sharad purnima

शरद पूर्णिमा और इसका तंत्रोक्त महत्व

स्वास्थ्य और सम्पन्नता प्रदायनी शरद पूर्णिमा महोत्सव 

– आचार्य अनुपम जौली

“इस वर्ष शरद पूर्णिमा तिथि 30 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 46 मिनट से आरम्भ होकर 31 अक्टूबर को रात 08 बजकर 19 मिनट तक रहेगी l”

आश्विन मास की प्रथमा से नवरात्री आरम्भ होती है और दशहरे के उपरांत इस माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या आश्विन पूर्णिमा कहते हैं l इसी पूर्णिमा का तीसरा नाम कोजागरी पूर्णिमा भी हैं l मान्यता है की इस पूर्णिमा में भगवान श्रीविष्णु जी के साथ माँ लक्ष्मी जी की भी पूजा का विशेष महत्व है l इस साल यह पूर्णिमा सम्पूर्ण भारतवर्ष में 30 अक्टूबर 2020 को मनाई जाएगी l
पौराणिक मान्यता के अनुसार माना जाता है की माता लक्ष्मी शरद पूर्णिमा के दिन भूलोक पर विचरण करती है l जिसकी वजह से इस दिन को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते है l

शरद पूर्णिमा की इस रात को चावल की खीर बनाकर छत पर इस प्रकार रखा जाता है की उसपर चन्द्रमा की रश्मियाँ पढ़ती रहे l हजारों वर्षों से चली आ रही परम्परा के अनुसार मान्यता है की इस दिन चंद्रमा अपनी रश्मियों से अमृतवर्षा करते है l इसलिए इस दिन चंद्रमा की शक्ति से भरपूर इस खीर को खाने से मनुष्य की शारीरिक और मानसिक कई प्रकार की परेशानियां स्वत: ही समाप्त हो जाती है l
शरद पूर्णिमा को रात्रि जागरण, पूजा और चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है l
मान्यता अनुसार इस रात्रि को माता लक्ष्मी और देवराज इंद्र अपने ऐरावत पर बैठकर पृथ्वी पर आते है और जो भी रात्रि को जागकर माता लक्ष्मी जी को स्मरण या पूजा इत्यादि करता पाया जाता है उसको देवराज इंद्र और माता लक्ष्मी जी की पूर्ण कृपा की प्राप्ति होती है l

इस रात्रि पर चंद्र देव अपनी पूर्ण शक्ति से सभी लोकों को तृप्त करते है और श्रीमद्भागवत के अनुसार चन्द्र देव के जादू और भगवान श्रीकृष्ण जी की बांसुरी की मनमोहक नाद में श्रीकृष्ण-राधा जी के साथ समस्त संसार महारास में आंदोलित होता है l यह विशेष समय प्राणी मात्र को परमात्मा के परम आनंद की अवस्था में ले जाता है l इसीलिए इस दिन को रास पूर्णिमा और कौमुदी महोत्सव भी कहते हैं l
मान्यता है की इस दिन जो भी रात्रि को चन्द्र देव के प्रकाश में सुई में धागा दाल दे उसकी आंखे सदैव स्वास्थ रहती है l चंदमा की रश्मियों से भरपूर खीर खाने से मानसिक शक्तियों का विकास होता है l

इस दिन लोग उपवास करते है और मध्य रात्रि को चन्द्र देव की पूजा करते है और साथ ही चन्द्र देव को अर्ध्य भी दिया जाता है l माँ लक्ष्मी जी के भाई चंद्रमा की पूजा से माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होकर हम लोगों को भरपूर आशीर्वाद देती है l

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

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