है। 43 दिनों तक तेल या शराब प्रातःकाल सूर्योंदय के समय धरती पर गिराएं।

बारहवें घर का शनि आदमी को निहाल कर देता है। अगर सूर्य भी साथ हो तो सब तरफ से उन्नति होती चली जाती है। आगे से आगे काम बनते चले जाते हैं। मंदा हो तो जातक पराई स्त्रियों में रूचि लेने वाला होता है। उपाय के लिए 12 बादाम काले कपड़े में बांधकर लोहे के पात्र में बंद करके आजीवन रख छोड़े। उसे कभी न खोलें।

राहू

लाल किताब के अनुसार कुंडली में राहू का अच्छा या मंदा होना दूसरे ग्रहों पर निर्भर करता है। अगर शनि और राहू साथ हो तो राहू हमेशा ही शुभ रहता है। सूर्य के साथ हो तो सूर्य को ग्रहण लगा देता है। बृहस्पति के साथ हो तो उसके असर को भी मंदा कर देता है। चन्द्रमा के साथ होने पर चन्द्रमा के असर को मंदा करता है लेकिन राहू खुद अच्छा फल देने लगता है। कुंडली के 12 घरों में राहू का फल निम्न प्रकार से होता है।

पहले घर में राहू ‘सीढ़ी मंदी की निशानी’ कहलाता है। यहां का राहू आदमी को धनवान तो बनाता है लेकिन खर्चा भी बहुत होता है। राहू मंदा हो तो ऐसा आदमी बेईमान और धोखेबाज भी होता है। अगर बारहवें घर में मंगल हो तो राहू का असर काफी हद तक कम हो जाता है। राहू के उपाय के रुप में सूर्य की वस्तुएं जैसे गेंहू आदि का दान करना चाहिए। काले-नीले वस्त्र धारण न करें। गले में चांदी धारण करें। सूर्य की वस्तुएं दान करें।

दूसरे घर में राहू को ‘राजा गुरु का चेला’ बताया गया है। ऐसा आदमी या तो भिखारी होता है या करोड़पति, बीच की हालत कभी नहीं होती। हालांकि ऐसा आदमी हमेशा राजा की तरह ऐशो-आऱाम से ही रहता है। राहू मंदा हो तो चोरी का डर बना रहता है और दर-दर भटकता रहता है। उपाय के रूप में चांदी की ठोस गोली हमेशा अपने पास रखनी चाहिए। माता से मधुर संबंध रखें।

तीसरे घर का राहू ‘उम्र और धन का मालिक’ कहा जाता है। राहू शुभ हो तो ऐसे आदमी को कभी किसी बात का कोई डर नहीं होता, उसके सपने सच होते हैं। वो उम्र भर दौलत और सुख भोगता है। अगर यहा पर मंगल भी हो तो राहू और भी ज्यादा शुभ हो जाता है। मंदा होने पर सगे भाई-बांधव ही धोखा दे जाते हैं। उपाय के रूप में चांदी की डिब्बी में चावल डालकर घर में स्थापित करना चाहिए और कभी भी हाथी-दांत की वस्तु अपने पास नहीं रखनी चाहिए।

चौथे घर का राहू ‘धर्मी’ माना जाता है। ऐसा आदमी राजपरिवार से कमा कर अपना और अपने रिश्तेदारों का घर भर देता है। ऐसा आदमी गरीबी में जन्म लेकर भी राज करता है। हालांकि उसका बहुत सा पैसा धर्म-कर्म के कार्यों में खर्च होता है। राहू मंदा हो तो व्यक्ति की माता पर शुभ असर नहीं पड़ता परन्तु उस जातक को कभी भी गलत नियत से राहू की चीजें जैसे टॉयलेट, तंदूर या भट्टी घर में स्थापित नहीं करनी चाहिए।

पांचवें घर का राहू औलाद के लिए शुभ नहीं रहता हालांकि आखिर में इसका असर अच्छा हो जाता है। अगर आदमी अपनी ही पत्नी से दोबारा विवाह की रस्म निभाए या घर में शुक्र की वस्तु जैसे गाय आदि रखें तो इसका असर खत्म हो जाता है।

छठे घर का राहू अकेला हो तो आदमी की हर मुसीबत खुद-ब-खुद खत्म होती चली जाती है। उसे हर तरह का ऐशो-आराम बिना मांगे मिलता रहता है। राहू मंदा होने पर ऐसा आदमी चोर स्वभाव का होता है, भाईयों से लड़ाई-झगड़ा करें तो बर्बाद हो जाएगा। उपाय के रूप में काला कुत्ता पालें या सीसे की गोली या गोलाकार काली शीशा अपने पास रखना चाहिए।

सातवें घर का राहू गृहस्थी सुख को मंदा कर देता है। जीवनसाथी से तलाक या उसकी मृत्यु का कारण भी बन सकता है। साथ ही जीवन में बदनामी का सामना भी करना पड़ता है। उपाय के लिए चांदी की ईंट बनवाकर घर में रखनी चाहिए या फिर शनि का उपाय करना चाहिए। चार नारियल बहते पानी में बहाएं।

आठवें घर का राहू ‘मौत का पैगाम’ कहा गया है। अगर राहू शुभ हो तो ऐसे आदमी की किस्मत हमेशा झूलती रहती है, कभी ऊपर तो कभी नीचे। मंदा होने पर आदमी अपनी ही बुरी करतूतों के कारण बदनामी झेलता है। राहू के मंदे असर से बचने के लिए खोटे सिक्के या पैसे बहते पानी में डालने चाहिए। भूल कर भी बेईमानी न करें। 4 नारियल बहते पानी में बहाएं।

नवें घर का राहू औलाद के साथ-साथ आदमी की धन-दौलत के लिए अशुभ होता है। ऐसे आदमी को काला कुत्ता पाल लेना चाहिए। कुत्ता मर जाए तो तुरंत ही दूसरा पाल लेना चाहिए। इससे राहू का मंदा असर कम हो जाता है। सिर पर चोटी रखें, प्रतिदिन केसर का तिलक लगाएं तथा गुरु का उपाय करें।

दसवें घर का राहू कुंडली में शनि की स्थिति अनुसार चलता है। शनि शुभ हो तो जातक वीर, दीर्घायु, धनी तथा व्यापारी होता है। मंदा हो तो सोने को भी जंग लग जाएं। दूसरों से बिना वजह शत्रुता करता फिरें। बचाव के लिए मंगल का उपाय करें। नीले या काले रंग की पगड़ी या टोपी धारण करें।

ग्यारहवें घर का राहू शुभ हो तो निहाल कर दें, मंदा हो तो जन्म लेते ही घर में दरिद्रता छा जाएं। कुसंगति व धूर्त मित्रों के साथ रहकर बची-खुची संपत्ति भी गंवा दें। गुरु का उपाय करें, केसर का तिलक लगाएं तथा शरीर पर लोहा या स्वर्ण धारण करें।

बारहवां राहू के साथ अगर कुंडली में शनि शुभ हो तो जातक योगी, ज्ञानी और बेफिक्र होता है। सारे काम स्वतः ही होते चले जाएं। मंदा हो तो कुकर्मों में धन गंवा दें। अत्यधिक परिश्रम के बाद भई गुजारा न चलें, मानसिक रूप से परेशान रहे या पागल हो जाएं। उपाय के तौर पर खाना रसोई में ही बैठकर खाएं। जिद्दी न बनें और सोते समय तकिए के नीचे मंगल की वस्तु या मूंगा रखकर सोएं।

केतु

लाल किताब में केतु ग्रह को सफर से जोड़ा गया है। आदमी कब, कहां और क्यों सफर करेगा, इसकी जानकारी केतु को देख कर आराम से मालूम की जा सकती है। हालांकि ज्यादा डिटेल के लिए हमें बृहस्पति (हवाई सफर), शुक्र (जमीनी सफर) तथा चन्द्रमा (पानी का सफर) को भी देखना होता है। जीवन के सफर की बागडोर भी काफी हद तक केतु से जोड़ी गई है। लाल किताब के अनुसार केतु अच्छे घर में हो और चन्द्रमा भी शुभ हो तो केतु आदमी को नई ऊंचाईयों पर पहुंचा देता है।

पहले घर का केतु आदमी को उसकी अपनी जगह पर ही तरक्की देता है। ऐसा आदमी तकलीफ तो पाता है लेकिन आखिर में सब कुछ सही भी हो जाता है। मंदा हो तो पत्नी व बच्चों का स्वास्थ्य ठीक न रहें। उपाय के तौर पर बंदर को गुड़ खिलाएं व बुध का उपाय करें। प्रतिदिन केसर का तिलक लगाएं।

दूसरे घर का केतु यात्राओं के जरिए उन्नति कराता है। गुरु भी शुभ हो तो जातक करोड़पति होता है। मंदा होने पर अल्पायु हो। बचाव के लिए माथे पर केसर का तिलक लगाएं।

तीसरे घर का केतु ईश्वरभक्त और धनी हो। संतान सुख प्राप्त हो, पूर्वजों के आशीर्वाद से तरक्की हो। मंदा हो तो पत्नी व सालियों से वियोग हो, कोर्ट-कचहरी में पड़कर दुखी हो। उपाय के तौर पर गुरु की वस्तु बहते पानी में बहाएं। स्वर्ण धारण करें। केसर का तिलक लगाएं।

चौथे घर का केतु वाला जातक ईश्वरभक्त, संतोषी व पिता तथा गुरु के लिए शुभ होता है। मंदा होने पर जातक स्वयं रोगी हो साथ ही माता व संतान को दुख दें। बचाव के लिए सूर्य की वस्तुएं कुलपुरोहित को दान दें। गुरु की वस्तु बहते पानी में बहाएं तथा कुत्ता पाले।

पांचवें घर का केतु नर संतान के लिए शुभ है। अशुभ हो तो संतान मरी हुई उत्पन्न हो या रोगी हो। उपाय क लिए चन्द्रमा व मंगल की वस्तु दूध, खांड आदि का दान करें। गुरु का उपाय करें।

छठे घर का केतु शुभ हो तो जातक दीर्घायु हो, माता सुखी रहे, परदेश में आरामदायक जीवन जीएं। अशुभ होने पर मामा से कष्ट प्राप्ति हो। बिना वजह ही दूसरे लोग शत्रु बन जाएं। बचाव के लिए कुत्ता पालें व गुरु का उपाय करें। बाएं हाथ में सोने की अंगूठी पहनें।

सातवें घर का केतु बहादुर, बच्चों का मित्र तथा धनवान हो, उससे शत्रु भी खौफ खाएं। मंदा हो तो खुद बीमार रहे और दुश्मनी के चलते बर्बाद हो जाएं। गुरु का उपाय करने तथा केसर का तिलक लगाने से लाभ मिलता है।

आठवें घर का केतु मंदा हो तो जातक चरित्रहीन होता है, पत्नी बीमार रहती है, संतान भी विलंब से होती है। शुभ हो तो मृत्यु का पूर्वाभास हो जाए। भगवान गणपति की आराधना से लाभ होता है, कुत्ते को रोटी खिलाने व केसर का तिलक लगाने से केतु का बुरा असर हटता है।

नौवें घर का केतु जातक को परिश्रमी, धनवान, बहादुर तथा भाग्यशाली बनाता है। ऐसा आदमी ज्यादातर समय परदेश में ही रहता है। केतु का शुभ या अशुभ होना गुरु की दशा पर निर्भर होता है। मंदा हो तो स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, नर संतान एक के बाद एक समाप्त होती चली जाएं। उपाय के तौर पर बहन, बेटी या बुआ को दान दें।

दसवें घर का केतु जातक को भाग्यवान, अपने काम से काम रखने वाला, अवसरवादी बनाता है। जातक प्रसिद्ध खिलाड़ी बनता है और मिट्टी को भी सोने में बदल देता है। अशुभ हो तो गृहस्थ जीवन दुखमय रहता है। उपाय के लिए चरित्र का ध्यान रखें व गुरु तथा चन्द्रमा का उपाय करें। परस्त्री से दूर रहें।

ग्यारहवें घर का केतु शुभ हो तो जातक करोड़ों में खेलता है लेकिन डरपोक होता है। उसके भाग्य में राजयोग होता है हालांकि जातक डरपोक भी होता है। मंदा होने पर माता के लिए कष्टकारी हो, पेट के रोगों से पीड़ित रहें। बचाव के लिए काला कुत्ता पालें। बुध की धातु या पत्थर कनिष्ठिका अंगुली में पहनना लाभदायक होता है।

बारहवें घर का केतु तरक्की कराता है। जातक धनवान, उच्चपदस्थ और धर्म-कर्म में खर्चा करने वाला होता है। पुत्र के जन्म से ही घर में लक्ष्मी आनी शुरु हो जाती है। मंदा हो तो जातक ऐय्याश, चरित्रहीन और संतान के लिए निकम्मा होता है। ऐसे में गणेशजी की आराधना लाभ देती है। संतान को कष्ट होने पर राहु का उपाय करने से लाभ होता है। स्वयं के चरित्र को बिगड़ने न दें।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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