Financial Astrology

धन प्राप्ति हेतु टोटके

प्राचीन भारतीय शास्त्रों में कुछ ऐसे उपाय बताएं गए हैं जिनका उपयोग करके आम जीवन में आने वाली समस्याओं को बड़ी सहजता और आसानी से दूर किया जा सकता है। इन उपायों को करने के लिए न तो किसी की सलाह की जरूरत होती है और न ही इनका कोई उल्टा असर होता है। इन उपायों को करने में ज्योतिष में बताए गए उपायों जितना खर्चा भी नहीं होता और तुरंत काम होता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ बड़े ही सहज लेकिन तुरंत प्रभावशाली उपायों के बारे में

धन प्राप्ति हेतु

पूर्णिमा के दिन एक नारियल के गोले (खोपरे) को थोड़ा सा उपर से काट लें और उसमें बूरा तथा घी मिलाकर उपर तक भर दें। इसके कटे हुए हिस्से को वापस गोले पर लगाकर मोली से बांध दें और उसी दिन चींटियों के बिल के पास इस तरह से गाड़ दें कि चींटियां वहां तक पहुंच सके लेकिन कुत्ते या अन्य जानवर इस तक न पहुंच सके। ध्यान रखें कि इस प्रयोग को कोई दूसरा न देखें, जैसे-जैसे चींटियां इस नारियल को खाएंगी, आपकी नौकरी तथा व्यवसाय में तरक्की होने लगेगी।

गुरु पुष्य या रवि पुष्य नक्षत्र में बरगद (बड़) के ताजे पत्ते तोड़कर घर लाएं तथा उस पर हल्दी से स्वास्तिक बनाकर घर में रखें।

शुभ मुहूर्त में कुबेर की पूजा कर “ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये धन-धान्यं स्मृद्धिं देहि दापय दापय स्वाहा” का (कम से कम 108 बार या एक माला) जाप करते हुए बेसन के लड्डू अथवा केसर की बर्फी का भोग लगाएं। जप के दौरान गंगाजल अपने पास रखें। जप के बाद गंगाजल अपनी दुकान या कार्यालय की दीवारों पर छि़ड़क दें तथा मिठाई बच्चों में बांट दें। इस उपाय से तुरंत लाभ होता है।

शनिवार को गेहूं में 11 तुलसी के पत्ते तथा 2 दाने केसर मिलाकर पिसवाएं। इस प्रयोग को करने के बाद घर में कभी धन की कमी नहीं होगी और पैसा टिकने लगेगा।

रोज सुबह नियमित रूप से चींटियों को चीनी, नारियल का चूरा, सूखे मेवे आदि मिलाकर डालें। पक्षियों को भी बाजरा, ज्वार, मूंग आदि खिलाकर उनके पानी पीने के व्यवस्था करें। इससे धन प्राप्ति के साथ-साथ मनचाहे कार्य में सफलता भी प्राप्त होती है।

धन की प्राप्ति हेतु श्री यंत्र को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। श्री यंत्र के उपयोग से तुरंत ही लक्ष्मी प्राप्त होती है। दीपावली की रात को भोजपत्र, सोना, चांदी, तांबा अथवा स्फटिक पर बने हुए श्री यंत्र का पूजन करें। स्नान आदि से शुद्ध होकर पूर्वामुख होकर ऊनी आसन पर बैठें। अपने सामने श्री यंत्र स्थापित कर जल, पंचामृत, रोली, चावल, पुष्प से श्री यंत्र का विधिवत पूजन करें। इसके बाद माँ महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए “ऊँ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिम शेष जंतो। स्वस्थै, स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि” का जप करें तथा श्रीसूक्त का पाठ करें। इसके बाद पूरी रात इसी मंत्र का जप करें। सुबह श्रीयंत्र को अपने घर या कार्यालय के पूजा स्थल पर स्थापित कर दें तथा नियमित रूप से उपरोक्त मंत्र का जाप करते रहे और रोजाना एक गुलाब का फूल अर्पित चढ़ाएं। इससे तुरंत ही लक्ष्मी का आगमन होने लगता है।

रविवार के दिन जब पुष्य नक्षत्र हो, तो गूलर के वृक्ष की जड़ लाएं। इस जड़ को धूप, दीप आदि से पूजन कर इसे तिजोरी में रख दें अथवा स्वर्ण के ताबीज में भरकर पहन लें। जब तक यह ताबीज अथवा जड़ आपके पास रहेगी तब तक घर में अथाह लक्ष्मी का वास रहेगा। समाज में मान-प्रतिष्ठा, यश तथा सम्मान की प्राप्ति होगी।

नवरात्रि में अष्टमी के दिन सुबह उठ कर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा स्थल में गंगाजल अथवा कुंए के जल से छींटे दें। मां दुर्गा के चित्र के सामने एक पट्टा रखकर पूर्व की ओर मुंह करके उस पर ५ सिक्के रखें। इन सिक्कों पर रोली, लाल चंदन तथा पूर्ण रुप से खिला हुआ अखंडित एक गुलाब का पुष्प चढ़ाएं। अब मां से धन प्राप्ति की प्रार्थना कर इन सभी सामान को पोटली बांध कर अपने तिजोरी या गल्ले के अंदर रख दें। धन संबंधी सारी समस्याएं तुरंत ही दूर हो जाएंगी परन्तु इस प्रयोग को हर छह महीने में एक बार करते रहना चाहिए।

शुक्ल पक्ष के मंगलवार अथवा गुरुवार को एक मिट्टी के बर्तन में इक्कीस रूपए के सिक्के डालकर उपर से मिट्टी भर दें। इस मिट्टी में साबूत सूखा धनिया डाल कर पानी डालें तथा बर्तन को उत्तर दिशा में रख दें। अब इस बर्तन में रोज पानी डालें। कुछ ही दिनों में धनिया उग जाएगा। इस धनिए को तोड़कर अपने सब्जी आदि उपयोग में ले लें तथा सिक्कों को निकालकर लाल कपड़े में बांधकर अपने घर में कहीं भी लटका दें। तुरंत ही धन आना शुरु हो जाएगा।

गुरुवार के दिन एक साबुत दालचीनी का रोल लेकर उसके अंदर एक नोटर रोल करके डाल दें। इसके ऊपर से ३ बार मौली लपेटकर गांठ लगा दे तथा भगवान से प्रार्थना करें कि आपके घर (अथवा कार्यालय) में धन की कोई कमी न रहे। ऐसा करने के बाद उसे अपने ऑफिस या घर के बाहर लटका दें, चाहें तो तिजोरी या पर्स में रख लें।

घर के वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) दिशा में सुंदर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांधकर रखें। इसके बाद बर्तन को गेहूं या चावल से भरकर रख दें। इससे घर में समृद्धि आनी शुरु हो जाएगी और धन की कमी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े होकर लोहे के बर्तन में जल, चीनी, घी तथा दूध मिलाकर पीपल की जड़ में चढ़ाने से भी घर में लक्ष्मी का वास होता है।

शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंदिर में झाड़ू दान करने से साक्षात लक्ष्मी का घर में आगमन होता है।

शुक्रवार को शुभ मुहूर्त में अशोक वृक्ष की जड़ लाकर गंगाजल से पवित्र करें तथा उसे तिजोेरी के स्थान पर रखने से दरिद्रता सदा-सदा के लिए दूर हो जाती है।

नया कार्य (व्यवसाय, नौकरी आदि) आरंभ करने के लिए जब घर से निकले तो घर की कोई महिला एक मुट्ठी काले उड़द लेकर उस व्यक्ति के उपर से उसार (वार कर) जमीन पर डाल दें तो कार्य में अवश्य सफलता मिलती है।

दीपावली के दिन पीपल का एक अखंडित (बिना कटा-फटा या टूटा हुआ) पत्ता तोड़कर लाएं और अपने घर के पूजास्थल में रख दें। शनिवार को एक नया पीपल का पत्ता लाएं और उसे पुराने पत्ते के पास रख दें। पुराने पत्ते को घर के बाहर किसी पेड़ के नीचे दबा दें। लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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