Ramal Jyotish

रमल ज्योतिष में चोरी सम्बन्धी प्रश्न का हल

रमल ज्योतिष में प्रश्नों के चमत्कारिक और सटीक फलादेश दिया जाता हैl व्यावहारिक वैदिक ज्योतिष में आठवां भाव चोरी का होता है जिसके द्वारा एक ज्योतिषी कुछ बता पाता है l रमल ज्योतिष विज्ञान में चोरी सम्बन्धी प्रश्नों के भी सटीक उत्तर दिए जा सकते है l वैसे चोरी एक अपराध है। अत: चोर के बारे में प्रश्न का फल बताते समय रमलज्ञ को बहुत ही सावधानी से फलादेश करना चाहिए। चोरी सम्बन्धी ऐसी बातें नहीं बतानी चाहिये, जिनके कारण बाद में स्वयं को दुविधा में पडऩा पड़े।

चोरी सम्बन्धी अनेक प्रश्नों के फलादेश करने की विधि हम यहां दे रहे हैं।

प्रश्न: 1 चोरी हुई या नहीं?

चोरी हुई है या नहीं इस संदर्भ में रमल के पांसों को डालकर प्रश्न प्रस्तार (रमल प्रश्न कुंडली) के सोलह घरों में यदि हुमरा, नकी, अतवे खारिज, कब्जुल खारिज में से कोई भी मौजूद हो तो चोरी हुई हैl यदि इन शक्लों में से कोई भी शक्ल प्रस्तार में उपस्थित नहीं हो तो चोरी नहीं हुई है।

 उदाहरण कुंडली में हुमरा, नकी दोनों शक्लें उपलब्ध होने की वजह से प्रश्नकर्ता के यहाँ चोरी की वारदात हुई है।


प्रश्न: 2 चोर कौन है?

प्रश्न प्रस्तार की सभी शक्लों के बिन्दु और रेखायें गिन लें। रेखाओं की संख्या के जोड़ को दो से गुणा कर बिन्दुओं की संख्या से जोड़ में। इस संख्या में 3 का भाग दीजिये। यदि नीचे 1 शेष रहे, तो चोर अपना ही आदमी है, 2 शेष रहे, तो चोर पास-पड़ोस का है और 3 शेष रहे तो चोर बाहर का (परदेशी) है।

उदाहरण प्रस्तार में 31 बिन्दू 33 रेखाएं है l अत: 31 + 66 = 97 इसमें 3 का भाग देनें पर 1 शेष बचेगा l अत: चोरी अपने ही घर के सदस्य द्वारा की गई है।


प्रश्न: 3 चोर का परिचय।

प्रस्तार के घर 8, 12, 14 और 15 घर की शक्लों के प्रथम स्थान अर्थात् ऊपर ऊपर के रेखा बिन्दु को क्रमानुसार लेकर एक रूपी बनाइये। यह रूपी प्रस्तार के जिस घर में हो, उसी के अनुसार चोर के बारे में निम्न प्रकार से फलादेश कहिये उदाहरण कुंडली में  ये शक्ल प्राप्त हुई है जो की प्रस्तार में नहीं है l यदि प्रस्तार में होती तो निम्न प्रकार से फलादेश होता : –

घर का विवरण

  1. अपना ही आदमी है और घर में ही है।
  2. सम्बन्धी या पड़ोसी के घर में है।
  3. भाई, बहन, मित्र, सगोत्र आदि चोर है।
  4. पिता, चाचा, ताऊ, दादा या उनके पास रहने वाला चोर है।
  5. दूत, वेश्या, नृत्यकत्र्ता, खिलाड़ी या कोई कूदने वाला व्यक्ति चोर है।
  6. दास, दासी या शत्रु चोर है।
  7. भागीदार, स्त्रीजन आदि चोर है।
  8. लुटेरे, डाकू, इन्द्रजाली (बाजीगर) आदि चोर हैं।
  9. मार्ग चलता राहगीर, तपस्वी, साधु, अभ्यागत (अतिथि) चोर है।
  10. राजा का सेवक या प्रतिष्ठित व्यक्ति चोर है।
  11. मित्र, पंडित, मंत्री, मुनीम आदि चोर है।
  12. नीच व्यक्ति, निद्रा नाश करने वाला, चौकीदार, सिपाही आदि चोर हैं।
  13. कोई बहुत दूर का व्यक्ति चोर है।

यदि वह रूपी किसी भी घर में न हो, तो वह रूपी शकुन क्रम से जिस घर की हो, उसी घर से सम्बन्धित व्यक्ति या उसके द्वारा पालित या उसका सम्बन्धी या पास रहने वाला चोर है।

उदाहरण में अतवे ख़ारिज शकुन पंक्ति के बारहवे घर में आता है अत: यहाँ भी 12 नम्बर अर्थात (नीच व्यक्ति, निद्रा नाश करने वाला, चौकीदार, सिपाही आदि चोर हैं।) से सम्बंधित फल देगा l

चोर के लक्षण –  प्रस्तार के सावतें घर की शक्ल को देखिये। यह अवदह क्रम से कौन से घर की रूपी है। अब प्रस्तार में उसी घर की संख्या वाले घर में कौन सी रूपी है, उसे देखिये और निम्न विवरण के अनुसार चोर की जाति, रंग व स्वरूप आदि के लक्षण बताइये।

प्रस्तुत उदाहरण में सातवीं शक्ल नुस्त्रुल ख़ारिज   है जो की अवदह के 15 वें स्थान पर आती है ।

(1)       लहयान – ब्राह्मण, गौर वर्ण (रंग), धर्मात्मा, पंडित, मधुरभाषी, मीठा भोजन करने वाला, छोटी गर्दन, काले नेत्र, अस्थिर, दुबला शरीर, एक दाँत टूटा, सिर पर घाव, चोट या जलने का दाग या सिर गंजा।

(2) कब्जुल दाखिल- श्रेष्ठ क्षत्रिय, गहुआ रंग, मीठा बोलने वाला, काले नेत्र, शिल्पी (कारीगर), चतुर, मध्यम शरीर, बड़ा सिर, लम्बी गर्दन, भौंहे मिली हुई, छोटे कान, बड़े पेट पर सलें (बल) पड़ती हो, तुरतमति (हाजिर जबाव)।

(3) कब्जुल खारिज- म्लेच्छ, पाण्डल, अन्यायी, फोड़े – फुन्सी के घावों के निशान, भारी शरीर, बिल्ली जैसी  आंखें (माजरा मार्जर), लम्बी आवाज, काला और पीला मिश्रित रंग, बड़े (मोटे) दाँत, चुगलखोर, कड़ी चीजें पसन्द करने वाला, निन्दित स्थान में रहने वाला, मुंह पर चेचक के दाग, मोटे (भारी ) पांव, छोटे दाँत, छाती पर बाल।

(4) जमात- गेहुंआ पक्का रंग, शूद्र जाति, चित्रकार, गुणवान्, बड़ी नाक, चौडा माथा, गर्दन पर फोड़े – फुन्सी के चिन्ह, बड़ी दाड़ी, चेहरे पर सांवलापन, काले नेत्र, बड़ा मुख।

(5) फरहा – गौर वर्ण, दीर्घ शरीर, लिखने में चतुर, हंसमुख, कटी हुई भौंहे, काले व छोटे नेत्र, मीठा भोजन करने वाला, मंझला शरीर, स्वरूपवान्, बिना दाढ़ी वाला, पतली नाक, गोल चेहरा, तिलधारी, कान के नीचे घाव या फोड़े का चिन्ह।

(6) उकला – काला वर्ण, दीर्घ और लम्बा मुख (चेहरा) नीच जाति, मोटी और ऊँची नाक, ठिगना शरीर, छोटा सिर, चौड़ा मुंह, छोटे दांत, लम्बी दाढ़ी, छोटे पैर, लम्बी पिण्डली, चेहरे के बांई और या सिर पर निशान या लहसून (लाल) और दांई आंख या दांये पैर पर तिल (काला) निशान।

(7) अंकीश – काला रंग, खेती का काम, काले नेत्र, बुरा वेष (कपड़े आदि) घर के काम में निपुण, गोल चेहरा, मोटे ओठ (होंठ), सिर बड़ा, दांत बड़े और लम्बे, स्त्री हो। पुरुष का रंग काला, लम्बा चौड़ा शरीर, आँखोंं और दाँतों में कोई ऐब (दोष) हो।

(8) हुमरा- क्षत्रिय, शूरवीर, शास्त्रों की मरम्मत करने में निपुण, चोरी करने वाला, पेशेवर, लम्बा शरीर, दाढ़ी में लहसुन या तिल या दाग (गढडा) हो। चेहरे पर चेचक (माता) के दाग, लड़ाकू प्रकृति वाला।

(9) बयाज- गौर वर्ण, ब्राह्मण, सुखी, देवता का पुजारी, रूपवान्, भरा हुआ सुडौल शरीर (सुन्दर), मंझला कद, भौंहें मिली हुई छोटा चेहरा, बड़े काले नेत्र लम्बे बाल, चौड़ी छाती, दाँत खुले हुए, दाहिनी छाती पर तिल, पेट पर घाव का चिन्ह, बगल में तिल हो। लड़ाकू स्वभाव वाला।

(10) नुस्त्रुल खारिज – उत्तम क्षत्रिय, राजकाज में लगा हुआ, धर्म रत, दीर्घ देह, गौर रंग, सुन्दर नेत्र, जस के समीप स्थान पर रहने वाला, खड़ी नाक, घोटा सिर, छोटी दाढ़ी, चौड़ी छाती, ऊँची बुलन्द आवाज, पतली अंगुलियाँ, पीले दांत, गोल चेहरा, उस पर तिल, लहसुन आदि।

(11) नुस्त्रुल दाखिल- गौर वण्र, तपस्वी, ब्राह्मण, लम्बा शरीर, गोल चेहरे पर तिल के चिन्ह, बड़े नेत्र। यदि इसकी पूनशक्ति घर 7 में हो, तो चोर पुरुष है, नहीं तो स्त्री या बालक है। नाक बड़ी, सिर बड़ा, पैरों पर चोट के या जलने के निशान।

(12)    अतबे खारिज – म्लेच्छ (नीच) जाति, घावों के कई चिन्ह, दुबला पतला शरीर। काला रंग, मुंह से दुर्गन्ध, लम्बा डीस शरीर बड़े पैर, छोटा सिर, पतली गर्दन, नीचे का दांत टूटा हो या कीड़े द्वारा खाया गया हो।

(13) नकी – क्षत्रिय, गौर वर्ण, कमजोर और पीले नेत्र, मध्यम शरीर मुख बड़ा, नाक बड़ी, होंठ बड़े, दांत छीदे, नीचे का दांत टूटा या अधटूटा हो, निर्भीक, मांसाहारी।

(14) अतवे दाखिल – गेहुंआ रंग, लम्बा पतला कमजोर शरीर, परन्तु शूरवीर, मुख सुन्द, कटीली भौंहें, जांघ बड़ी, काले नेत्र, नेत्रों में तिल का चिन्ह, चेहरा गोल, पैर छोटे, नाक छोटी, मुख  छोटा, काम बड़े, पिंडलियों पर या पैरों पर चिन्ह बाई ओर नाक पर छेद हो।

(15)    इजत्तमा – शूद्र जाति, राजा का लिपिक, (क्लर्क) ज्योतिषी, गुणी हो। गेहुंआ रंग, सुन्दर दाढी, खुली भौंहे, तुरन्त उत्तर देने वाला, मुख (चेहरे) के दांये भाग पर चिन्ह, दाग आदि हो, ब बगल में चिन्ह हों या फोड़े फुन्सी का चिन्ह हो। नाक छोटी, दाँत चौड़े।

(16)  तरीक- गौर वर्ण, वैश्य जाति, दीर्घ देह, स्त्री हो। शरीर पतला या कमजोर, आवाज बारीक, छोटा सिर। नाक, कान, छाती आदि पर या बांये भाग में निशान या तिल हो।


प्रश्न – चोर कहां है?

प्रस्तार के घर (1×4) तथा (1×8) की दो शक्लें बनाकर उनसे एक शक्ल का निर्माण करें। यदि यह शक्ल प्रवेशी (दाखिल) हो या साबित हो तो चोर उसी ग्राम या बस्ती है। यदि वह शक्ल निर्गम (खारिज) हो, तो वह ग्राम में नहीं है, कहीं बाहर चला गया है और मुन्कलिब शक्ल होने पर बाहर जाने को तैयार है।

यदि नवम घर में खारीज शक्ल हो, तो चोर दूर चला गया है, परन्तु तीसरे घर में खारिज शक्ल हो, तो कहीं समीप में ही है। यदि घर 3 ओर 9 दोनों में खारिज शक्ल हो, तो जो बलवान हो उसका फल कहिये। इनमें खारिज शक्ल न हो, तो चोर उसी ग्राम या स्थान में है, बाहर नहीं गया है।


प्रश्न- चोर के जाने की दिशा?

प्रस्तार के दशम घर की शक्ल का जिस दिशा से सम्बन्ध है, उसी दिशा में चोर गया है तथा चोर के घर का दरवाजा नवम घर की शक्ल की दिशा की ओर है।

उदाहरण प्रस्तार में इसमें दशम धर की शक्ल जमात है जिसकी दिशा दक्षिण है और नवम घर की शक्ल ल्हयान है जिसकी दिशा पूर्व है ।


प्रश्न- चोरी गया माल मिलेगा या नहीं?

(क) प्रस्तार के घर (2 &11) और (1&14) को गुणा कर पहले दो रूपी, फिर उनकी गुणा कर एक रूपी बना लीजिये।

यदि वह रूपी दाखिल (प्रवेशी) हो अथवा बयाज हो, तो चोरी गयी वस्तु शीघ्र मिलेगी, अन्यथा नहीं। यदि पन्द्रहवें घर में उक्ला हो, तो कोई लाभ नहीं होगा।

(ख) यदि प्रस्तार के दूसरे घर में शुभ दाखिल या साबित हों, तो चोरी गया पूरा धन मिल जायेगा। परन्तु यदि अशुभ हो या मुन्कलिब हो, तो आधा धन मिल पायेगा। यदि खारिज हो, तो कुछ नहीं मिलेगा।

(ग) यदि आठवें घर में खारिज रूपी हो, तो चोरी का माल चोर के पास भी नहीं है, उसने किसी को दे दिया है।


प्रश्न – कोई वस्तु मिलेगी या नहीं?

चोर का घर सातवां है और उसके धन का घर अगला अर्थात् आठवां है। इन दोनों घरों की रूपी मातृ घर (1,2,3,4) में और ग्यारहवें लाभ के घर में भी पुनरूक्ति करती है तो ऐसी स्थिति में माल शीघ्र मिलेगा उक्त प्रश्न का माल (कान के बूंदें) उसी दिन मिल गये।

Acharya Anupam Jolly

आचार्य अनुपम जौली, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है और अब आचार्य जी ने रमल शास्त्र पर अपनी कुछ अत्यंत विशिष्ट खोज करके यह साबित कर दिया कि कालांतर में विलुप्त हो चुकी हमारी अद्भुत एवं दिव्य ज्ञानवर्धक विद्यायें हमारे लिए बेहद लाभदायक थीं। जिन्हें अल्पज्ञान के चलते आप और हम नजऱ अन्दाज कर बैठे हैं।

1 comment

  • मेरे लड़के का नाम यदुनंदन जन्मतिथि 14 FEB. 1985 समय 06:45a.m. स्थान: RAIGARH (C.G.)
    प्रश्न: इसका कोई धंधा/व्ययवसाय/नौकरी नहीं है, इसलिये इसका विवाह भी नहीं हो रहा है ।
    कृपया इसका समाधान रमल ज्यौतिष से बतायें ।

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