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जन्मपत्रिका में देखें कितने ऋणी है आप ?

 कुंडली में दुषित ग्रहों के कारण जातक कई प्रकार से ऋणी होता है अर्थात कई प्रकार के ऋण भार जातक के उपर रहते हैं, जिसके कारण जातक के जीवन का विकास अवरुद्ध हो जाता है। क्योंकि दुषित ग्रहों के दोषयुक्त प्रभाव से शुभ ग्रह भी अनुकूल फल देना बंद कर देते हैं। अस्तु ऋण भार से जातक को मुक्त होना चाहिए ताकि शेष जीवन पर शुभ या अच्छे ग्रहों के अच्छे प्रभाव पड़कर, कुंडली के अनुसार शुभता प्राप्त हो सके। नीचे ऋण के प्रकार किस परिस्थिति में जातक पर अदृश्य ऋण पर पड़ता है तथा उसके निराकरण उधृत किए जाते हैं।

‘‘स्वऋण’’

ग्रहचाल: जब जन्मकुंडली में खाना नंबर 5 में शुक्र या शनि या राहु या तीनों में दो या तीनों स्थित हो तो स्वऋण होता है।

निशानिया: आपको राजभय, निर्दोष होने पर भी मुकद्दमें में दंड या जुर्माना भुगतना पड़ता है। हृदय रोग, बाजुओं में दर्द, शारीरिक कमजोरी, आंखों में कष्ट, जिगर की खराबी होती है।

घटनाएं: जातक नास्तिक हो जाता है, धर्म की उपेक्षा करता है स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहता, पूर्वजों के रीति-रिवाज के अनुसार नहीं चलता।

उपाय: यदि आपकी पत्री स्वऋण से युक्त है तो इसके लिए परिवार में जहां तक खून का संबंध (जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन, बेटी-बुआ,  भाई, चाचा-ताया के परिवार के सदस्य आदि) है सबसे बराबर-बराबर धन (एक-एक या पांच-पांच या अधिक से अधिक दस-दस रुपये जितने भी रुपये सभी दे सकें) इकट्ठा कर के धर्म स्थान पर सामूहिक यज्ञ करें।

‘‘मातृऋण’’

ग्रहचाल: जातक की जन्मकुंडली के चौथे खाने में केतु पड़ा हो तो मातृ ऋण का बोझ होता है।

निशानियां: जातक का कोई सहायक नहीं होता, उसके सभी प्रयास निष्फल होते है। सरकारी दंड या जुर्माना भुगतना पड़ता है। जीवन अशांत व्यतीत होता है, दूसरों की इज्जत को उछालनया खेलवार करना या जूता चुराना, विद्या का लाभ न मिलना। रिश्तेदारों की बिमारियों पर धन का अपव्यय आदि अशुभ फल होते है।

घटनाएं: मातृ ऋण से प्रभावित जातक माता से दुर्व्यवहार करता है। माता के सुख-दुःख का ख्याल नहीं रखता। माता से दूर रहे या माता को घर से निकाल देता हैं।

मातृ ऋण वाले जातक के घर के पास या घर में कुआं होगा। घर के पास जलाशय होगा। उस कुएं में गंदगी डाली जाती होगी या जलाशय को गंदा करता होगा। हो सकता है कि जातक के घर के पास नदी-नहर बहती हो। जातक उस में गंदगी डालता होगा।

उपाय: यदि आपकी पत्री मातृऋण से युक्त है तो इसके लिए परिवार में जहां तक खून का संबंध (जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन, बेटी-बुआ, भाई, चाचा-ताया के परिवार के सदस्य आदि) है सबसे बराबर-बराबर वजन में चांदी लेकर उसी दिन दरिया में बहा देवे।

‘‘पारिवारिक ऋण’’

ग्रहचाल: जातक की जन्मकुंडली पहले या आठवें खाने में बुध या केतु या दोनों बैठे हो तो रिश्तेदार का ऋण होता है।

निशानियां: किसी की भैंस बच्चा देने को हो तो उसे मार देना या मरवा देना। किसी का मकान बनने या नीव खोदते समय जादू-टोना कर देना या रिश्तेदारों से मिलने-जुलने बालों से नफरत करना या बच्चों के जन्म दिन और परिवार में त्यौहार या खुशी के समय दूर रहना।

घटनाएं: जातक मित्रों से धोखा करता है। किसी के बने-बनाए काम को बिगाड़ देता है या किसी की पकी हुई खेती को आग लगा देना।

उपाय: यदि आपकी पत्री पारिवारिक ऋण से युक्त है तो परिवार में जहां तक खून का संबंध है (जैसे जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन, बेटी-बुआ भाई, चाचा-ताया के परिवार के सदस्य आदि) सबसे बराबर-बराबर धन लेकर आपके शहर/गांव के चौक में बैठे कारीगर, हकीम/डाक्टर को उसका काम बढ़ाने के लिये वह धन दान स्वरूप दे देवें ।

‘‘कन्या/बहन का ऋण’’

ग्रहचाल: जातक की कुंडली में तीसरे या छठे खाने में चंद्रमा पड़ा हो तो बहन/लड़की का ऋण होता है।

निशानियां: जवानी में धोखा देना, बहन/बेटी की हत्या या उस पर जुल्म करना। मासुम बच्चों को  बेचना या लालच से बदल लेना/देना जिसका भेद दुनिया में कभी न खुले ऐसे रहस्मय आदि काम करना।

घटनाएं: जातक का किसी के साथ अपनी जुबान से बुरा शब्द बोलना तलवार से अधिक गहरा घाव कर सकता है, बेटा पैदा हुआ पिता को उसके धन-दौलत, आयु पर अशुभ फल होगा या माता को पता था कि वह जान से हाथ धो बैठेगी। खुशी के साथ मातम ससुराल-ननिहाल पर अशुभ फल, वर्ष भर की कमाई का वर्षांत में घाटा हो जाना आदि।

उपाय: यदि आपकी पत्री कन्या बहन के ऋण से युक्त है तो इसके लिए परिवार में जहां तक खून का संबंध (जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन, बेटी-बुआ, भाई, चाचा-ताया के परिवार के सदस्य आदि) है। सबसे बराबर-बराबर पीली कौडियां लेकर उसी दिन एक जगह इकटठी करके जला कर उनकी राख उसी समय जल में प्रवाहित कर देना।

‘‘पितृ ऋण’’

ग्रहचाल: जातक की जन्मकुंडली में 2 या 5 या 9 या 12 खानों में शुक्र या बुध या राहु या तीनों में दो या तीनों ही बैठे हो तो जातक पर पितृ ऋण होता है।

निशानियां: कुल पुरोहित बदलना या कुल पुरोहित से नाता तोड लेना, घर के साथ बने मंदिर को तोड़ देना। पीपल का पेड़ काटना। पीपल का पेड़ होना आदि।

घटनाएं: परिवार में किसी बुजुर्ग के बाल सफेद हो जाए। बाल सफेद होने के बाद बालों में पीलापन होना शुरू हो जाए, काली खांसी की शिकायत, हो अथवा माथे पर दुनिया की गंदी करतुतो का कलंक लगना आदि घटनाएं होती है।

उपाय: यदि आपकी पत्री पितृऋण से युक्त है तो इसके लिए परिवार में जहां तक खून का संबंध (जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन,  बेटी-बुआ, भाई, चाचा-ताया के परिवार के सदस्य आदि) है सबसे बराबर-बराबर धन (एक-एक या पांच-पांच या दस-दस रुपये अधिक से अधिक जितने भी रुपये दे सकें) लेकर उसी दिन मंदिर में दान कर देना आदि।

‘‘स्त्रीऋण’’

ग्रहचाल: जातक की जन्मकुंडली में सातवें खाने में सूर्य या चंद्रमा या राहु या तीनों में दो या तीनों ही इकट्ठे बैठे हों तो स्त्री ऋण होता है।

निशानियां: परिवारिक पेट पर लात मारना, स्त्री को बच्चा पैदा होने या बच्चा जनने की हालत में किसी लालच में आकर मार देना। दाँंतो वाले जानवरों की पालने से परिवार में नफरत का उसूल चलता होगा। मकान का गेट दरवाजा दक्षिण दिशा में होना, जीव हत्या करना, मकान या मशीनरी धोखे से ले लेना, किसी की चीज हड़प लेना उसे मुंहताज कर देना आदि।

घटनाएं: नर संतान का फल मंदा हो जाता है, चमड़ी में कोढ़, फलवहरी, गुप्तांग में रोग हो जाना, किसी का विवाह होना किसी मुर्दे को जलाना। एक स्त्री के साथ वैवाहिक संबंध टूटने लगे दूसरी स्त्री के साथ संबंध जुड़ने लगना अर्थात दूसरा विवाह होना आदि।

उपाय: यदि आपकी पत्री स्त्री ऋण से युक्त है तो इसके लिए परिवार में जहां तक खून का संबंध (जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन, बेटी-बुआ, भाई, चाचा-ताया के परिवार के सदस्य आदि) है सबसे बराबर-बराबर धन  लेकर गऊ शाला में 100 गायों को चारा खिलाएं (उसमें कोई भी गाए अंगहीन न हो) आदि।

‘‘निर्दयी का ऋण’’

ग्रहचाल: जन्मकुंडली में खाना नंबर 10 या 11 में सूर्य या चंद्र या मंगल या तीनों में दो या तीनों  ही इकट्ठे बैठे हो तो निर्दयी ़ऋण होता है।

निशानिया: मशीन या मकान की पेशगी देकर न खरीदना, परीक्षा हाल से अकारण बाहर निकाला जाना, बडे़ लोगों से अकारण झगडे़ या मुकद्दमें लड़ना आदि।

घटनाएं: संतान और ससुराल की असमय मृत्यु, तेल या नारियल या लकड़ी या बारदाना के गोदाम में आग लग जाना। मकान खरीदा उसमें रहना नसीब नहीं, मकान खरीदे तो उसकी सिढ़ियां मुरम्मत करानी पड़े या तोड़ कर दुबारा बनानी पडे़, सांप और जहर पान की घटनाएं, हथियार से मौत होना आदि।

उपाय: यदि आपकी पत्री निर्दयी ऋण से युक्त है तो इसके लिए परिवार में जहां तक खून का संबंध (जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन, बेटी-बुआ, भाई का परिवार चाचा-ताया के परिवार के सदस्य आदि) है सबसे बराबर-बराबर धन लेकर सौ अलग-अलग स्थानों की मछलियों को खाना खिलाना चाहिए।

‘‘आजन्मकृत ऋण’’

ग्रहचाल: जातक की जन्मकुंडली में खाना नंबर 12 में सूर्य या शुक्र या दोनों इकट्ठे बैठे हो  तो आजन्मकृत ऋण ऋण होता है।

निशानियां: बिजली की तार लीक कर जाना, घर जल जाए, लाखों-करोड़ों पति कुछ ही समय में किसी भी तरह से तबाह हो जाये, सोना गुम या चोरी-ठगी-गबन की घटनाएं, सिर पर जख्म या सिर की बीमारियां, बचपन से बुढ़ापे तक नालायक साबित होना, सोच समझ कर काम करने के बावजूद गरीबी और बेसहारा, दमा-मिरगी, काली खांसी, सांस की तकलीफ, अचानक मौत, मकान की दहलीज के नीचे से गंदा पानी बहना अथवा आवासीय मकान के आगे

घटनाएं: मुकद्दमें में फैसले पर नहक जुर्माना/कैद, ससुराल या दुनिया वालो की ठगी करना, या ऐसी ठगी करना जिससे दूसरे का परिवार या नौकरी-व्यापार नष्ट हो जाना आदि।

उपाय: यदि आपकी पत्री आजन्मकृत ऋण से युक्त है तो इसके लिए परिवार में जहां तक खून का संबंध (जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन, बेटी-बुआ, भाई, चाचा-ताया के परिवार के सदस्य आदि) है सबसे एक-एक नारियल उसी दिन जल में प्रवाह करना चाहिए।

“ईश्वरीय ऋण”

ग्रहचाल: जातक की जन्मकुंडली में छठे खाने में चंद्रमा या मंगल हो तो ईश्वरीय ऋण होता है।

निशानिया: कुत्ते का काटना, छत से बच्चों का गिरना या बच्चा को गाड़ी के नीचे आ जाना, कानों से बहरापन, रीढ़ की हड्डी में कष्ट, संतान पैदा न होना या होकर मर जाना, संतान सुख में बाधा, पेशाब की बिमारियां अधरंग, ननिहाल नष्ट हो जाना, यात्रा में हानि अथवा दुर्घटना हो जाना आदि।

घटनाएं: किसी पर इतबार किया उसने धोखा दिया, कुत्तों को मारना या मरवाना, गरीब या फकीर की बददुआ लेना, बदचलनी, किसी के लड़कों को गुमराह करके बरबाद करना या करवाना, बुरी नीयत, लालच में आकर किसी का नुकसान करना आदि।

उपाय: यदि आपकी पत्री ईश्वरीय ऋण से युक्त है तो इसके लिए परिवार में जहां तक खून का संबंध (जातक के दादा-दादी, माता-पिता, बहन, भाई का परिवार चाचा-ताया के परिवार के सदस्य, बेटी-बुआ आदि) है सबसे बराबर-बराबर धन लेकर 100 कुत्तों को एक ही दिन में खाना खिलाना।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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